शनिवार, 20 अगस्त 2011

सरकारी लोकपाल बनाम जन लोकपाल ,जनमत करालो ...

सरकारी लोकपाल बनाम जन लोकपाल बिल पर सरकार को हमारी पेश कश है चुनाव करवाले .एक तरफ सरकारी लोकपाल के उम्मीदवार खड़े हो जायेंगें दूसरी तरफ जन लोक पाली ।
वो जो कहते हैं कोंग्रेस के आधिकारिक प्रवक्ता इत्ती जल्दी (३० अगस्त तक )लोक पाल बिल नहीं लाया जासकता .जल्दबाजी में लाया गया बिल आधा अधूरा होगा वह ठीक कहतें हैं .जब पिछले ४२ सालों में यह बिल नहीं लाया गया तो एक पखवाड़े में कैसे लाया जा सकता है ।
आज किन्हीं नवीन जिंदल जी का अग्र लेख लोकपाल बनाम भ्रष्टा चार उन्मूलन मुद्दे परदैनिक हिन्दुस्तान में छपा है .जिंदल कहतें हैं भ्रष्टाचार किसी भी मुल्क में एक साल से पहले कम नहीं हुआ है .ठीक कहतें हैं सिंधवी और जिंदल दोनों -कोई "आपात काल "तो है नहीं यह बिल जो १५ मिनिट में रात के अँधेरे में लागू कर दिया जाए ।सुबह उठकर राष्ट्र -पति से अगूंठा लगवा लिया जाए .
एक बार इसी उद्योग पति के बेटे ने स्वामी राम देव से कहा था ,अगर आपकी इतनी फोलोइंग है ,अनुगामी हैं तो चुनाव क्यों नहीं लड़ लेते .बाबा क्या ज़वाब देते ,उन्हें चुनाव लड़ना ही नहीं है जब .हम ज़वाब देतें है जिंदल जी को वह लंगोट पहन कर दिखाए ,भगवा कपडे पहन कर दिखाएँ ?भाई जिंदल जिसका जो काम है वही उसे शोभता है आपको इत्ती सी बात नहीं मालूम .बन गए सांसद .अब आप लोगों के साथ जन मत नहीं है अन्ना जी के साथ है .बड़ा एहंकार था आपको हम चुनकर आयें हैं .अब खाली करो सिंह आसन क्या करते हो संसद में ?

9 टिप्‍पणियां:

यादें ने कहा…

वीरू भाई ,इनसे पूछो :-
चुनाव जीत कर आये
तुम्हें चुनाव जिताया किसने
हमने भेजा था ,चौकीदारी के लिए
तुम्हें मालिक बनाया किसने ...??

शुभकामनायें ! अन्ना के लिए ....

Bhushan ने कहा…

राम-राम वीरू भाई जी, चोखी सुणा दी छोरे नै. ये पले हैं पैसे में और एसी में. लोक हो या लोकपाल हो इनको रास न आएगा. किस्मत आच्छी सै बेट्टे की....भाई ने ठीक कर दिया होता...

जाट देवता (संदीप पवाँर) ने कहा…

ये तो अपने बाप का सिंघासन मान कर बैठे है, कि कोई हमारा क्या बिगाड लेगा?

Kajal Kumar ने कहा…

ये जनमत कराने वाली शक़्लें हैं !

SM ने कहा…

the same politicians pass the salary and pension raise bill in one minute.
nice article.

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

लोकतन्त्र में कई आवाज़ें।

Anita ने कहा…

समसामायिक पोस्ट, अब कुछ न कुछ तो होकर ही रहेगा...

रेखा ने कहा…

ऐसा लगता है जैसे सिंहासन पर बैठना इनका जन्मसिद्ध अधिकार हो गया है......इसे छोड़ना ही नहीं चाहते हैं

ved parkash ने कहा…

सर जी नेताओं की अक्ल ठिकाने आते आते आऐगी
देखना बेइज्जती भी होगी और कमर भी टूट जाएगी