मंगलवार, 25 सितंबर 2012

दी इनविजिबिल सायलेंट किलर

अमरीका में यह सप्ताह Mitochondrial disease  के बारे में जन चेतना फैलाने के लिए है .यह बीमारी अमरीका

के गले की फांस  बनी हुई है जो Mitochondrail DNA को ही असर ग्रस्त कर देती है .नतीजा होता है कोशाओं

का    ग्रिड फेलियोर  पढ़िए दो किश्तों को समेट कर लिखा गया यह पूरा आलेख -

दी इनविजिबिल सायलेंट किलर



   

क्या है Mitochondrial disease(माई -टो-कोंड्रियल  डिजीज )? 

पांच जुलाई २०११ 

हमारी ज़िन्दगी का यह एक दुखदाई विधायक दिन बन गया यही वह मनहूस दिन था जब मुझे और मेरे पति को बतलाया गया ,आपके बेटे को एक अदृश्य बीमारी अन्दर अन्दर खा  रही है .
कुछ भी तो समझ न आया ये अचानक हुआ क्या ?मेरी तो गर्भावस्था की अवधि भी ठीक ठाक गुजरी थी .दो साल पहले गर्भ धारण किया जब मैं कितनी खुश थी .फिर ये अचानक क्या हुआ क्यों हुआ ?कैसे हुआ ?सवालों का हुजूम मुझे मथे जा रहा था .

इस कमबख्त बीमारी से वाकिफ भी तो बहुत कम लोग हैं .चिकित्सा विज्ञान की भाषा में इसे कहा जाता है Mitochondrial disease(MD).

जानना समझना पडा है क्या यह Mitochondria? उससे पहले यह भी कि कोशिकाओं का वह महल जिससे ईंट -दर- ईंट हमारा शरीर बना है उसकी एक एक ईंट बोले तो एकल इकाई जीवन की कोशिका का खुद में मतलब क्या है ?क्या है इसके अन्दर बाहर ?

पता चला जीवन की वह इकाई जिसे हम सेल (कोशिका या कोशा )कहतें हैं  यह  हमारा लघुतम सजीव अंश है इसके केंद्र में एक न्यूक्लियस (केन्द्रक )है जिसे एक द्रव" साइटों -प्लेज्म "घेरे हुए है .और ये सारा तामझाम शरीर रुपी इस रसोई का  एक झिल्ली नुमा कमरे में बंद है .

इसी साइटोंप्लेज्म के अन्दर मौजूद रहतें गोलक या छड -नुमा (दंड की शक्ल के )कुछ पिंड जिन्हें कहा जाता है Mitochondrion .यह पावर हाउस है जो कोशा की ९०% तक ऊर्जा की ज़रुरत पूरी करता है चंद रासायनिक कैंचियों या एंजाइम्स (किन्वकों )की मदद से .यहीं पर खाद्य के अपचयन से ऊर्जा पैदा होती है .खाद्य ऑक्सीजन की मौजूदगी में जलता है .

साइटोंप्लेज्म कहतें ही हैं  कोशिका द्रव्य को .यदि कोशा का केन्द्रक  निकाल दें तो साइटोंप्लेज्म बच जाएगा .

एंजाइम को कैंची इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह एक प्रकार का ऐसा पदार्थ है जो रासायनिक परिवर्तन (खाद्य के अपचयन ) के घटित होने में सहायता करता है परन्तु स्वयं परिवर्तित नहीं होता .

यदि किसी भी वजह से Mitochondria  अपना काम ठीक से नहीं करता कोशा के अन्दर ऊर्जा का टोटा हो जाता है .क्षतिग्रस्त होके कोशा नष्ट होने लगती है .कोशा का यह महल ढह भी सकता है .

अब यदि यही प्रक्रिया सारे शरीर में चल पड़े तो एक एक करके सभी अंग असर ग्रस्त होने लगते हैं .इसे बालकों का कैंसर कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी बहु बिध प्रगटन होता है इस खतरनाक रोग M.D.का 

कुछ में यह बीमारी वंशानुगत कारण लिए रहती है तो कुछ में पर्यावरणी .यानी माई -टो-कोंड्रिया जन्मजात दोष लिए भी हो सकता हैऔर या फिर  हमारे गंधाते हवा मिटटी पानी से भी अन्य पर्यावरणी घटकों से भी असर ग्रस्त हो सकता है .  . 
(ज़ारी )

क्या है Mitochondrial disease(माई -टो-कोंड्रियल  डिजीज )? किस्तों में प्रस्तुत किया जाएगा यह आलेख ताकि इसे मैं खुद भी ठीक से बूझ सकूं .शुक्रिया .

पुनश्च :


क्या है Mitochondrial disease(माई -टो-कोंड्रियल डिजीज )?(दूसरी किश्त )



अमरीका  को  सांसत  में डालने वाली इस बीमारी की गिरिफ्त में वहां प्रत्येक तीस सेकिंड के अन्दर एक नौनिहाल इसकी गिरिफ्त में आ रहा है .United Mitochondrail Disease Foundation के अनुसार दस साला होते होते इन बालकों में इस सायलेंट किलर के लक्षणों का प्रगटीकरण होने लगेगा .

भले यह बीमारी नौनिहालों को निशाने पे लेती हो अब इसका प्रगटीकरण बालिगों में भी आम हो चला है .

समझा जाता है ,यह बीमारी हमारे दिल ,दिमाग,यकृत (लीवर ),कंकालीय (अस्थि पंजर )पेशियों की कोशिकाओं को क्षतिग्रस्त करने लगती है .हमारे गुर्दे ,श्वसनी तंत्र यहाँ तक के स्रावी तंत्र (एंडो-क्राइन सिस्टम )के कोशिकाओं को भी नहीं छोडती है नष्ट कर डालती है .(सोचने वाली बात है इसके बाद शरीर में बचता ही क्या है ?).

लक्षण 

पेशीय कमजोरी के अलावा इस बीमारी में खासकर वोलंटरी मसल एक्टिविटी असर ग्रस्त होती है .ज़ाहिर है इसका अंग संचालन पर भी बुरा असर पड़ता है .(loss of motor control ).

उदर और आंत सम्बन्धी (गैस्ट्रो -इंटेस -टी - नल   डिस -ऑर्डर )  विकार ,निगलने सटकने में दिक्कत जैसी परेशानियां सामने आ सकतीं हैं .अवमंदित बढ़वार के अलावा दिल से जुडी तकलीफें ,यकृत से जुडी तकलीफें सिर उठाने लगतीं हैं ,मधुमेह के अलावा श्वसन सम्बन्धी जटिलताएं , सीश्ज़र्स (खासकर मष्तिष्क को लगने वाला झटका ,),बीनाई (विजन )और श्रवण सम्बन्धी समस्याएं सामने आतीं हैं ,बढ़वार देरी से होना ,रोग संक्रमण प्रवणता (आसानी से रोग संक्रमण लग जाना ) इस बीमारी के अन्य लक्षण हैं .

Leigh's Disease - Facts and Information


हमारा बेटा एक ऐसे अपचयन सम्बन्धी विकार से ग्रस्त हो गया है जो नर्वस सिस्टम को असर 

ग्रस्त करता है .चिकित्सा शब्दावली में  


स्थिति को कहतें हैं न्यूरो -मेटा -बोलिक डिसऑर्डर Leigh's Disease.


इसे वंशानुगत विकार कहा गया है .यह एक दिनानुदिन बढ़ते जाने वाला विकार है जो तीन माह 

की उम्र से लेकर दो साला शिशुओं को ही 


अपना निशाना बनाता है .बिरले ही इक्का दुक्का मामलों में यह रोग किशोरों और वयस्कों को 

भी अपनी लपेट में लेता देखा गया है .


आनुवंशिक आधार 

  
समझा जाता है यह रोग Maitochondrail DNA में होने वाले उत्परिवर्तनों (म्यूटेशन ) का 

नतीजा होता है .एक एंजाइम की कमीबेशी 


भी इसकी वजह बन सकती है .यह एंजाइम है :Pyruvate dehydrogenase.



बहत तेज़ी और जल्दी  ही प्रगटन होता है इस बीमारी के लक्षणों का 

चूसने चाटने ,चुस्की लेके पीने में ,स्तन पान करने में शिशु को दिक्कत आने लगती है .

मोटर स्किल्स (अंग संचालान ),हेड कंट्रोल में दिक्कत साफ़ दिखने लगती है .सिर सम्भाल के 

सीधा नहीं बैठ पाता है ऐसे में शिशु .

लगातार रोते रहना ,भूख न लगना ,जी मिचलाना ,मिचली आना ,चिड -चिडाहट और सीश्ज़र 

जैसे लक्षण भी आ जुड़तें हैं .

रोग के बढ़ते जाने के साथ साथ पेशीय ताकत कम होने लगती है ,आम कमजोरी और लेक्टिक 

एसिडोसिस के एपिसोड देखने को मिल 


सकतें हैं .


लेक्टिक एसिडोसिस गुर्दे और श्वसन तंत्र के काम में अड़चन पैदा करती है .


लेक्टिक एसिडोसिस 


इस कंडीशन में लेक्टिक अम्ल खून में जितना तेजी से बढ़ता है उसी हिसाब से उसकी निकासी 

नहीं हो पाती .और लेक्टिक एसिड तब 


बनता है जब शरीर में  ऑक्सीजन का स्तर गिरने लगता है . 



दरअसल Leigh's disease में जो Mitochondrial DNA में उत्परिवर्तन आ जातें हैं वो 


mitochondrain के उन ऊर्जा स्रोतों को 


प्रभावित  करने लगतें हैं जो दिमागी कोशिकाओं का संचालान करतें हैं इसीलिए अंग संचालन 

असर ग्रस्त हो जाता है असरग्रस्त शिशु का .      



मुख्य कार्य है क्या Mitochondrion ?


ग्लूकोज़ और फेटि एसिड्स  में मौजूद ऊर्जा को एक ख़ास पदार्थ  'Adenosine triphosphate,' or 

ATP.में  तबदील करना इसका एहम काम है .ATP में 


निहित ऊर्जा ही कोशाओं के अपचयन सम्बन्धी प्रकार्य को चाल्ये रखती है .  

Mitochondrial DNA में होने वाले उत्परिवर्तन कुछ एहम कोशाओं में ऊर्जा का एक दम से तोड़ा (कमी )पैदा कर देतें हैं 

जिसका प्रभाव हमारे स्नायुविक तंत्र (नर्वस सिस्टम 


)पर पड़ता है .इसी वजह से मोटर फंक्शनिंग छीजती चली जाती है वक्त के साथ .,जैसे जैसे बीमारी बढती है ठीक वैसे ही .


IT'S NATIONAL MITOCHONDRIAL DISEASE AWARENESS WEEK IN USA.












2 टिप्‍पणियां:

रविकर ने कहा…

भयंकर बीमारी |
मूल इकाई में समस्या -अर्थात जीवन में घोर संकट |
प्रदूषण का प्रभाव भी एक कारण-
आभार

mahendra verma ने कहा…

ओह ! बड़ा भयानक रोग है यह !
तूने खूब रचा भगवान, खिलौना सेलों का।

कभी DISH - diffuse idiopathic skeletal hyperostosis के बारे में भी बताइए।