रविवार, 4 सितंबर 2011

माननीय सांसद .

सांसद खुद को माननीय सांसद कहलवाना पसंद करतें हैं .लेकिन क्या माननीय होने की पात्रता पर ये खरे उतरतें हैं ?
सांसद जो आगे की बेंचों पर सो जातें हैं संसद को क्या रेलवे प्लेटफोर्म समझतें हैं जहां बेंचें पड़ी होतीं हैं ,थके हारे यात्रियों के सोने के लिए ?
क्या यह संसद की अवमानना नहीं है या संसद में सोना वह भी आगे की सीटों पर विशेषाधिकार के तेहत आता है ?एक तो प्रधानमन्त्री भी ऐसा करते देखे जाते थे
संसद के विशेषाधिकार हनन और अवमानना का नोटिस टीम अन्ना को चुका है
ये जो संसदीय 'हाइपर -सोम्नियाक्स " इन्हें इस आशय का नोटिस कब सर्व होगा ?
शरद यादव को कब सर्व होगा जिन्होनें संविधानिक पदो का संसद के बाहर मज़ाक बनाया है एक राज्य पाल महोदया को जो देश की वरिष्ठ नागरिक भी हैं ,महामहिम तो हैं ही -"बूढी गाय" और राष्ट्र पति पद को "सफ़ेद हाथी" कहा है
जम्मू कश्मीर लद्दाख विधान सभा के पटल पर पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी ने अफज़ल की मुआफी का प्रस्ताव रख दियाहै ,जिसकी सुगबुगाहट कई दिनों से सुनाई दे रही थी .उमर अब्दुल्ला साहब ने केंद्र के पाले में फिलर फैंका था -यदिजम्मू कश्मीर विधान सभी ऐसा प्रस्ताव पारित कर देती है तब केंद्र का रुख क्या होगा ?पूछा था ज़नाब उमर अब्दुल्लासाहब ने
अब देखतें हैं ऊँट किस करवट बैठता है ?
हमारा मानना है आतंकवाद का सम्बन्ध इस देश में मज़हब से जुड़ चुका है .मज़हब देख के तय होता है कौन है आतंकवादी .

14 टिप्‍पणियां:

Nilam-the-chimp ने कहा…

sahi kah rahe hai aap lanat hai aise sansado par

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

देश के सुरक्षागत मुद्दों पर राजनीति, गम्भीर विषय है।

शिखा कौशिक ने कहा…

i am agree with you SIR .these leaders have no right to sit in ''SAANSAD ' .

रविकर ने कहा…

बहुत ही प्रभावी प्रस्तुति ||
सादर अभिनन्दन ||

देवेन्द्र पाण्डेय ने कहा…

इन प्रश्नों को पूछने का हमको अधिकार नहीं है क्यों कि हमारे पास कोई विशेषाधिकार नहीं है।

रविकर ने कहा…

चारा अब चारा नहीं, चारो और चुहाड़ |
खाते पीते लूटते, जाय कठौता फाड़ |


जाय कठौता फाड़, मवेशी दिन भर ढोवै |
कदम कदम पर रोज, रात मा कांटे बोवै |


मीरा रही जगाय, जगाये गोकुल सारा |
सोवै घोडा बेंच, मरे क्या अब बेचारा ??

Arvind Mishra ने कहा…

किरण बेदी उन्हें एक बड़ा आईना दिखने को कटिबद्ध हैं और यह होना ही चाहिए -लल्लू पंजुओं और गजधर गजोधरों को निकाल बहार करना होगा संसद से !

यादें ने कहा…

वीरुभाई राम-राम ,
लेख का उत्तर आखिर के शब्दों में आप ने ख़ुद ही
दे दिया है .....???

मेरे पास आएँ,आप का दिल बहलाता हूँ !

http://ashokakela.blogspot.com/2011/09/blog-post.html

यादें ने कहा…

गुरुदेव प्रणाम !
आज शिक्षक दिवस पर
शुभकामनाएँ!
स्वस्थ रहें !
शिष्य -
अशोक सलूजा !

Dr Varsha Singh ने कहा…

Really what a tragedy !...

रेखा ने कहा…

पता नहीं इस सबसे कब मुक्ति मिलेगी .......

Nilam-the-chimp ने कहा…

भाई हमारा सुझाव तो यह है की, राष्ट्रपति बनाया जाय, प्रधानमन्त्री के पार्टी अध्यक्ष को, इससे दो फायदे होंगे, एक तो राष्ट्रपति के पास पार्टी व्हिप के नाम पर हाकने की ताकत होंगी, तो दूसरी तरफ उसका कोई सवेधानिक पद मिल जाएगा, परदे के पीछे छुप कर काम करने की जरुरत नहीं रहेगी. जनता भी ये सोच के खुश हो जाएँगी की रिमोट कंट्रोल के सर पे इतना काम है की वोह बात बात पे PM को हांक नहीं पाएगी. तो कुल मिलाकर सब खुश.
राज्यपाल के पद को खतम करके सिर्फ लोकायुक्त बना दिए जाए , भाई काम तो दोनों का ही राज्य सरकार के कामकाज की समीक्षा है, तो फिर क्यों न एक ऐसे व्यक्ति को लाया जाय, जिससे आम आदमी जाकर गुहार कर सके, अपना दुखड़ा सुना सके.
http://tatva-bodh.blogspot.com/

Sunil Kumar ने कहा…

अच्छा है कि यह सोते हैं नहीं तो प्रश्न पूछने कि पैसे मांगते हैं :)

Mahendra Yadav ने कहा…

Mahoday,
Apse anurodh hai kripya is link par click karen.. isme bahut sare jwalant prashn uthaye gaye hain. Apse asahmati hai, lekin charcha karna achchha lag raha hai. ummeed hai, bina kisi prurvagrah ke charcha jari rakhenge.
Mahendra Yadav
http://thirdfrontindia.blogspot.com/2011/09/know-more-about-anna.html