बुधवार, 18 दिसंबर 2019

नेहरू कांग्रेसियों के द्वारा दो बार हिंदू समाज के संतों की हत्याएं करवाईं गईं ।इंदिराम्मा ने तो देश के संविधान को ही पलीता लगाके आधी रात को देश में आपातकाल लागू कर दिया। रायसीना हिल से दुम अगले दिन हिलवाई गई। कोशिश तो इनकी बाबा रामदेव के सफाये की भी थी पर वे ईश्वर की कृपा से बच गए

४४० सांसदों वाले ऊपरले और निचले सदनों ने यानी अपर और लोवर हाउस ने जिस नागरिकता संशोधन बिल को पारित किया है उसे प्रियंका वाड्रा देश को तोड़ने वाला कदम बतला रहीं हैं। देश को तोड़ने का काम इनकी अम्मा जी और सुबुद्ध भाईसाहब सरे आम करवा रहें हैं पेट्रोल से (गाड़ियां जलवाकर ),सड़कों पर पथ्थर बाज़ी से हद दर्ज़े की हुल्लड़बाजी से जामिया में दस नंबरियों को घुसवाने का षड्यंत्र इन्हीं लोगों ने रचा है इसकी पटकथा इन्होनें पहले ही लिख ली थी। रायसीना हिल पर दवाब इन्हीं की अगुवाई में डाला गया है। इनकी अम्मा ने आते ही जयेन्द्र सरस्वती को गिरफ्तार करवाया था। इनकी दादी के पिता श्री द्वारा ये बांट के देश को खाने का काम शुरू हुआ था। जिन्ना जो कभी हिन्दू मुस्लिम एकता के पक्षधर थे इन्हीं की शह पर बाद में देश के सांप्रदायिक आधार पर बांट के आधा आधा खाने पे अड़ गए।अल्लामा इकबाल ने पाक जाने के बाद अपना रूख और भी कड़ा करते हुए लिखा सारा जहां हमारा। उसी का विकृत रूप इस्लामिक बुनियाद परस्ती दहशद गर्दी बनी है। 

   पहले अंग्रेज़ों से मिलकर सिखों को अलग करवाया फिर  ,जैनियों को वृहत्तर दायरे से सनातन धर्म के बाहर निकलवाया यह तो गनीमत रही इन्हें ये इल्म नहीं हुआ के जैनियों में भी स्वेताम्बर और दिगंबर दो अलहदा सम्प्रदाय होते हैं वरना इनके बंटवारे का काम  भी इसी खानदान के हाथों संपन्न होता।कर्नाटक में शैव सम्प्रदाय से  से लिंगायतों को अलग करने  का बेशर्म निर्णय लिया इन लोगों ने। नेहरू कांग्रेसियों के द्वारा दो बार हिंदू समाज के संतों की हत्याएं करवाईं गईं ।इंदिराम्मा ने तो देश के संविधान को ही पलीता लगाके आधी रात को देश में आपातकाल लागू कर दिया। रायसीना हिल से दुम  अगले दिन हिलवाई गई।  कोशिश  तो इनकी बाबा रामदेव के सफाये की भी थी पर वे ईश्वर की  कृपा से बच गए।
गोधरा करवाने का जेहादियों के साथ किनका तालमेल था ?यह जग जाहिर है। हिन्दू परिवारों को तोड़ने के लिए ऐसे क़ानून बनाये के बहन भाइयों के सहज मेल को नष्ट कर उन्हें संपत्ति अधिकार में उलझा दिया। इन्हीं के प्रताप से परिवारों में लेस्बियन प्रवृत्ति को उभारा गया। साध्वी प्रज्ञा जैसे निरपराध संतों पर ज़ुल्म किया गया। हिन्दुओं के प्रति इनके मन में बेशुमार ,बेहद की  (अनंत) नफ़रत है। कभी प्रधानमन्त्री रहे सरदार मनमोहन सिंह से कहलवाया गया के देश के संशाधनों पर पहला हक़ मुसलमानों का है। देश की हिन्दू जनता इनसे इतनी तंग है के उनकी सामूहिक आह शाप बनकर नेहरू कांग्रेसियों पर पड़ेगी। वक्त दूर नहीं है।जब ये ४४ से चार पर आके मानेंगे। 

वक्त दूर नहीं है  

शुक्रवार, 6 दिसंबर 2019

महाभारत में कहा गया है : यन्न भारते !तन्न भारते !अर्थात जो महाभारत में नहीं है वह अन्यत्र भी नहीं है।ज़ाहिर है अभी जेनेटिक्स भी उन ऊंचाइयों को स्पर्श नहीं कर सकी हैं जो यहां वर्णित हैं

महाभारत में कहा गया है : यन्न भारते !तन्न भारते !अर्थात जो महाभारत में नहीं है वह अन्यत्र भी नहीं है।ज़ाहिर है अभी जेनेटिक्स भी उन ऊंचाइयों को स्पर्श नहीं कर सकी हैं जो यहां वर्णित हैं।  


पुराणों में जो कहा गया है वह शुद्ध भौतिक विज्ञानों का निचोड़ भी हो सकता है ,सारतत्व भी। ज़रूरी नहीं है वह महज़ मिथ हो और चंद लेफ्टिए मिलकर उसका मज़ाक बनाते  उपहास करते फिरें ।
मसलन अगस्त्य मुनि को 'घटसम्भव' कहा गया है। 'कुंभज' और 'घटयौनि' भी 'कलशज :' भी ; एक ही अभिप्राय है इन  पारिभाषिक नामों का जिसका जन्म घड़े से कलश से हुआ है वही अगस्त्य है सप्तऋषि मंडल का शान से चमकने वाला कैनोपास (Canopus )ही अगस्त्य है जो लुब्धक (sirius)के बाद दूसरा सबसे चमकीला ब्राइट स्टार है।

 गांधारी के बारे में कहा जाता है जब उसे पता चला कुंती एक बच्चे को उससे पहले जन्म देने वाली है (युधिष्ठिर महाराज ज्येष्ठ पांडव उस समय कुंती के गर्भ में ही थे )उसने ईर्ष्या वश अपने गर्भ में पल रहे भ्रूण के मुष्टि प्रहार से सौ टुकड़े कर दिए यही सौ कौरव बनकर आये। एक ही फर्टिलाइज़्द ह्यूमेन एग के मुष्टि प्रहार से विभाजित टुकड़ों से पनपे पूर्ण कालिक गर्भ काल के बाद।अलबत्ता एक दुशाला भी थी ये सभी पेटर्नल ट्विन्स थे न के आइडेंटल। कौरवों में वरिष्ठ दुर्योधन की एक मात्र बहन का नाम दुशाला था।

आज चर्चा एक और माइल स्टोन की है दुनिया का पहला शिशु कुदरती तौर पर एक नहीं दो दो महिलाओं के गर्भ में पनपने के बाद प्रसवित हुआ है। इंवाइवो फर्टिलाजेशन के ज़रिये।
इन्क्यूबेटर की भूमिका में मात्र अठारह घंटा यह कॉर्पोरल माँ डोना फ्रांसिस  इस्मित के गर्भाशय में रहा। इसके बाद का गर्भकाल जेस्टेशन पीरियड अपनी दूसरी धाय माँ जैस्मीन की कोख में  भुगताया।

यह कमाल का हुनर ब्रितानी वूमेंस फर्टिलिटी क्लिनिक स्विस प्रोद्योगिक कम्पनी अनेकवा ने कर दिखाया है। यहां इनविट्रो फर्टिलाजेशन (परखनली गर्भाधान का सहारा नहीं लिया गया है ). बस एक कैपसूल  में डोना के फीमेलएग (ह्यूमेन एग )का मिलन किसी मर्द के स्पर्म से करवाया गया (स्पर्म बैंक से स्पर्म जुटाया गया )तथा कैप्स्यूल को दोना के गर्भाशय में अठारह घंटा पनपाया गया इंक्यूबेट किया गया। अब क्योंकि डोना पूरे टर्म भ्रूण को रखने को उद्यत नहीं थीं जबकि जेस्मिन इस प्रग्नेंसी को अंजाम तक ले जाना चाहतीं थीं पुन : एम्ब्रियो को अठारह घंटा बाद जेस्मिन के गर्भाशय में रोप दिया गया।इस हुनर के कमाल को आने -वाइवो प्रसीजर (AneVivo Procedure )कहा गया है। हम लंदन की इस क्लिनिक को बधाई देते हुई नवजात शिशु की तंदरुस्ती की दुआ करते है  नाटिंघमशैर की लांस कॉर्पोरल तथा यहीं की मोतरमा जो पेशे से भी नर्स हैं बधाई देते हुए अपना वक्तव्य संपन्न करते हैं। जैश्रीकृष्णा !जयश्रीराम !जै हिंद की सेना प्रणाम !शब्बाख़ैर ! 

सोमवार, 2 दिसंबर 2019

कहीं बलात्कार एक ला -इलाज़ रोग न बन जाए ?

बड़ी मुश्किल है खोया मेरा दिल है..... कोई इसे ढूंढ के लाओ न .......आखिर ऐसी फ़िल्में किस के मनोरंजन के लिए बन रही हैं जिसमें कथित नायक बे -हद के उत्पीड़न की हद तक जाकर हीरोइन को आतंकित करता है। ....... इन्साफ का तराजू .....कैसा इन्साफ ?कहाँ मिलता है इंसाफ  औरत को ? इस देश में ....कहाँ ?

.औरत ने जनम दिया मर्दों को मर्दों ने उसे बाज़ार दिया ,

जब जी चाहा मसला कुचला जब जी चाहा दुत्कार दिया .

....कोख  के अंदर भी औरत दफन.कोख के  बाहर भी। घर में भी मेहफ़ूज़ नहीं। कहीं हलाला कहीं रखैल .......   ऊ लाला  ....  ऊलालाला  के  बाद अब और कुछ बचा है दिखाने खोने को ?कला है यह ?

"वह सुबह कभी तो आएगी" -की गुंजाइश ही कहाँ बचती है।

हमारा नागर बोध ,हमारी सिवि-लिटी  किस स्तर को छू रही है। " औरत का अस्मिता इंडेक्स "भारत में नापा जाए -देखा जाए- राष्ट्र कुल के देशों में हम कहाँ हैं ?
रावण जैसे महाबली ने भी सीता के साथ बलात्कार नहीं किया था। आज पिद्दी न पिद्दी के सोरबे एक ज़िंदा औरत के साथ बलात्कार करके क़ानून के गलियारों की आड़ में बरसों रोटियां तोड़ते हैं। पुलिस जो शहर की  हिफाज़त करती है नागर -सेना है उसका खौफ कहाँ हैं।उसकी वर्दी का ?अपनी प्रासंगिता तलाश रही है बे -चारी खाकी वर्दी ?काला कोट बलात्कारियों को बचाने से भी नहीं चूकेगा। ऐसे उकीलों से राम बचाये।

और हम खुद क्या कम हैं ? अपने अंदर पसरी फैली  चौ -तरफा  व्याप्त अतृप्त भोगी मानसिकता को क्या नकार सकने की ईमानदारी बरतेंगे हम लोग ?
'वी हेव ए क्रिमिनल आई 'दिस हेज़ गोट टू बी 'मेटा -मॉर- फोज़-अ -ड 'क्या हुआ हमारे नैतिक आचरण का ?कहीं दोहरी मानसिकता  का तो हम शिकार नहीं हैं हम लोग ?।मी टू ?
बलात्कार यदि एक मानसिक रोग है   .... तो इसे डायग्नोस्टिक स्टेटिस्टिकल मेनुअल ( D.S.M.IV)और इंटरनेशनल क्लासिफिकेशन आफ मेन्टल डिसऑर्डर्स में जगह मिलनी चाहिए। 

IBHAS (Institute Of Behavioural Health and  Allied Sciences ) ,VIMHANS (Vidya Sagar Institute Of Mental Health and Neurosciences ),NIMHANS (National Institute Of Mental Health and Neuro  Sciences )क्या अपने सांझा प्रयासों से इस रोग की प्रागुक्ति, शिनाख्त वक्त रहते कर सकते हैं ?

 समाज  का एक तबका 'इससे' साफ़ साफ़ ग्रस्त है। इसकी परिव्याप्ति जम्मू कश्मीर लद्दाख से कन्या -कुमारी तक है।कहीं बलात्कार एक ला -इलाज़ रोग न बन जाए ?

ज़ुल्म की मुझपर इन्तिहाँ कर दे ,
मुझ सा बे जुबां ,फिर कोई मिले, न मिले।  

मैं हवाई -जहाज उड़ा सकतीं हूँ। मर्दों का अहम मर्दन करने वाली रणचंडी भी बन सकतीं हूँ  बलात्कार एक ऐसा आतंकवाद है जिसका शिकार सिर्फ और सिर्फ औरत होती है। वह बदला लेगी ज़रूर लेगी खबरदार !

कोई शिव नहीं लेटेगा मेरे पैरों के आगे -मुझे रोकने के लिए -है ही नहीं कोई माई का लाल , काली बन मैं  महिषासुर का वध करने को आतुर हूँ। अब देर नहीं है। एक बार आमरण अनशन करके देख लूँ @Gandhi 150 

https://www.youtube.com/watch?v=jLEOSnLi4Zw