गुरुवार, 19 सितंबर 2013

भविष्य कथन से जुड़े मसले : गैर लाभ का अहितकर सौदा है ज्योतिषियों द्वारा बताया गया भाग्य फल

भविष्य कथन से जुड़े मसले 

गैर लाभ का अहितकर सौदा है ज्योतिषियों द्वारा बताया गया भाग्य फल। मान लीजिये आप एक व्यावसाई हैं और कोई ज्योतिषी आपको बतलाता है दो साल बाद आपका धंधा खूब फले फूलेगा। आप इसे जानकार फूल कर कुप्पा हो जायेंगे। पुरुषार्थ आपका शलथ (ढीला )पड़ जाएगा। कामयाब तो मुझे होना ही है। अब काहे की भागदौड़ करनी ,हाथ पैर मारने। 

दूसरी तरफ मान लीजिये इसके उलट कोई भविष्य फल वेत्ता आपको कहे -आपका धंधा दस साल बाद चौपट हो जाएगा। सुनकर आपके हौसले पस्त होने लगेंगे। हे भगवान् तब  क्या होगा ?धंधा धौरी चौपट हो न हो आपका दिल ज़रूर बैठ जाएगा। इसीलिए कहा गया है :चिंता चिता समान।

इस प्रकार अच्छा भाग्य फल सुनकर आप अपने प्रयत्नों के प्रति लापरवाह हो जायेंगे और बुरा आपको रात दिन की दुश्चिंताओं में डाल  देगा। 

अलावा इसके ये भाग्य फल आंशिक रूप से ही खरे साबित होते हैं। इस घोर कलियुग में चांदी कूटने वाले ज्यादा है विद्वान ज्योतिष बहुत कम हैं।बस थोड़ा सा उनका बताया सही निकल आये उनका धंधा चल निकलता है। 

खुशवंत सिंह जी उन दिनों मशहूर साप्ताहिक "Illustrated Weekly "के सम्पादक थे (१९७० का दशक ,1970's).भाग्य फल लिखने वाला उनका किराए का  ज्योतिषी जब नौकरी छोड़ के चला गया  .  उन्होंने इसके तीन साल बाद तक किसी को भी नियुक्त नहीं किया। वह खुद ही भवष्य कथन स्तंभ लिखने लगे। सम्पादक के नाम लिखे पत्रों में कई भाग्य फल बांचने वालों ने उनके खूब कसीदे काढे। खुशवंत सिंह जी मन ही मन मुस्काये और बोले -

"What quackery is to medicine so is astrology to astronomy ."

So a good policy is to take the predictions of astrologers with a pinch of salt ,and instead focus on your efforts .A famous Urdu poet put it very aptly when he said :

खुदी को कर बुलंद इतना कि हर तकदीर से पहले ,

खुदा खुद बंदे से पूछे बता तेरी रजा क्या है। 



Make your efforts so strong that before giving you the results of your destiny God Himself asks you what you want."

4 टिप्‍पणियां:

कालीपद प्रसाद ने कहा…

बहुत सुन्दर सरल शब्दों में आपने व्याख्या किया है .रोज भविष्य देखने वालों के लिए चेतावनी
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Rahul... ने कहा…

जिस समाज में कर्म की प्रधानता गौण होने लगे, वहां इस तरह का मायावी धंधा खूब फलता-फूलता है....
सरल शब्दों में आपने बातों को समझाया.. बधाई शर्माजी......

पूरण खण्डेलवाल ने कहा…

कर्म की प्रधानता में विश्वास करना चाहिए !

Darshan jangra ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति.. आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी पोस्ट हिंदी ब्लॉग समूह में सामिल की गयी और आप की इस प्रविष्टि की चर्चा - शुक्रवार - 20/09/2013 को
अमर शहीद मदनलाल ढींगरा जी की १३० वीं जयंती - हिंदी ब्लॉग समूह चर्चा-अंकः20 पर लिंक की गयी है , ताकि अधिक से अधिक लोग आपकी रचना पढ़ सकें . कृपया आप भी पधारें, सादर .... Darshan jangra