शुक्रवार, 16 दिसंबर 2011

क्या है हिग्स बोसोंन के होने ,न होने का मतलब ?

क्या है हिग्स बोसोंन के होने ,न होने का मतलब ?
(Holi Grail Of Higgs Hunters.Is humanity 's quest for the Higgs boson,dubbed as the "God particle ",about to end?)'Some may wonder ,What is the big deal?/THE TIMES OF IDEAS/THE TIMES OF INDIA MUMBAI ,DEC 16,2011,P20.
योरोपीय संघ की नाभिकीय शोध से जुड़े साइंसदानों की संस्था CERN ने इस आशय की घोषणा की है यथा संभव उन्होंने हिग्स बोसोंन की शिनाख्त कर ली है .जो अब तक भौतिकी शाश्त्र और इसके माहिरों की हाथ न आने वाली सबसे बड़ी चाहत बना रहा है ,holy grail of particle physics बना रहा है .तब क्या यह मान लिया जाए कि यह खोज समाप्त हो गई ?बेशक यह शिनाख्त एक दम से पुख्ता सौ फीसद सटीक और अकाट्य न भी हो फिर भी यह उत्सवी माहौल तो है ही .

तकरीबन चार दशकों तक भौतिकी के माहिर इस हाथ न आने वाली सोने की चिड़िया को ढूंढते रहे हैं . जिसे नोबेल पुरूस्कार से सम्मानित साइंसदान Leon Lederman ने "God particle"कहा था .योरोपीय ओर्गेनाज़ेशन फॉर न्यूक्लियर रिसर्च CERN के पास दुनिया का सबसे शक्तिशाली और विशाल कण त्वरक लार्ज हेड्रोंन कोलाईदर LHC है .यह प्रोटोनों को ९९.९९९९ C का के बराबर वेग प्रदान कर सकता है त्वरित कर सकता है तकरीबन तकरीबन प्रकाश के वेग (C)से. हम जानतें हैं और अच्छी तरह से मानतें हैं प्रकाश का अपना निर्वातीय वेग एक कुदरती नियतांक है एक नेच्युरल कोंस्तेंत हैं .इसे एक नियतांक C से दर्शाया जाता है .
गौर तलब है ऊपर हमने जिस कण त्वरक एटम स्मेशर का ज़िक्र किया है इसे हिग्स की टोह लेने के लिए ही खड़ा किया गया था .छ :अरब डॉलर की खर्ची के बाद .
बच्चों को स्कूल में यही पढ़ाया जाता है आदिनांक कि यह स्रष्टि परमाणुओं का खेला है परमाणु ओं की ही निर्मिती है .पुरातन काल से ही यह धारणा चली आई है परमाणु अविभाज्य है .इसके आगे और छोटे अंश नहीं हो सकते .क्वांटम है यह पदार्थ का .डेमोक्रेट्स ने एटम शब्द का स्तेमाल सबसे पहले किया था .दार्शनिक Leucippus ने भी इसे अखंडनीय कहा था .
उन्नीसवी शती के अंत में जे जे टॉमसन ने इलेक्त्रोंन की खोज की .पता चला परमाणु अविभाज्य नहीं है इसके इससे भी ज्यादा अव -परमाणुक अंश मौजूद हैं .इसके कुछ सालों के बाद ही प्रोटोन की खोज कर ली गई .
इसके बाद के दो दशकों में भौतिकी ने एक नै उड़ान भरी .क्वांटम भौतिकी का जनम हुआ जिसकी नींव रखी नील्स बोह्र इरविन श्रोडिन्गर तथा वार्नर हाइजेनबर्ग ने .यह पदार्थ से जुड़े सिद्धांतों की सूक्ष्म स्तर पर विवेचना थी .इसी के साथ परमाणु के बारे में हमारी जानकारी में और इजाफा हुआ .न्युत्रोंन का भेद खुला .जो द्रव्य की एक आवेश हीन उदासीन कणिका और प्रोटोन के सहोदर के रूप में , जुड़वां के रूप में अस्तित्व में आया .
इसके बाद और भी कणिकाओं का अव -परमाणुविक कणिकाओं का अस्तित्व रोशन हुआ .अगले दो दशकों में इनके कुनबे में और भी बढ़ोतरी हुई .
१९६०-१९७० के दरमियान भौतिकी के माहिरों की तिकड़ी में सर्व श्री Sheldon Glashow ,Steven Weinberg ,Abdus Salam ने एक गणितीय सिद्धांत का प्रतिपादन किया जिसने सभी अव -परमाणुविक कणों और उनके बीच परस्पर अनुक्रिया की Interactions की सटीक व्याख्या की . आगे चलकर यही मानक निदर्श (Standard model)के नाम से जाना गया .इस निदर्श के अनुसार द्रव्य की मूल भूत बुनियादी इकाइयों की संख्या दो दर्जन के करीब है .यह मोडल इसे समझाता है कि कैसे द्रव्य की बुनियादी कणिकाएं द्रव्यमान ग्रहण करती है .अलबता बुनियादी कणिकाओं के इस ज़म घट में प्रकाश का क्वांटम (सबसे छोटा और अखंडनीय कण) फोटोंन तथा अबूझ ग्ल्युओंन द्रव्यमान शून्य हैं मॉस लेस हैं . बुनियादी कणिकाओं को द्र्व्यामं का गुण प्रदान करने वाला कण बोसोंन या God particle कहलाता है .
IT IS HIGGS BOSON WHICH IMPARTS ALL OTHER ELEMENTARY PARTICLE THEIR MASS.,ENDOW THEM WITH MASS .
ब्रितानी भौतिक शाष्त्री पीटर हिग्स भारतीय विज्ञानी जगदीश चन्द्र वासु एवं आइस्न्ताइन ने बोसानों की सांख्यकी को समझाया है .इसे बोस -आइन्स्टाइन सांख्यकी भी कहा गया है .
१९७० एवं १९८० के दशकों में LHC की पूर्व वर्ती पीढ़ी के कण त्वरकों द्वारा संपन्न प्रयोगों ने जो CERN के तत्वाधान में किए गए इस मानक निदर्श की कई प्रागुक्तियों की पुष्टि की .लेकिन हिग्स बोसोंन पकड़ में नहीं आया .और इसीलिए यह भौतिक शाश्त्रियों की सनक बना रहा .
कण भौतिकी के माहिर दीवानगी की हद तक इसे खोजने में जुटे रहे .
कुछ ने कहा हमें ज्यादा शक्तिशाली कण त्वरकों की ज़रुरत है जो कणों को बेहद की ऊर्जा प्रदान कर आमने सामने से उनकी टक्कर करा सकें .यदि कभी मिला तो इन्हीं कणों की टकराहट में हिग्स बोसोंन पकड लिया जाएगा .कण टोही उसकी ऊंगलियों के निशाँ पकड लेंगे .चाहे फिर वह कितना ही अल्प जीवी हो .
कुछ ने तो हिग्स बोसोंन के अस्तित्व पर ही सवालिया निशाँ लगा दिया है .इनमे स्टीफन हाकिंग्स जैसे से दुनिया के शीर्ष भौतिकी के माहिर वील चेयर बाउंड साइंसदान भी शामिल है .
अब लगता है इसके अवशेष साइंसदान ने LHC में देखें हैं .बेशक पल भर की पलांश की झलक ही सही .दिक्कत यह है अभी इस झलक की निश्चयात्मक पुष्टि होना भविष्य के गर्भ में है .जिसके लिए CERN के तत्वाधान में और भी ज्यादा शक्ति शाली कण त्वरक चाहिए और प्रयोग होना बाकी है .फिल वक्त इसे कामचलाऊ पुष्टि ही अंतरिम पुष्टि ही समझा जाए लेकिन यह क्या कम है कि कहीं कुछ हिग्स बोसोंन जैसा ही देखा गया है LHC के गिर्द ?
RAM RAM BHAI !RAM RAM BHAI!
DEC17,2011
HEALTH TIPS:Take some crushed garlic cloves and rub them on the face twice a day .
लहसुन की कुछ कलियाँ कूट पीस कर चेहरे पर दिन में दो बार मलें .चेहरा दस मिनिट बाद धौ डालें स्वच्छ जल से .फिर देखिए चेहरे की कान्ति.वैसे इन दिनों जब उत्तर भारत के कडाके की ठंड पड़ रही है कच्चा लहसुन सलाद में खाना भी चमड़ी की दमक को बढाता है .सर्दी का असर भी दूर भगाता है .
To maintain blood pressure ,mix a tablespoon of fresh amla (Indian Gooseberry)juice and honey together and drink it daily.
ताज़ा आमला को सत एक बड़ा चम्मच शहद में मिलाकर रोजाना पियें ,रक्त चाप नियमित (मान्य )रहेगा .

6 टिप्‍पणियां:

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

बोसान है तो सबको साथ लेकर ही चलेगा, पर इतनी गति से विनाश न कर बैठे।

अरुण कुमार निगम (mitanigoth2.blogspot.com) ने कहा…

बिल्कुल ही नई जानकारी मिली, साथ ही ठंड के लिए उपयोगी हिदायतें भी.

मनोज कुमार ने कहा…

कहां-कहां से अनमोल जानकारी जुटा लाते हैं आप! हम तो दंग हैं।

mahendra verma ने कहा…

बोसान के बारे में अच्छी जानकारी।
अगर फोटान द्रव्यमान रहित है तो वह कण न होकर उर्जा है। वैसे, फोटान कभी कण और कभी उर्जा की तरह व्यवहार करता है।

veerubhai ने कहा…

जी हाँ महेंद्र वर्मा जी ऊर्जा और पदार्थ एक ही चीज़ के दो पहलु हैं .पदार्थ की भी सूक्ष्म स्तर पर प्रवृत्ति द्वैत है .प्रकाश का द्वैत तो स्वयम सिद्ध है जो आगे बढ़ता है तरंग रूप और टकराता है पदार्थ रूप किसी भी चीज़ से .वैसे ऊर्जा पदार्थ का विरल ,विर्लिकृत स्वरूप है तथा ऊर्जा पदार्थ का सान्द्र रूप है .हम जब तक जीवित है पदार्थ हैं दृश्य जगत में हैं और मृत्यु के बाद ऊर्जा स्वरूप आत्मा ही रह जातें हैं पदार्थ रुपी वस्त्र हीन .

veerubhai ने कहा…

जी हाँ महेंद्र वर्मा जी ऊर्जा और पदार्थ एक ही चीज़ के दो पहलु हैं .पदार्थ की भी सूक्ष्म स्तर पर प्रवृत्ति द्वैत है .प्रकाश का द्वैत तो स्वयम सिद्ध है जो आगे बढ़ता है तरंग रूप और टकराता है पदार्थ रूप किसी भी चीज़ से .वैसे ऊर्जा पदार्थ का विरल ,विर्लिकृत स्वरूप है तथा पदार्थऊर्जा का सान्द्र रूप है .हम जब तक जीवित है पदार्थ हैं दृश्य जगत में हैं और मृत्यु के बाद ऊर्जा स्वरूप आत्मा ही रह जातें हैं पदार्थ रुपी वस्त्र हीन .फोटों प्रकाश का क्वांटम है सबसे छोटा कण तरंग है .सफ़ेद प्रकाश में सात छोटे बड़े कण है सात किस्म की कम या ज्यादा ऊर्जावान तरंगें हैं बैंजनी तरंग सबसे ज्यादा ऊर्जा लिए है लाल सबसे कम .