शुक्रवार, 21 सितंबर 2012

ख़बरें सेहत की

ख़बरें सेहत की 

अमरीकी रोग नियंत्रण और बचावी केन्द्रों की संस्था  Centers for Disease Control की मानें तो धूम्रपान करने वालों को मुख कैंसर समूह ,मसूढ़ों  की तमाम बीमारियों (gum diseases) ,दांतों के खोखले होते जाने के खतरे का वजन सिगरेट न पीने वालों से चार गुना बढा हुआ रहता है .

पूर्व धूम्र-पानियों  के बरक्स भी periodontal diseases के  खतरे  का  वजन  इनमें  दो  गुना  बढा  हुआ रहता है .  

Periodontal means relating to or affecting the tissues that surround the neck and root of a tooth .यानी उन तमाम दंतीय ऊतकों की बीमारी जो दांतों को सिर से पैर तक घेरे रहतें हैं .

उन लोगों के बरक्स भी स्मोकर्स में इन बीमारियों का वजन दो गुना तो कमसे कम बढा हुआ रहता ही है जो दांतों के डॉक्टर  के पास जाना समस्या होने पर भी पांच सालों तक मुल्तवी करते रहतें हैं .   

आमतौर पर लोगों में दंत चेतना ,मुक्तावली सचेत रहने का अभाव रहता है .जबकि दन्तावली की मोतिया आब ही तो मुख सौन्दर्य है .लेकिन  स्मोकर्स भूतपूर्व हो जाने(एक्स स्मोकर होने पर भी )बरसों स्मोकिग स्टेंस लिए घूमते हैं . यकीन न हो तो हमें करीब से देख लो . 

healthline

Smoking hits you in the mouth 



बचपन में लो बूस्टर, पियो एनर्जी ड्रिंक ।

फास्ट फ़ूड लो टिफिन में, भर लो काली इंक ।

भर लो काली इंक, लिखेगा काला काला ।

कई तरह के लिंक, निकाले देह-दिवाला ।

कामोत्तेजक ड्रग्स, करो उत्तेजित पचपन ।

झेले कहाँ शरीर, बुढापे तक रे *बचपन ।।

*बचपना

ENERGY drinks tied to ER(EMERGENCY ROOM )VISITS



एनर्जी ड्रिंक्स ख़तरा -ए -जान 

भले आप जोम से (आवेग ,उत्तेजना ,अति -रिक्त तौर पर ऊर्जित ,दम खम से भरा )अपने आप को मान सकतें हैं  एनर्जी ड्रिंक्स का सेवन करते रहने पर लेकिन जल्दी ही अस्पताल  के आपातकालीन विभाग में पहुँचने की नौबत भी आ सकती है .

एक अमरीकी अध्ययन के मुताबिक़ २००५-२००९ के दरमियान ऐसे मौके आने के खतरे का वजन एनर्जी ड्रिंक्स लती (निर्भर) लोगों में दस गुना बढ़ा हुआ पाया गया .न सिर्फ दिल की लय को बिगाड़ सकतीं हैं एनर्जी ड्रिंक्स (  Energy drinks can help cause abnormal heart rhythms),शरीर में पानी की कमी करने के अलावा जानलेवा दुर्घटनाओं  की भी वजह बन सकतीं हैं .खासकर उन मौकों पर ऐसा होने के मौकें और भी बढ़ जातें हैं जब युवा भीड़ इनका इस्तेमाल शराब के साथ करने लगती  है  .
अध्ययन में पता चला ऐसे आपातकालीन मौके १२-१७ साला किशोर बालकों  में ११ %,१८-२५ साला में ४५%दर्ज़ हुए .

ठंडा पानी सबसे भला .मीठे पेय प्यास बढातें हैं .
रूखी सूखी खाय के ठंडा पानी पीव ,
देख पराई चूपड़ी ,मत ललचावे जीव .

"जी करता है प्यास लगे ठंडा माने सोडा "भ्रामक है भाई साहब यह सब विज्ञापनी माया जाल है .सावधान रहियो .

6 टिप्‍पणियां:

Kunwar Kusumesh ने कहा…

informative & good post.

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

ज्ञानभरी पोस्ट..

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

उपयोगी खबरें

यादें....ashok saluja . ने कहा…

रूखी सूखी खाय के ठंडा पानी पीव ,
देख पराई चूपड़ी ,मत ललचावे जीव .

देर से सावधानी ....भली ?
वीरू भाई राम-राम
देर के लिये क्षमाप्रार्थी हूँ !

पुरुषोत्तम पाण्डेय ने कहा…

आपने अपने लेखों के द्वारा बहुत उपयोगी जानकारी दे कर पाठकों को हमेशा कृतार्थ किया है. बहुत सरल भाषा में गहन जानकारी. साधुवाद.

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

ठंडा पानी ही बेहतर है ... अच्छी जानकारी