रविवार, 21 अगस्त 2011

सरकारी "हाथ "डिसपोज़ेबिल दस्ताना ".

सरकार इस दौर में "अपने चुनाव चिन्ह हाथ का स्तेमालडिसपोज़ेबिल "दस्ताने के रूप में कर रही है .हर हथ- कंडा अपना रही है .चित्त होने के बाद भी ऊपर टांग उठाकर हारने वाले पहलवान की तरह हराने वाले के कंधे टांग उठाके रख देती है .इसने कुछ प्राधिकृत पार्टी प्रवक्ता सिर्फ विपक्ष और विरोधियों के लिए इस दौर में सिर्फ गाली देने के लिए नियुक्त किये हुएँ हैं अब उनके अधिकृत बयानों को उनकी व्यक्तिगत राय बतला कर डिसपोज़ेबिल दस्ताने की तरह उनका परित्याग कर चुकी है .उनका कहीं अता पता नहीं है .कहाँ हैं वो किस हाल में हैं वो ।खुदा जाने .
सरकार अब भी राष्ट्रीय सौमनस्य ,सद्भाव ,शान्ति बनाए रखने का कुशल अभिनय कर रही है .तटस्थ होने दिखने का भाव पल्लवित कर रही है जन मानस में .अन्दर की कुटिलता इसके चिरकुट आदतन छिपा नहीं पा रहें हैं ।
सरकार किसी मुगालते में न रहे -यह एक बहु -आयामीय आन्दोलन है .इस का एक पक्ष स्व -स्फूर्त ,स्वयं चालित है ,इस देश की आम जनता ,बे -रोज़गार जनता ,नौकर शाहों इस देश के मैकाले पुत्रों से पस्त होकर सड़कों पर निकल आई है जो बिना भेंट पूजा परसाद पाए अपनी दफ्तरी मुद्रा बदलने से इनकार कर देतें हैं .भ्रष्टाचार से आजिज़ हर आदमी इस दौर में पस्त है ,हताश है .दूसरा एंगिल इस आन्दोलन का पूर्व नियोजित बहु -पार्टीय थिंक टेंक से ऊर्जा प्राप्त कर रहा है .यह सारा देश रातों रात व्यवस्थित या ऑर्डरली नहीं हो गया है इसके लिए लोग दिन- रात काम कर रहें हैं ,जरा सी हिंसा पूरे आन्दोलन को रेडिओ -एक्टिव ,विखंडन शील बना सकती है .इसलिए कहीं कोई हिंसा न हो इसकी पूरी एहतियात बरती जा रही है .दुर्भाग्य है इस देश का जो लोग विपक्ष में होतें हैं वे संत होने दिखने का अभिनय करने लगतें हैं या फिर सरकारी लालू और अमरसिंह बन जातें हैं .जनता वहीँ की वहीँ रह जाती है .ठगी जाती है .पांच पांडव एक तरफ है ,कौरव सेना एक तरफ ."किसन"रास रचाए है .

5 टिप्‍पणियां:

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ ने कहा…

बहुत ख़ूब...

Kajal Kumar ने कहा…

:)

सतीश सक्सेना ने कहा…

संक्रमण काल चल रहा है ...
भविष्य में अच्छे की कामना करते हैं !
जन्माष्टमी शुभ हो भाई जी!

Vivek Rastogi ने कहा…

हमें चाहिये भ्रष्टाचार मुक्त देश

डॉ टी एस दराल ने कहा…

भ्रष्टाचार रुपी कौरवों का नाश करने श्री कृष्ण जन्म ले चुके हैं ।
शुभ जन्माष्टमी ।