गुरुवार, 1 दिसंबर 2011

मूड बूस्टिंग फूड्स

सब दिन सावन हों ये ज़रूरी नहीं हैं कोई कोई दिन ऐसा मनहूस गुज़रता है ढलते ढलते खिन्न और अवसाद ग्रस्त बना जाता है वजह चाहें बेड ट्रेफिक हो ,शाम का महानगरीय मटमैला कुहाँसा स्मोग हो या बोस का खिन्न मिजाज़ आप चुका चुका महसूस करतें हैं .लेकिन इस अन्य - मनस्कता, खिन्नता को अपने ऊपर हावी मत होने दीजिए इस स्थिति से बाहर आने के लिए कुछ मूड बूस्टिंग फूड्स हैं जो समय की कसौटी पर खरे उतरे हैं .आजमाइए इन्हें . ये फिर से आपको स्फूर्ति और सक्रीयता से भर देंगे बाकी पहर दिन का अच्छे मूड में बीतेगा .
पहले बेड मूड फूड्स को लेते हैं :
मूड खराब होने पर हम लपकतें हैं कार्बोहाईड्रेट्स और सुगर से सनी चीज़ों की तरफ जो तुरता तौर पर तो आपको ऊर्जित होने का एहसास करवातें हैं लेकिन हाई के बाद आपको लो में आने में तनिक भी देर नहीं लगती पहले सुगर हाई और फिर सुगर लो' एक नियम है अपवाद नहीं .
बस आप गंभीर किस्म के मूड स्विंग्स भंवर में फंसके रह जातें हैं .एक कुचक्र में फंसे रह जातें हैं . जब भी आप अपने को जरा दयनीय अवस्था में पातें हैं ढीला ढाला श्लथ पातें हैं इसी खाने की और ललचाते चले आतें हैं ऐसे में तौल बढ़ने के साथ ही कसरत करने की पहल भी जाती रहती है एक झटके के बाद दूसरा लगता रहता है आपका वजन बढ़ता चला जाता है .नतीजा वही ढाक के तीन पात मूड खराब का खराब क्या और भी खिन्न और भी उदास .अवसाद ग्रस्त .
मूड बूस्टिंग फूड्स :
निम्न में से कमसे कम दो का रोज़ चयन कीजिये .:
(1)शकरकंद (sweet potatoes):folate से युक्त हैं शकरकंद आलू से बेहतर हैं ,low glycaemic index लिए हैं .ब्लड सुगर को यकसां steady बनाए रहतें हैं शकरकंद .
(२)मूंगफली मन को स्फूर्ति और ख़ुशी से भरने वाले खनिज सेलिनियम से भरपूर है .बे -चैनी एन्ग्जायती को दूर भगाती है मूंगफली Peanuts.
(3)तैलीय मच्छी (Oily fish ).:खासकर sardines और Mackerel मच्छी ओमेगा थ्री फेटि एसिड्स की खान हैं .ध्यान में वृद्धि करतें है ये एसिड्स .दिमाग को मूड की व्याख्या की सामर्थ्य प्रदान करतें हैं .
(४)जिंक से भरपूर अंडे आपको ऊर्जा वान और सचेत बनाए रहतें हैं खासकर अपचयन (मेटाबोलिज्म )का विनियमन करके सुगर के विनियमन में भी मददगार रहतें हैं .
(५)दही (Yogurt):केल्शियम और प्रोटीन से भरपूर दही भी मूड को हलका फुल्का प्रफुल्लित रखती है .अवसाद और बे -चैनी को दूर भागाती है दही .मूड स्विंग्स में मददगार रहती है .
(६)पालक (Spinach):आयरन बहुल यानी लौह तत्व से भरपूर पालक के पत्ते एक तरफ थकान को दूर भागातें हैं दूसरी तरफ हमें ऊर्जावान .ध्यान को बढातें हैं .विटामिन बी -६ और फोलेट का भी अच्छा स्रोत है पालक .दिमाग को मदद पहुँचातें वाले प्रफुल्लित रखने वाले न्यूरो -ट्रांसमीटरों के निर्माण में सहायक है ..मन का स्पंदनऔर स्फूर्ति इन जैव -रसायनों से ही तो है .
raam raam bhaai !raam raam bhaai !
December 1,2011.
रेग्रेसिव ऑटिज्म में दिमाग का आकार बढ़ जाता है .
(Autistic boys have larger brains:THE TIMES OF INDIA ,MUMBAI,NOVEMBER 30,2011,P19).
एक ख़ास किस्म का आत्मविमोह होता है जिसे पश्चगामी आत्मविमोह कहा जाता है इसमें शिशु जब चार माह का हो जाता है तब अचानक उसका दिमाग असामान्य तौर पर बढना शुरु करता है और अपने उन समकक्षों के बरक्स जिनमे आत्मविमोह के लक्षण और भी पहले प्रगट हो जातें हैं ६फ़ीसद बढ़ जाता है दिमाग की इस असामान्य वृद्ध के चलते ही रिग्रेसिव ऑटिज्म से ग्रस्त ये बच्चे सोशल स्किल्स और लेग्विज भूल जाते हैं .वह जो विकास की अब तक की अल्प यात्रा में अपने ही परिवेश से ग्रहण की थी .
राम राम भाई !राम राम भाई !
नया नौ दिन का पुराना सौ दिन का .
(ओल्ड इज गोल्ड :centenarians healthier than youngsters ,The Times Of India ,Mumbai ,November,30,2011,P19).
एक ब्रितानी अध्ययन से खुलासा हुआ है शतायु लोग अकसर सेहतमंद तंदरुस्त रहे आतें हैं अपने से उम्र में कहीं छोटे लोगों से .इनमे से कितने ही लोग जो सौ क्या सौ के भी पार चले जाते हैं कैंसर से बचे रहने के उपाय किए रहतें हैं इसे चाहे जीवन शैली कह लो या कुछ और .इनमे से कई तो ता - उम्र ,उम्र के आखिरी पड़ाव तक यहाँ तक की जीवन के आखिरी चंद महीनों में भी अच्छी सेहत के मालिक बने रहते हैं .इन लोगों की जीवन शैली स्वास्थ्यकर रही आती है युवावस्था से ही .
इस अध्ययन को संपन्न किया है The International Longevity Centre UK think -tank ने तथा इसे अनुदान मुहैया करवाया है Age Uk ने .बकौल इस अध्ययन के शतायु होना समाज में एक शीर्ष उत्सवी मान्य उपलब्धि है.अखबार The Daily Telegraph ने इस अध्ययन की पूरी रिपोर्ट प्रकाशित की है .
कुछ अन्य रिसर्चों के अनुसार भी शतायु लोग युवतर लोगों के बरक्स अच्छा कायिक और भौतिक स्वास्थ्य बनाए रहतें हैं तथा बुढापे के अनेक नॉन -कम्युनिकेबिल रोगों को मुल्तवी रखतें हैं साफ़ बचे रहतें हैं इन गैर संक्रमण शील अ-छूतहा रोगों से .

4 टिप्‍पणियां:

"जाटदेवता" संदीप पवाँर ने कहा…

हमेशा की तरह ये लेख भी सम्भाल कर रखने योग्य

डॅा वेदप्रकाश श्योराण ने कहा…

Sir dahi hum khoob khata huin per mood per uska asar kitna hai kah nhin sakta. Aap theek hi likhten honge....hum ab aur jayada khuss rhne ki karunga.

डॉ टी एस दराल ने कहा…

अच्छी जानकारी दी है ।
कहते हैं , चॉकलेट भी मूड एलीवेटर होती हैं ।

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

हम तो केला खाते हैं ऐसे में।