रविवार, 1 सितंबर 2013

Dexter Blueberries Farm



Dexter Blueberries Farm

अमरीका के मिशिगन राज्य की वेन स्टेट काउंटी का एक छोटा सा टाउन है डेक्सटर। तुरत फुरत बिना पूर्व योजना के वहां जाने का सौभाग्य हाथ आया। एक परिचित की बिटिया ने प्रस्ताव रखा और हम सभी मैं मेरी बेटी मेरे मित्रवत दामाद तथा हमारे दो धेवते तकरीबन ४ ० मिनिट की ड्राइव के बाद वहां पहुँच गए।

वहां ब्ल्यू बेरीज की पंक्ति बद्ध झाड़ियाँ ही झाड़ियाँ थीं लदी हुई फलों से। देखने में भारत में मिलने वाले फालसे के आकार से नन्ने  लेकिन मुंह  अनार सा सजावट लिए। देखने वाली बात यह थीं यहाँ कोई न माली था न फ़ार्म का रखवारा। एक वेईंग मशीन रखी थी ,और लकड़ी की बनी बंद इमारत के बाहर की दीवार पर एक छोटा सी रेट लिस्ट लटकी हुई। इस पर एक से लेकर प्रति दस पोंड तक कीमत लिखी हुई थी। प्रति पोंड एक डॉलर पिचहत्तर सेंट के हिसाब से।प्लास्टिक की बाल्टियां राखी हुईं थीं फल तोड़के सहेजने के लिए।

दीवार में ही एक लैटर बाक्स नुमा स्लिट था डॉलर या फिर चेक डालने के लिए। चेक डेक्सटर ब्ल्यू बेरीज के नाम ही काटा जाना था। यहाँ २० - २२ कुर्सियां भी पड़ी थीं। दो मोबाइल टॉयलिट्  भी थे। ऐसे अब भारत में भी ख़ास मौकों पर गणतन्त्र दिवस के अवसर पर राजपथ पर भी दिखलाई देते हैं। अन्यत्र जहां भी हमने दिल्ली में जन सुविधाएं देखीं विज्ञापन पटों से ढकी देखी। यह आपकी दूर दृष्टि ही कही जायेगी यदि आप ताड़ लें अरे ये तो रेस्ट रूम्स हैं ,जन सुविधाएं हैं। यकीन मानिए दिल्ली के दिल में बोले तो इंडिया गेट के पंडारा रोड स्थित बीकानेर आफिसर्स मेस में कई साल रहने का मौक़ा मिला। इसका मुख्य दरवाज़ा चिल्ड्रन पार्क को फेस करता है। बगलिया जो अक्सर बंद रहता है पंडारा रोड की  तरफ  है।एक दिन अचानक पता चला अरे गेट पर ही जन सुविधाएं जो बाहर से बेहद आकर्षक विज्ञापनों से ढकी हुई रहतीं हैं। जैसे ये जन सुविधाएं न होकर विज्ञापन पट ही हों मुकम्मिल तौर पर।

चलिए बात डेक्सटर ब्युबेरीज़ फ़ार्म की हो रही थी वहीँ लौटते हैं। आप जितना मर्जी ब्यू बेरीज खाइए उसका कोई पैसा नहीं लगता यहाँ। जो साथ ले जानी हैं वह अपने आप तौल कर वजन के मुताबिक़ चेक ,केश डालर स्लिट में खिसका दो और चेंज एक डिब्बे में डाल  दो। अरे साहब डिब्बे का भी मुंह खुला था कोई ताला नहीं।

हमारे यहाँ मुंबई में साईं  बाबा की सिर्फ एक तस्वीर कई पुराने अति प्राचीन वृक्षों के नीचे रखी हुई आपको मिलेंगी। लोग रुकते हैं शीश नवा चल देते हैं। एक छोटी कनस्तरी आपको दिखेगी। स्लिट इसमें भी होगा लेकिन कनस्तरी को ताला जड़ा  होगा।

गज्जन सिंह जी हमारे  साथ थे। हाँ उनकी बिटिया ने ही यह कार्यक्रम बनाया था। उसकी मम्मी भी साथ थीं। गज्जन सिंह जी बरसों से अमरीका में रह रहे हैं। अभी हाल फिलाल तक होटल शाने पंजाब चलाते थे गार्डन सिटी में। कहने लगे भाई साहब यहाँ कोई भी मालिक नहीं है और ये देश चल रहा है ईमानदारी  के बल पर। स्वर्ग है यह अपना देश ठीक इसके विपरीत नर्क है।

मैं सोचने लगा बात तो भाई साहब ठीक कहते हैं। रोहतक में जब पढ़ाता  था ,कोलिज गेट के बाहर यूनिवर्सिटी की दूकाने थीं जो किराए पर दे दी गईं थीं। यहाँ स्टेट बैंक  आफ इंडिया का एटीएम हुआ करता था। एक दिन शुभ मुहूर्त में इसे उखाड़ कर लोग ले गए। चोरी हो गया। इससे पूर्व के प्रयास में खराब हो गया लेकिन अंगद के पाँव सा अड़ा  रहा।  चोर इस दिन अंगद को भी मात दे गए।









श्रीमदभागवत गीता चौदहवाँ अध्याय (श्लोक १ - ५ )

(१ )भगवान् बोले -समस्त ज्ञानों में उत्तम उस परम ज्ञान को मैं फिर से कहूंगा ,जिसे जानकार सब साधकों ने इस संसार से मुक्त होकर परम सिद्धि प्राप्त की है। 

The Lord said :

I shall impart you another knowledge which is the best of all kinds of Higher knowledge ,acquainted with which the sages have attained the highest perfection transcending this world .

(2 )इस ज्ञान का आश्रय लेकर मेरे स्वरूप को प्राप्त मनुष्य सृष्टि के आदि में पुनर्जन्म नहीं लेते तथा प्रलय काल में भी व्यथित नहीं होते। 

Those who recourse to this knowledge ,attain similitude with Me and are not born even at the time of creation nor destructed at the time of dissolution .

( ३ )हे अर्जुन। मेरी महद्ब्रह्म  रूप प्रकृति सभी प्राणियों की योनि  है ,जिसमें मैं चेतन रूप बीज डालकर (जड़ और चेतन के संयोग से )समस्त भूतों (शरीरधारियों )की उत्पत्ति करता हूँ। 

माया द्वारा उत्पन्न प्रकृति महद्ब्रह्म  का स्रोत है ,मूल है ,बुनियाद है। अत :प्रकृति को महद्ब्रह्म भी कहा गया है। महद्ब्रह्म के कई नाम हैं ,यथा महत ,महतत्त्व ,परमबुद्धि और वैश्विक मनस। जब प्रकृति में पुरुष का बीज अंकुरित होने के लिए बोया जाता है ,तब प्रकृति सृष्टि की रचना करती है। 
अध्यात्म में पुरुष का एक अर्थ आत्मा भी बतलाया गया है प्रकृति एक अर्थ शरीर भी कहा गया है. 

O!Arjuna !The Prakriti (The MahatBrahman ) from which the universe is born is in my possession .In it I cast the seed of 'living -multitude '.The origin of all the embodied beings emanate from the association of these two .  

(४ )हे कुंती पुत्र ,सभी योनियों में जितने शरीर पैदा होते हैं ,प्रकृति उन सबकी माता है और मैं चेतना देने वाला पिता हूँ। 

O Arjuna !Among all the species of beings whatever living forms originate ,the Prakriti is the cause and I am the seed -bestowing progenitor .

(५ )हे अर्जुन प्रकृति से उत्पन्न तीनों गुणरुपी  रस्सी -सत्व ,रजस और तमस -अविनाशी जीव को देह के साथ बाँध देते हैं। 




8 टिप्‍पणियां:

Rahul... ने कहा…

डेक्सटर की ब्लुबेरिज फार्म का दिलचस्प वृतांत...
आप मुझे वहां कब ले जायेंगे.. ?
सिंह साहब, इस तरह की बातों को लिखने के साथ-साथ एक-दो फोटो भी भेज दें तो ज्यादा अच्छा होगा...

Rahul... ने कहा…

माफ़ करियेगा शर्मा जी, मैंने आपको सिंह साहब कह दिया.. दरअसल एक परिचित सिंह साहब से फ़ोन पर बात हो रही थी..और उनका नाम टाइप हो गया... क्षमा ..

Lalit Chahar ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति..

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हिंदी ब्लॉगर्स चौपाल {साप्ताहिक चर्चामंच} पर आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि हिंदी ब्लॉगर्स चौपाल में दूसरी चर्चा {रविवार} (01-09-2013) को हम-भी-जिद-के-पक्के-है -- हिंदी ब्लॉगर्स चौपाल चर्चा : अंक-002 को है। कृपया पधारें, आपके विचार मेरे लिए "अमोल" होंगें | आपके नकारत्मक व सकारत्मक विचारों का स्वागत किया जायेगा |
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सादर ....ललित चाहार

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

यह तो रामराज्य सा ही लगा

Anita ने कहा…

ब्लुबेरिज फार्म में जाना सार्थक रहा..बल्कि अति सार्थक..एक आदर्श राज्य का दर्शन हुआ, आभार !

काजल कुमार Kajal Kumar ने कहा…

भारत में जनसुवि‍धाएं वि‍लासि‍ता मानी जाती हैं इसलि‍ए सरकारें इन पर पैसा बर्बाद करना उचि‍त नहीं समझतीं. कहीं बना भी दीं तो कौन उनके रख रखाव पर पैसा ख़राब करता घूमे. यहीं की दीवारें और उनकी ओट, जनसुवि‍धाओं का भी रोल अदा करने में सक्षम हैं

arvind mishra ने कहा…

चित्र???????? ?

Vikesh Badola ने कहा…

यह अन्‍तर न जाने कब पटेगा