गुरुवार, 20 सितंबर 2012

माँ के गर्भाशय का बेटियों में सफल प्रत्यारोपण

माँ के  गर्भाशय का  बेटियों में सफल प्रत्यारोपण  

स्वीडन के एक अस्पताल  में दो महिलाओं को उनकी ही माताओं द्वारा दान किया गया गर्भाशय फिट कर दिया गया है .यह अपनी किस्म  का पहला सफल प्रत्यारोपण हैं .इनमें  से एक महिला को अपने गर्भाशय से तब हाथ धोना पड़ा था जब वह बरसों पहले गर्भाशय ग्रीवा कैंसर  (बच्चेदानी की गर्दन cervical cancer )का शिकार हो गई थी .

दूसरी महिला जन्म से ही बिना गर्भाशय के थी .

दोनों ही महिलाएं उम्र के चौथे दशक में प्रवेश कर चुकीं हैं तीसम तीसे के आरम्भिक बरसों में हैं  .इसीलिए परखनली गर्भाधान के ज़रिए इनके ह्यूमेन एग से निषेचन के बाद एम्ब्रियो तैयार करके प्रशीतित कर दिए गएँ हैं ताकि साल बाद ही इन्हें प्राप्त गर्भाशय में पुन : रोप दिया जाए .

प्रत्यारोपण की असल कामयाबी का पता गर्भ काल की अवधि लगाके तकरीबन २१  महीने बाद ही चल सकेगा .ईश्वर करे इनका प्रसव कामयाब आये .माहिरों की मेहनत रंग लाए .

गर्भाधान या निषेचन दो किस्म का होता है एक इन वाइवो (in  vivo )  जैसा अपने पुरुष  साथी के साथ   मैथुन के बाद  शुक्राणु (स्परमेटा -जोआ)और अंडाणु (फिमेल एग या ओवम )  के मिलन मनाने के बाद किसी महिला गर्भाशय में होता है .

दूसरा परखनली में या फिर पेट्री डिश में .इन वीट्रो यानी गर्भाशय के बाहर किसी अंत :पात्र में (परखनली या किसी अन्य वैज्ञानिक उपकरण में जैविक प्रक्रिया कराके )किया जाता है .होता यह भी शुक्राणु और अंडाणु के संयोजन से ही है .अंडाणु युक्तिपूर्वक महिला से प्राप्त किए जातें हैं .शुक्र स्पर्म बैंक से या पुरुष साथी से .बस निषेचन (गर्भाधान )की क्रिया शरीर से बाहर होती है .

यह महत्वपूर्ण आलमी प्रत्यारोपण गत दस सालों की स्वीडन और अंतर -राष्ट्रीय सहयोग के स्तर पर की गई शोध का नतीज़ा है जिसमें  सर्जरी के दस माहिरों की एक टीम   ने जो सालों से यही प्रशिक्षण लेते रहे थे (एनीमल स्टडी ,इतर स्रोतों से )शिरकत की है .

संतोष का विषय है दाता माताएं सकुशल हैं और दो चार दिनों में ही इन्हें अस्पताल से घर भेज दिया जाएगा .प्राप्त करता बेटियाँ भी मज़े में हैं भले सर्जरी की थकान बाकी है लेकिन एक समस्या (बांझपन )से निजात की अपनी एक अलग ख़ुशी इस थकान से कहीं ज्यादा है .

गौर तलब है स्वीडन में तकरीबन दो से तीन हज़ार महिलाएं गर्भाशय के अभाव में संतान से वंचित हैं .यह प्राविधि उनके लिए नया रास्ता दिखाती है .

ये दोनों ही मामले लाइव डोनर यूट्रस ट्रांसप्लांट के अग्रणी मामलें हैं जिनमें प्रत्यारोप माँ से  संतान को मिला है .

बेशक सन २००० में एक ऐसा ही प्रत्यारोप आजमाया  गया जो असफल रहा था .

तुर्की में एक शव से बच्चेदानी लेकर एक महिला में फिट ज़रूर की गई थी गए साल .लेकिन फिलाल उस महिला ने गर्भ धारण नहीं किया है .

माहिरों को यह विचार तब कौंधा जब १९९८ में एक युवती का गर्भाशय उन्हें   बच्चे दानी के कैंसर की वजह से ही निकालना पड़ा था .

उसे बता दिया गया था ,उसका कैंसर तो ठीक हो जाएगा लेकिन बच्चे दानी के न रहने पर वह गर्भ धारण नहीं कर सकेगी .

इस महिला ने ही सुझाया था .क्यों न उसकी माँ का गर्भाशय ही निकालके उसे फिट कर दिया जाए .

तभी से पशुओं पर इस प्राविधि की आज़माइश की जा रही थी .कुछ ने गर्भ धारण भी किया है .उम्मीद की जाती है इन मानवियों पर भी यह खरा उतरेगा . 

सन्दर्भ -सामिग्री :-CNN's Alexander Felton contributed to this report.

First mother-daughter womb transplants performed in Sweden

By Ashley Hayes, CNN
updated 4:17 PM EDT, Wed September 19, 2012

पुनश्च :

कोख की साख 

कोख और कोख में फर्क है .आज विज्ञान उस मुकाम पे चला आया है जहां एक ही कोख से माँ और बेटी पैदा हो सकतें हैं .अभी स्वीडन में एक माँ ने अपनी उस बेटी को अपनी कोख (चिकित्सा शब्दावली में ,विज्ञान की भाषा में गर्भाशय ,बच्चेदानी )डोनेट कर दी जो कुछ साल पहले बच्चेदानी के कैंसर की वजह से अपनी बच्चेदानी निकलवा चुकी थी .ठीक होने का और कोई रास्ता बचा ही नहीं था .सफलता पूर्वक बेटी में माँ की कोख का प्रत्यारोप लग चुका है .अंत :पात्र निषेचन (इन वीट्रो फ़र्तिलाइज़ेशन )के ज़रिये उसका एम्ब्रियो (भ्रूण की आरम्भिक अवस्था )प्रशीतित करके रखा जा चुका है साल एक के बाद इसे प्राप्त करता युवती के ही गर्भाशय में रोप दिया जाएगा .फिर इसी गर्भाशय से एक बेटी और पैदा हो सकती है .दाता महिला इन नवजात कन्या की नानी कहलायेगी लेकिन माँ बेटी एक ही  गर्भाशय की उपज कहलाएंगी .तो ज़नाब ऐसी है गर्भाशय की महिमा .इस खबर से अभिभूत हो हमारे नाम चीन ब्लोगर भाई रविकर फैजाबादी (लिंक लिखाड़ी )ने अपने उदगार यूं व्यक्त किये हैं -

कहते हम हरदम रहे, महिमा-मातु अनूप ।

पावन नारी का यही, सबसे पावन रूप ।

सबसे पावन रूप, सदा मानव आभारी ।

जय जय जय विज्ञान, दूर कर दी बीमारी ।

गर्भाशय प्रतिरोप, देख ममता रस बहते ।

माँ बनकर हो पूर्ण, जन्म नारी का कहते ।।

सोचता हूँ और फिर गंभीर हो जाता हूँ हमारे उस देश में जहां कर्ण ने अपने कवच कुंडल तक दान कर दिए थे ,ऋषि दाधीच (दधिची )ने अपनी अस्थियाँ दान कर दिन थीं -
अब लगता है -

अरे दधिची झूंठा होगा ,
जिसने कर दी दान अस्थियाँ ,
जब से तुमने अस्त्र सम्भाला ,
मरने वाला संभल गया है .

अपना हाथी दांत का सपना ,
लेकर अपने पास ही बैठो ,
दलदल में जो फंसा हुआ था ,
अब वो हाथी निकल चुका है .

दफन हो रहीं हैं मेरे भारत में ,
कोख में ही बेटियाँ .

मूक हो ,निर्मूक हो राष्ट्र सारा देखता है .

6 टिप्‍पणियां:

Arvind Mishra ने कहा…

यह एक और बड़ी मेडिकल कामयाबी है !साझा करने के लिए और पोस्ट के लिए आभार

DR. ANWER JAMAL ने कहा…

संतोष का विषय है दाता माताएं सकुशल हैं.
Please see :
http://tobeabigblogger.blogspot.in/2012/09/nice-plan.html

दिगंबर नासवा ने कहा…

विज्ञानं कहाँ तक पंहुंच गया है ... सार्थक दिशा में उठे कदम कितनी खुशिया ला सकते हैं ...
राम राम जी ...

डॉ टी एस दराल ने कहा…

बहुत दिलचस्प और क्रांतिकारी खबर है .

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

विज्ञान के रंग।

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

यह तो एकदम नयी जानकारी मिली ... विज्ञान कहाँ तक पहुंचेगा .... अब तो सारे ही अंग प्रत्यारोपित किए जा रहे हैं ।