बुधवार, 1 जुलाई 2009

आज है वेला मिलन की ,कल विदा की रात होगी .

आज है वेला मिलन की ,कल विदा की रात होगी /भूल कर अपमान सारे ,प्यार की गहराइयों में /सजन रूठे को मनाले ,आज तो अमराइयों में /भोर होते कौन जाने ,फ़िर कभी ये रात होगी /रह सका है कौन बनकर अंत तक ,किसका सहारा /भाग्य से संघर्ष करते आज भी इंसान हारा /जिन्दगी है चार दिन की ,फ़िर सभी तो राख़ होगी /आज है वेला मिलन की ,कल विदा की रात होगी .

1 टिप्पणी:

Udan Tashtari ने कहा…

गहरे भाव!!