शुक्रवार, 20 सितंबर 2013

माया और योगमाया

माया और  योगमाया 

माया  परमात्मा की उस बाहरी भौतिक ऊर्जा को कहा जाता है   जिससे उसने  यह विश्व रचा है। निश्चेतन (जड़ ,चेतना शून्य ,निर्जीव )है माया। मैटीरियल एनर्जी है माया। गोचर जगत के सूक्ष्म और स्थूल सभी पदार्थ माया से ही उपजे हैं। योगमाया परमात्मा की निजिक (नैजिक )शक्ति है जिससे वह अपनी   शेष सभी शक्तियों का विनियमन करता है शासन  करता है शेष शक्तियों पर योगमाया से परमात्मा।दिव्यनिजी शक्ति है परमात्मा की योगमाया जो उसकी शेष शक्तियों पर  भी शासन करती है।  

परमात्मा का दिव्य लोक रहवास योगमाया की ही सृष्टि है। इसी के माध्यम से वह अवतार रूप में इस संसार में आता है। कृष्ण का विलास है मनबहलाव है यही योगमाया। इसी योगमाया से वह हमारे हृदय में वास करता है हमारे तमाम कर्मों को देखता है। स्वयं  अगोचर बना रहता है। 

उसके रूप की मिठास परमानंद है यही योगमाया। कृष्ण की   बंसी की टेर है यही योगमाया। यही लीला पुरुष का रास (रास लीला है ). उसके गुणों का आगार  है यह।उसका लालित्य चारु भाव है यही योगमाया। परमात्मा की कृपा इसी योगमाया से मिलती है। परमात्म प्रेम की प्राप्ति यही करवाती है। 

माया को शासित करके सृष्टि रचती है योगमाया। सृष्टि  की दिव्यमाँ स्वरूपा है योगमाया। दुर्गा ,सीता ,काली ,राधा ,लक्ष्मी ,मंगला ,पार्वती का मूर्त रूप है यही योग माया। यहाँ  दो तो हैं ही नहीं। कृष्ण राधा का शरीर है राधा कृष्ण का। इसीलिए राधे श्याम हैं और सीता राम हैं।शंकर के  घर भवानी है योगमाया। ये साधारण नारियां नहीं हैं दिव्या हैं। योगमाया के ही विभिन्न प्रगट रूप हैं ये विशिष्ठ नारियां(देवियाँ )। 

ॐ शान्ति   

8 टिप्‍पणियां:

Anupama Tripathi ने कहा…

माया और योगमाया ...परस्पर एक दूसरे का प्रतिबिंब ... सार्थक ज्ञानवर्धक आलेख ...!!
आभार।

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया ने कहा…

बहुत खूब,सुंदर सार्थक ज्ञानवर्धक आलेख ...

RECENT POST : हल निकलेगा

रविकर ने कहा…

गूढ़ विषय -सहज अंदाज-
आभार भाई जी-

Kuldeep Thakur ने कहा…

सुंदर रचना...
आप की ये रचना आने वाले शनीवार यानी 21 सितंबर 2013 को ब्लौग प्रसारण पर लिंक की जा रही है...आप भी इस प्रसारण में सादर आमंत्रित है... आप इस प्रसारण में शामिल अन्य रचनाओं पर भी अपनी दृष्टि डालें...इस संदर्भ में आप के सुझावों का स्वागत है...

उजाले उनकी यादों के पर आना... इस ब्लौग पर आप हर रोज 2 रचनाएं पढेंगे... आप भी इस ब्लौग का अनुसरण करना।

आप सब की कविताएं कविता मंच पर आमंत्रित है।
हम आज भूल रहे हैं अपनी संस्कृति सभ्यता व अपना गौरवमयी इतिहास आप ही लिखिये हमारा अतीत के माध्यम से। ध्यान रहे रचना में किसी धर्म पर कटाक्ष नही होना चाहिये।
इस के लिये आप को मात्रkuldeepsingpinku@gmail.com पर मिल भेजकर निमंत्रण लिंक प्राप्त करना है।



मन का मंथन [मेरे विचारों का दर्पण]


ताऊ रामपुरिया ने कहा…

बहुत ही गूढ ज्ञान.

रामराम.

दिगम्बर नासवा ने कहा…

तो ये असल माया योगमाया की है जो नम से माया हठाने आती है .. दिव्य रूप में ...
सार्थक चिंतन की धारा ...

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

सुन्दर संबंध

Anita ने कहा…

परमात्मा की कृपा इसी योगमाया से मिलती है। परमात्म प्रेम की प्राप्ति यही करवाती है।

वाह ! परमात्मा की कृपा को पाने का पता मिल गया..