मंगलवार, 27 सितंबर 2011

Work stress forcing youngsters to call in sick more than the aged

Work stress forcing youngsters to call in sick more than the एजिड
अधुनातन कार्य स्थलों पर काम का दवाब युवा भीड़ की सेहत पर ज्यादा भारी पड़ रहा है बरक्स उनके उम्र दराज़ सहकर्मियों के .तीन हज़ार लोगों पर किए गए एक ब्रितानी सर्वे में जहां तीस साल से नीचे नीचे के युवाकर्मियों में से
दो तिहाई कर्मियों ने गत वर्ष औसतन एक सिक लीव कोल्ड्सऔर फ्ल्यू ,एलर्जीज़ और इनटोल्रेंसिज़ ,बढ़ते दवाब से आजिज़ आकर तालमेल न बिठाने के कारण लीं वहीँ उम्र दराज़५५ साल से भी ऊपर के लोगों ने इसी एवज आधे दिन से भी कम का टाइम आउट या छुट्टी पूरे साल में की .
यह बात भी सामने आई काम के दौरान रन डाउन फीलिंग,रोज़ बा रोज़ बढती थकान ,एवं द्विगुणित होता दवाब सिक लीव लेने की वजह युवा भीड़ के लिए ही बना न कि उनके उम्र दार साथियों के लिए ।
डेली मेल ने इस सर्वे की रिपोर्ट को छापा है .पता चला १८-२९ साला हरेक पांच में से एक युवा बढ़ते दवाब से तालमेल न बिठा पाने के चलते अस्वस्थता अवकाश (आकस्मिक अवकाश )लेने को मजबूर हुआ ,काम की टूटन कारण बनी ।
कब्ज़ और कार सिकनेस जैसी वजहों से भी तंग आकर यह वर्ग आकस्मिक अवकास लेते देखा गया ।
जबकी ५५साल से ऊपर के ८५%लोगों का कहना था जब तक वे बिस्तर ही नहीं पकड़ लेते वह सिक लीव लेने की बात दिमाग में भी नहीं लातें हैं ।
यह भी पता चला युवा भीड़ नियमित तौर पर कबाड़िया जंक फ़ूड तुरता बासा भोजन ले रही थी इनके दिन भर में पांच फल और तरकारी का सेवन करने की संभावना भी उम्र दराज़ लोगों से आधी ही पाई गई .

4 टिप्‍पणियां:

Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार ने कहा…






आपको सपरिवार
नवरात्रि पर्व की बधाई और
शुभकामनाएं-मंगलकामनाएं !

-राजेन्द्र स्वर्णकार

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

न जाने कितनी घटनायें देख चुके हैं, इस प्रकार की।

veerubhai ने कहा…

मन फूला फूला फिरे ,जगत में झूठा नाता रे ,
जब तक जीवे माता रोवे ,बहन रोये दस मासा रे ,
तेरह दिन तक ,तिरिया रोवे फेर करे घर वासा रे .
माली आवत देख के कलियाँ करें पुकार ,
फूली फूली चुन लै कल हमारी बार .
भाव भीनी श्रृद्धांजलि .अच्छे लोग जल्दी चले जातें हैं .आपके व्यक्तिगत नुकसान में हम भी शरीक हैं प्रवीण जी .एक आत्मीय ब्लोगर का यूं जाना ,मायूसी का दरिया ही छोड़ेगा .

दिगम्बर नासवा ने कहा…

रोचक सर्वे ...