मंगलवार, 10 अप्रैल 2012

मोहतरमाओं ! गर्भ धारण से पूर्व एक नजर अपने ;तौल' और 'कसरत' पर भी डालिए.

मोहतरमाओं !   गर्भ धारण से पूर्व एक नजर अपने ;तौल' और 'कसरत' पर भी डालिए.
भावी माताओं के लिए यह इसलिए भी ज़रूरी है ,क्योंकि एक नवीनतर अध्ययन  के मुताबिक़ मोटापे से ग्रस्त ओबीस मोहतरमाओं ,मधुमेह और उच्च रक्त चाप जैसे जीवन शैली रोगों जैसे रोगों के साथ कदम ताल  करती ,तालमेल बिठाती महिलाओं के लिए भी  आत्म- विमोही संतानों को जन्म  देने के मौके दोगुने हो जातें हैं .
Obese moms more likely to have autistic kids /THE TIMES OF INDIA ,BANGALORE ,APRIL 10,2012,P13  .
आलमी साइंसदानों की एक टोली ने अपने अध्ययन में पता लगाया है ,जो भावी माताएं ओबीस होने के  साथ उससे संगत जीवन शैली रोग मधुमेह (सेकेंडरी डायबितीज़ )या फिर हाइपर -टेंशन से ग्रस्त रहतीं हैं उनकी संतानों के लिए आत्म विमोह या फिर अन्य विकासात्मक समस्याओं की सौगात लेकर पैदा होने के मौके बढ़ जातें हैं .
दरअसल गर्भस्थ को जब बढे हुए ग्लूकोज़ स्तर से ताल  मेल बिठाना पड़ता है ,तब उसके अन्दर अपचयन सम्बन्धी बदलाव पैदा हो जातें हैं .मेटाबोलिक चेंजिज आतें हैं .नतीज़न गर्भस्थ सामान्य से ज्यादा ऑक्सीजन की खपत करने लगता है .ऐसे में दिमाग को ऑक्सीजन का तोड़ा ,किल्लत पेश आने लगती है जो तेजी से विकासिक चरणों से गुज़र रहा होता है .तेज़ी से बढ़ रहा होता है .
रिसर्चरों के ये निष्कर्ष २-५ साला १०० नौनिहालों के विश्लेषण अध्ययन पर आधारित रहें हैं .इनमे से दो तिहाई या तो ऑटिज्म या फिर विकासात्मक अन्य समस्याओं की चपेट में आ गए थे .इनकी  तुलना  बकाया  एक तिहाई बालकों  से की गई  जिनका  विकास सामान्य तरीके  से हुआ  था  पता चला ओबीस महिलाओं के लिए ऐसी संतानों को जन्म देने के मौके ७०% ज्यादा हो जातें हैं .
राम राम भाई !  राम राम भाई !  राम राम भाई !
चेहरे झूठ नहीं बोलते ज़नाब !
दिल  की बात बता देता है असली नकली चेहरा ,लाख छुपाओ  छुप न सकेगा राज कितना गहरा .
जानना चाहते   हो सामने वाला सच बोल रहा है या  झूठ ?उसकी भृकुटियाँ देखों ,देखो उसके होंठ .सब कुछ कह देंगें .
साइंसदानों  के  मुताबिक़ संवेगात्मक दवाब के क्षणों में चेहरे की चार पेशियाँ सारी कथा कह देतीं हैं झूठ और सच की असली और नकली तस्वीर उजागर कर देतीं हैं .
हताशा    के क्षणों में मासूम  निर्दोष    लोगों  की भंवें  तन    जातीं  हैं भृकुटी में बल   पड़  जातें   हैं . जबकी झूट  बोलने वाले  की भृकुटी उठती भर है होठों पे हलकी मुस्कान लिए ,आश्चर्य मिश्रित   भाव लिए -'अरे  इसे  पता  चल  गया  ,टूट गए  मेरे झूठ के पाँव .'
चेहरे के भाव छिपाए नहीं छिपतें हैं व्यक्ति का इनपर कोई बस नहीं चलता .सारी शातिरी और झूठ बोलने की माहिरी धरी की धरी रह जाती है .
बोलने और खाने में प्रयुक्त पेशियों पर आदमी का थोड़ा नियंत्रण ज़रूर रहता है लेकिन ऊपरी भाग की पेशियों पर कोई नियंत्रण नहीं रहता है .इनके  संचालन  में हेर  फेर  संभव  ही  नहीं है .स्वत  :स्फूर्त  है इनका  संचालन ,आपसे आप होता है भाव के पीछे जैसे अनुभाव चला आता है .संचारी भाव भी .

साइंसदानों के मुताबिक़ चेहरे   की पेशियों का संचालन हम सायास, सचेतन होकर  नहीं करतें हैं कोई नियंत्रण नहीं रहता है इन पर हमारा . चेहरा दे   देता है सच और झूठ की आहट संकेत .चेहरे  झूठ नहीं बोलते .बोलें तो पोल  खुल जाती है
राम राम भाई !  राम राम भाई !
दिल  की बात बता देता है असली नकली चेहरा ,लाख छुपाओ  छुप न सकेगा राज कितना गहरा .
जानना चाहते   हो सामने वाला सच बोल रहा है या  झूठ ?उसकी भृकुटियाँ देखों ,देखो उसके होंठ .सब कुछ कह देंगें .
साइंसदानों  के  मुताबिक़ संवेगात्मक दवाब के क्षणों में चेहरे की चार पेशियाँ सारी कथा कह देतीं हैं झूठ और सच की असली और नकली तस्वीर उजागर कर देतीं हैं .
हताशा    के क्षणों में मासूम  निर्दोष    लोगों  की भंवें  तन    जातीं  हैं भृकुटी में बल   पड़  जातें   हैं . जबकी झूट  बोलने वाले  की भृकुटी उठती भर है होठों पे हलकी मुस्कान लिए ,आश्चर्य मिश्रित   भाव लिए -'अरे  इसे  पता  चल  गया  ,टूट गए  मेरे झूठ के पाँव .'
चेहरे के भाव छिपाए नहीं छिपतें हैं व्यक्ति का इनपर कोई बस नहीं चलता .सारी शातिरी और झूठ बोलने की माहिरी धरी की धरी रह जाती है .
बोलने और खाने में प्रयुक्त पेशियों पर आदमी का थोड़ा नियंत्रण ज़रूर रहता है लेकिन ऊपरी भाग की पेशियों पर कोई नियंत्रण नहीं रहता है .इनके  संचालन  में हेर  फेर  संभव  ही  नहीं है .स्वत  :स्फूर्त  है इनका  संचालन ,आपसे आप होता है भाव के पीछे जैसे अनुभाव चला आता है .संचारी भाव भी .

साइंसदानों के मुताबिक़ चेहरे   की पेशियों का संचालन हम सायास, सचेतन होकर  नहीं करतें हैं कोई नियंत्रण नहीं रहता है इन पर हमारा . चेहरा दे   देता है सच और झूठ की आहट संकेत .चेहरे  झूठ नहीं बोलते .बोलें तो पोल  खुल जाती है
राम  राम  भाई  ! राम राम भाई ! राम राम भाई !
नुश्खे  सेहत  के  :
ब्रोक्काली को स्टीम करके खाने  से उसमें बढ़ जाता है ' Glucosinolates'का  सांद्रण .होतें हैं .कैंसर से  मुकाबले करने में यौगिकों का ये समूह ३०%कारगर रहता है .
Steaming broccoli increases its concentration of  Glucosinolates -the compounds that fight cancer -by as much as 30%.
 .
रेड वाइन में मौजूद रहता  है -पोलिफीनोल्स यौगिक संमूह .जो शरीर की वसा के अवशोषण को बाधित  करने में मदद करतें हैं .

7 टिप्‍पणियां:

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

मोटापा हर तरह से घातक ही है..... चेहरे की मांसपेशियों से जुडी जानकारी रोचक है.....

काजल कुमार Kajal Kumar ने कहा…

मोटापा तो सभी के लि‍ए त्‍याज्‍य है

रविकर फैजाबादी ने कहा…

बढ़िया प्रस्तुति । आभार ।।

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

दोनों ही बहुत आवश्यक मानक।

Maheshwari kaneri ने कहा…

मोटापा अपने में ही एक बीमारी है...बढ़िया और रोचक.जानकारी के लिए आभार.. ....

डॉ टी एस दराल ने कहा…

बहुत दिलचस्प स्वास्थ्य समाचार ढूंढ कर लाते हैं आप वीरुभाई जी .
आभार .

डा. अरुणा कपूर. ने कहा…

मोटापा बहुत नुकसान-दायक है...ऐसी माताओं के स्वयं के लिए भी और उनकी पैदा होने वाली संतान के लिए भी!...बहुत बढ़िया जानकारी!....आभार!