रविवार, 16 सितंबर 2012

कानों में होने वाले रोग संक्रमण का समाधान भी है काइरोप्रेक्टिक में

कानों में होने वाले रोग संक्रमण का समाधान भी है काइरोप्रेक्टिक में 

Acute Otitis Media (Middle Ear Infection)

कान के बीच वाले हिस्से में लगने वाले रोग संक्रमण को कहा जाता है ओटाईटइस मीडिया .इस कष्टकर तकलीफदेह स्थिति में कान के बीच का हिस्सा जो कान के परदे और कपाल (खोपड़ी )के बीच का हिस्सा होता है सूज जाता है .इस स्थिति के लक्षणों में चक्कर आना तथा अस्थाई श्रवण ह्रास है .सुनाई देना अल्पकाल के लिए बंद भी हो सकता है .ऐसे में माँ बाप की मुश्किल तब बढ़ जाती है जब बच्चा रात को गहरी नींद से उठके अचानक रोने लगता है . छूने पर पता  चलता है तच(तप)रहा है बच्चा ज्वर से  .जी हाँ !  बच्चे को इस स्थिति में बुखार भी चढ़ सकता है. कान भी बह सकता है उसका .

प्रतिजैविकी दवाएं (एंटीबायोटिक्स )और शल्य चिकित्सा 

कानों के रोग संक्रमण में कान -  नाक गले के माहिर द्वारा एंटीबायोटिक दवाएं नुसखे में लिखना आम बात होती है .ऐसे में बंद नाक आदि को खोलने ,नासिका श्लेष्मा को पतला करने के लिए ,ब्रोंकी ,साइनस आदि से दवाब हटाने के लिए ओरल डीकनजेसटेंट भी दिए जाते हैं  ,कानों में नलियां भी डाली जातीं हैं ,शल्य भी किया जाता है .लेकिन इनसे मिलने वाले लाभ सवालों के निशाने पे रहें हैं .

उदाहरण लीजिए :

एक डबल ब्लाइंड अध्ययन में एक्यूट ओटाई -टिस मीडिया से ग्रस्त १७१ बच्चों को शरीक किया गया .कुलमिलाकर २३९ कर्ण इस तीव्र पीड़ा दायक संक्रमण से ग्रस्त थे .इन बालकों को चार वर्गों में रखा गया .एक वर्ग का इलाज़ शल्य द्वारा किया गया ,दूसरे को एंटीबायटिक्स दिए गए .तीसरे समूह के सभी नौनिहालों पर  शल्य और एंटीबायटिक दोनों ही इलाज़ के बतौर आजमाए गए लेकिन चौथे समूह को किसी भी प्रकार की दवा दारु या शल्य उपलब्ध नहीं करवाया गया .

कोई ख़ास अंतर दर्द की तीव्रता ,कान के बहने की अवधि ,ज्वर ,ओटोस्कोपिक  जांच (हेंड हेल्ड लाइटिद डिवाइस से मध्य कान की जांच ), ऑडियोमीटर  से की गई श्रवण क्षमता जांच में प्रगट नहीं हुआ .स्वास्थ्य लाभ सभी को इक ही अवधि के बाद इक सा ही मिला .


Otoscopic Evaluation 

An otoscopic evaluation simply means your Physician or Audiologist will look into your ears with a handheld, lighted device called an otoscope. This is done to make sure there is no build up of wax, signs of infection, or any other problem in your ear canals or tympanic membrane (eardrum) that could affect your hearing evaluation. 

बतलादें आपको कान की संरचनात्मक बनावट और प्रकार्य ,कामकरने के तरीके ,कानों की तमाम बीमारियों  और उसके इलाज़ से ताल्लुक रखने वाले विज्ञान को कहा आजाता है ओटोलोजी .(otology).कान के रोगों के माहिर को कहा जाता है ओटोलोजिस्ट .ओटोस्कोप कानों की जांच के लिए प्रयुक्त  इक ऐसा उपकरण है जो इक प्रकाश स्रोत और आवर्धक लेंस से लैस रहता है इसका इस्तेमाल कान की  बाहरी ट्यूबनुमा संरचना या एक्स्टर्नल कैनाल तथा कान के परदे की जांच के लिए किया जाता है .

कानों में ट्यूब्स फिट करना (tympanostomy)

तकरीबन  कानों के बार बार होने वाले रोग संक्रमण के दस लाख मामलों में अमरीका में ट्यूब फिट कर दी जातीं हैं .लेकिन क्या ये कारगर रहतीं हैं ?

योरोप में किये गए कंट्रोल्ड अध्ययनों में जिन बच्चों के दोनों कानों में संक्रमण था उनमें  से इक में नली डाल दी गई .जबकि दूसरे कान का इस्तेमाल कंट्रोल के रूप में किया गया है .नतीजे दोनों ही कानों के मामले में इक जैसे रहे .फायदा तो दूर जिस कान में नली डाली गई उसमें  कई किस्म की जटिलताएं पैदा हो गईं कुछ मामलों में तो स्थाई सूराख ही हो गया .कान क्षत - विक्षत होना तो आम बात थी .

इक नामचीन बाल रोगों के माहिर कानों के संक्रमण के लिए अपनाए गए इन उपायों को इक दम से गैर ज़रूरी बतलाया करते थे .बकौल उनके इन मामलों में जैतून का तेल गरम करके इक दो बूँद एक्स्टर्नल कैनाल में टपका देनी चाहिए ,बस थोड़ी सी व्हिस्की बच्चे के मुंह में डाल देनी चाहिए ताकि बच्चा और सब तीमारदार आराम से सो जाएं .उन्हीं के शब्दों में :

The late Dr.Robert S. Mendelosohn , a leading pediatrician ,stated ,"In the future ,we doctors may have to consider whether the entire panoply of therapy for simple ear infections (antibiotics ,antihistamines ,insertion of tubes ,tonsillectomy ) does not represent overkill for a condition that ,except in malnourished children , is always self -limited.(In accordance with his philosophy of always choosing the most conservative option first ,Dr .Mendelosohn would prescribe heated olive oil dropped into the ear canal ,and whisky (by mouth )to alleviate the pain and allow everyone ,patient included ,to get some sleep while the infection cleared up all by itself.)

Cause Of Ear Infections ?

क्या  वजूहातें होतीं हैं कानों के रोग संक्रमण की ?


क्यों  आज कर्ण संक्रमण आम हैं .अपनी किताब "वेक्सिनेसन ,सोशल वाइओलेन्स एंड क्रिमनेलिटी "(Vaccination ,Social Violence and Criminality )में हेरिस एल. कोलटर इसके बीज बचपन में लगे नश्तर और टीकों (चाइल्डहुड वैक्सीनेसन )में देखतें हैं .

ओटाईटइस इसी टीकाकरण का नतीज़ा है .

आज अमरीका में यह रोग संक्रमण बालकों में बे -तरह व्याप्त है मुसीबतें खड़ी करने वाला संक्रामक रोग बन गया है .इक साल का होते होते हर नवजात कमसे कम इक एपिसोड ग्ल्यू ईयर ("glue ear") का  झेलता है . मध्य कान में पूअर ड्रेनेज का नतीजा होता है ग्ल्यू ईयर .


छ :साला होते होते तकरीबन  ९०%नौनिहालों को इस कंडीशन का सामना करना ही पड़ता है .तीन करोड़ विज़िट हो जातीं हैं इनकी कानों के रोगों के माहिरों के द्वारे .

जब से बड़े पैमाने पर टीकाकरण अभियान चलाया गया है उसी के बाद से वेक्सिन डेमेज ,कानों के रोग संक्रमण ,दमा ,हाइपरएक्टिविटी के अलावा भी नौनिहालों में कई व्यवहार सम्बन्धी समस्याएं बढती गईं हैं .बेशक यह बढ़ोतरी सब जगह और सब में देखने को  नहीं मिली है ,वेक्सिन डेमेज से इतर समस्याएं  तो इस अवधि में यकसां रहीं हैं या फिर थोड़ी कम भी हुईं हैं .

काइरोप्रेक्टिक समाधान 

कानों के रोग संक्रमण से जूझते बच्चे के लिए सबसे बड़ा उपहार कोई आप दे सकतें हैं तो वह काइरोप्रेक्टिक देखभाल ही है उसकी .उसे काइरो-प्रेक्टर के पास ले जाइए .कानों के रोग संक्रमणों का भले यह चिकित्सा प्रणाली इलाज़ नहीं है लेकिन इसके बेहद फायदे इन मामलों में देखने को मिलें हैं .

Restoring the spine to its proper alignment through chiropractic care should result in the return of normal nerve supply .

रीढ़  का समायोजन  करके  ,काइरो-प्रेक्टर के सधे हुए हाथ बाधित नर्व आपूर्ति (इम्पैरेड नर्व सप्लाई )की क्षति पूर्ती करवा देते हैं .


क्या कहतें हैं नैदानिक अध्ययन ?

Clinical Observations 

इक अध्ययन में १२५० नवजात शिशुओं की जन्म के फ़ौरन बाद पड़ताल की गई .२११ मिचली आने ,हाइपरएक्टिविटी ,अनिद्रा से ग्रस्त मिले .इनमें  से ९५ %में रीढ़ अ - सामान्य पाई गई ,रीढ़ में गडबडी मिली ,विचलन ,विक्षोभ मिला .काइरोप्रेक्टिक रीढ़  समाधान के बाद इनका दर्द से चीखना चिल्लाना थम सा गया .पेशीय तनाव जाता रहा .उनींदे हो गए ये नवजात शिशु देखते ही देखते .

The authors of this study stated that an unhealthy spine ,"causes many clinical features from central motor impairment to lower resistance to infections -especially ear ,nose and throat infections."

इस  अध्ययन  के रचियता कहतें हैं सभी नवजातों को मौक़ा मुहैया करवाया जाना चाहिए रीढ़ जांच का .बर्थ स्ट्रेस के अलावा इतर वजहें भी रीढ़ को हिला जातीं हैं .

तमाम केस हिस्टरीज़ में जो काइरोप्रेक्टिक अध्ययनों से ताल्लुक रखती हैं ,उन छ :से नौ साला लड़कों का उल्लेख गौर तलब है जिनको बाकायदा क्रोनिक रोग संक्रमण कानों का पुष्ट हुआ था ,सालों ये बालक एंटीबायटिक पर रखे गए .पहले ही रीढ़ समायोजन के बाद ही इन्हें आराम आगया .इसके बाद के तीन साला फोलो अप में इन्हें न एंटीबायटिक की ज़रुरत पेश नहीं  आई,और  न ही ओवर -दी -काउंटर ड्रग्स की (बिना नुसखे के मिलने वाली दवाओं की ).  

इक और साढ़े चार साला लड़की का काबिले गौर उल्लेख किया जाता है इन अध्ययनों में जिसे लाइलाज कर्ण संक्रमण चला आरहा था ,श्रवण शक्ति तकरीबन आधी चुक गई थी ,adenoiditis से भी ग्रस्त थी यह लड़की .इसे छ :हफ्ते की काइरोप्रेक्टिक केयर  मुहैया करवाई गई .इसके बाल रोग और कान ,नाक ,गला माहिर से संपर्क के बाद पता चला लड़की अब सभी कंडीशन से मुक्त है कोई कर्ण संक्रमण नहीं है,कोई सोजिश नहीं .

परिवारियों को कहा गया आप काइरोप्रेक्टिक देखभाल ज़ारी रखें क्योंकि इसका जादुई असर हुआ है .

सारांश 

कान में रोग संक्रमण होने पर काइरो -प्रेक्टिक  जांच भी ज़रूर करवाएं .आपके बाल गोपाल का स्पाइनल सबलकसेसंस(spinal subluxations ),रीढ़ विचलन ,  से मुक्त रहना ज़रूरी है .ताकि शरीर की जन्मजात प्रतिरक्षा व्यवस्था फिर चाक चौबंद हो सके .न दवा का झंझट न अवांछित असर की मार .लाभ ही लाभ .ए विन विन सिचुएशन फॉर आल ,  फॉर दी होल फेमिली . 

6 टिप्‍पणियां:

SM ने कहा…

good post on ear infections.

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ ने कहा…

वाह!
आपकी इस ख़ूबसूरत प्रविष्टि को आज दिनांक 17-09-2012 को ट्रैफिक सिग्नल सी ज़िन्दगी : सोमवारीय चर्चामंच-1005 पर लिंक किया जा रहा है। सादर सूचनार्थ

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

सब का सब रीढ़ से ही नियन्त्रण होता है, जब रीढ़ ही न रही तो...

देवेन्द्र पाण्डेय ने कहा…

वाह!

मैं भी कान बहने से किशोरावस्था में बहुत परेशान रहा। डाक्टर ने लाख कहा कि ऑपरेशन करा लो लेकिन नहीं कराया। होमीयोपैथी की मीठी गोली खा-खाकर चल रहा हूँ। अभी कुछ वर्षों से कोई परेशानी नहीं है। रीढ़ वाली जानकारी अनोखी व नई है। ..आभार।

पुरुषोत्तम पाण्डेय ने कहा…

उपयोगी और सुन्दर ढंग से लिखी जानकारी, आपकी लेखनी को साधुवाद.

सुशील ने कहा…

भैय्या वीरू जी अरे कहीं तो अपनी एक फोटो भी दिखाओ चर्चाकार को एक डब्बा लगाना पड़ रहा है आपकी जगह पर !