बुधवार, 30 नवंबर 2011

भोजन से केलोरी कम करते रहना मधुमेह से निजात भी दिलवा सकता है .

नित्य प्रति के भोजन में से रोजाना केलोरी कम करना मधु मेह रोग खासकर सेकेंडरी डायबितीज़ के रोगियों के लिए दवा से ज्यादा असरकारी सिद्ध हो सकता है बा शर्ते भोजन में से केलोरी कम करके खाने का सिलसिला कमसे कम चार माह तक ज़ारी रखा जाए .यह नतीजे नीदरलैंड्स की Leiden University के रिसर्चरों की एक टीम ने निकाले हैं अपने एक ताज़ा तरीन अध्ययन से .यानी जीवन भर का रोग मधुमेह जिसमे अग्नाशय पर्याप्त इंसुलिन नहीं बना पाता जो खून में से ग्लूकोज़ को तोड़ सके ठिकाने लगा सके चार माह तक रोजाना कम केलोरी वाला भोजन लेते रहने से ठीक भी हो सकता है .ज़ारी दवा दारु से ज्यादा मुफीद सिद्ध हो सकता है .
अध्ययन से पता चला वे तमाम मधुमेही जो अपनी रोजमर्रा की खुराक से रोजाना केलोरीज़ कम करते रहे उनका ब्लड सुगर कंट्रोल कुलमिलाकर दाय्बेतिक स्टेटस बेहतर रहा .इनकी सेहत में आमतौर पर भी अपेक्षाकृत ज्यादा सुधार देखा गया दी गई दवा दारु के बरक्स .
मजेदार बात यह रही चार माह के बाद उन्हें जीवन रक्षक इंसुलिन की ज़रुरत ही नहीं रह गई थी .इनकी हृद पेशी के गिर्द एकत्र फैट भी कम हो गया था .दिल का कामकाज भी पहले से बेहतर चलने लगा .इसका मतलब क्या यह है कि बहुत ही कम केलोरी वाला भोजन एक ऐसा कदम है इंटर -वेंशन है जो मधुमेह से मुक्ति भी दिलवा सकता है .जी हाँ सेकेंडरी डायबितीज़ से टाइप -२ डायबितीज़ से निजात भी दिलवा सकता है .इसके असर दूरगामी है .अपार क्षमता और संभावनाएं हैं इस साधारण से दिखने वाले इलाज़ की .
जीवन शैली में लाए गए ऐसे बदलाव दिल के लिए और भी ज्यादा मुफीद साबित हो सकतें हैं .खासकर सेकेंडरी डायबितीज़ के मामलों में .डेली एक्सप्रेस अखबार ने इस अध्ययन के मुखिया Sebastiaan Hammer का यह वक्तव्य सुखियों में प्रकाशित किया है .आकाशवाणी ने इसे प्रभात समाचार में स्थान दिया है .टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने इस पूरी खबर को प्रकाशित किया है .
सन्दर्भ -सामिग्री :Eating low -calorie diet for 4 months can cure diabetes/TIMES TRENDS/THE TIMES OF INDIA ,MUMBAI ,NOVEMBER 30,2011,P19.
NOVEMBER 30,2011.
अच्छा दिखने के लिए कुछ भी करेंगे नै चाल के बच्चे .
अच्छा दिखने के लिए कुछ भी करेंगे नै चाल के बच्चे .
(Gen X willing to try anything for 'perfect 10' figure)/TIMES TRENDS/THE TIMES OF INDIA,MUMBAI,NOVEMBER29,2011,P17.
आजकल के बच्चे एक अप्राप्य देह यष्टि ( अन -अतेनेबिल बॉडी इमेज) और खामखयाली से भरपूर तौल को हासिल करने के लिए कुछ भी करने को तैयार हैं .एक प्रकार का ओब्शेशन बरपा है इन पर अपने लुक्स को लेकर .यही सार तत्व है एक ताज़ा तरीन अध्ययन का .जिसमे ११-१६ साला ८१० किशोर किशोरियों पर नजर रखी गई है .सर्वे में शामिल तकरीबन ५०%लडकियां तथा एक तिहाई लड़कों में कथित आदर्श कदकाठी के अनुरूप तौल और नैन नक्श को लेकर एक उतावलापन एक दीवानगी ,उन्माद दिखलाई दिया है .जिसे हासिल करने के लिए ये कुछ भी तो करेंगे .डेली मेल ने इस खबर को प्रकाशित किया है .
हालत यह है कि सर्वे में शामिल हर दस लड़कों में से एक ज्यादा से ज्यादा मस्क्युँल्र (पेशीय दम ख़म वाले लुक्स )के लिए स्तीरोइड्स तक लेने को राज़ी हैं जबकी हरेक आठ में से एक लड़की डाईट पिल्स और विरेचक (laxatives)लेने को उद्विग्न है .
Central YMCA (यंग्स मेन क्रिस्चियन एसोशियेशन )की मुख्य कार्यकारीRosi Prescott (Chief executive) कहतीं हैं :ये मासूम कमसिन अपने होने दिखने लुक्स को लेकर बहुत ही अ सहज और अ -सुरक्षित महसूस करतें हैं .बॉडी इमेज को लेकर पशोपेश में हैं .भ्रमित हैं .इन्हें तुरता हल चाहिए इन समस्याओं के भले वे देर से चली आई उलझनों को न सुलझा पायें और हकीकत में घातक हों सेहत का सत्या नाश करने वाले तुरता समाधान हों ..यही वह उपकारी संस्था है जिसने इस सर्वे को कमीशन किया है .
हद तो यह है जो समस्या कल तक यंग गर्ल्स तक सीमित थी वह अब यंग बोइज /यंग मेन में जड़ ज़मा रही है .
इस ब्रितानी सर्वे में शामिल एक चौथाई लड़के लडकियां टी वी स्टार्स सा दिखने के लिए कोस्मेटिक सर्जरी तक करवाने को तत्पर हैं .५०%लडकियां तथा सर्वे में शरीक एक तिहाई लड़के अपनी छवि का मिलान छोटे परदे पर दिखने वाले करिश्माई पात्रों से कर रहें हैं .
सवाल है जो अ -प्राप्य है ,अ -वास्तविक है उसे वजूद में कैसे लाया जाए अपनाया जाए ?
RAM RAM BHAI!
स्तन कैंसर की बढ़वार को मुल्तवी रखती है टाइप -२ डायबितीज़ की दवा मेटफोर्मिन .
टाइप -२ डायबितीज़ के प्रबंधन में स्तेमाल होती है एक दवा मेत्फ़ोर्मिन(Metformin ).खासी सस्ती है यह दवा लेकिन अपने असर में समझा जाता है यह ब्रेस्ट कैंसर की बढ़वार को लगाम लगा देती है .समझा जाता है यह दवा जो सेकेंडरी डायबिटीज़ के मरीजों को दाय्बेतिक कंट्रोल के लिए दी जाती है कुछ मानव निर्मित तथा कुछ कुदरती रसायनों को बाधित करती है जो ब्रेस्ट कैंसर ( स्तन कैंसर) की बढ़वार को हवा देते हैं .डायबितीज़ से सम्बद्ध कुछ कैंसरों में आम हैं स्तन ,अग्नाशय तथा यकृत कैंसर (ब्रेस्ट ,पेंक्रियाज़ तथा लीवर कैंसर्स ).डायबिटीज़ के मरीज़ के लिए इन कैंसरों के खतरे का वजन बढ़ जाता है .
डायबितीज़ के प्रबंधन में प्रयुक्त यह दवा इन कैंसरों का जोखिम घटा देती है लेकिन यह सब होता कैसे है यह अभी अनुमेय ही है .
यही कहना है बाल रोगों के माहिर तथा Michigan;s college of Human Medicine में बतौर प्रोफ़ेसर कार्यरत Trosko का .
Michgan state university के जामेस त्रोसको के अलावा साउथ कोरिया की सिओल युनिवार्सिती की एक टीम भी इस रिसर्च से जुडी रही है .इस आशय की साक्ष्य जुटाए गए हैं कि मेत्फ़ोर्मिन दवा इन कैंसरों के खतरे को कम किये रहती है .
LINKS TO THIS POST :SECONDARY DIABETES ,METFORMIN ,CANCERS .
सन्दर्भ - सामिग्री : Low-cost daibetes drug can reduce cancer risk/SHORT CUTS /TIMES OF INDIA ,MUMBAI /NOVEMBER ,28 ,2011,P17
RAM RAM BHAI !RAM RAM BHAI !
परिवास योग्य एक ग्रह पृथ्वी जैसा .
(Found :Planet that's just like Earth/Gliese May Contain Liquid Water And Even Life ,Say Scientists )/TIMES TRENDS /THE TIMES OF INDIA ,MUMBAI ,NOVEMBER 28,2011/P17.
साइंसदानों ने दावा किया है बिलकुल पृथ्वी जैसा एक ग्रह खोज निकालने का जहां सिर्फ पानी ही नहीं जीवन भी हो सकता है .समझा जाता है वायुमंडल से लैस हो सकता है यह ग्रह अपने पर्याप्त गुरुत्व की वजह से ,परिवास योग्य भी .
इस भौमेतर ग्रह (exoplanet )को Gliese 581g कहा जा रहा है .हमारे अपने ग्रह पृथ्वी से इसकी दूरी १२३ ट्रिलियन मील बतलाई जा रही है .एक हज़ार अरब को एक ट्रिलियन या दस खरब कहा जाता है .और एक मील में होतें हैं १.६ किलोमीटर .यह अपने पेरेंट स्टार की परिक्रमा ठीक उतनी दूरी से कर रहा है जो इसके परिवास योग्य होने के लिए कॉफ़ी है .इसे Goldilocks zone कहा जाता है .पृथ्वी अपने पेरेंट स्टार सूरज से ठीक ठीक दूरी पर है और पर्याप्त गुरुत्व लिए है जो वायुमंडल को रोके रखे रहने के लिए कॉफ़ी है .यही परिवास योग्य क्षेत्र कहलाता है .जहां जीवन की संभावना बनी रहती है .
खगोली पिंडों के उद्भव विकास और भौतिक गुणों से सम्बद्ध एक विज्ञान पत्रिका astrophysical journal में यह नवीनतर शोध कार्य प्रकाशित हुआ है .प्रकाशित रिसर्च के अनुसार इस चर्चित ग्रह की सतह पर तरल रूप में द्रव रूप में पानी हो सकता है .यही संभावना इसे पृथ्वी की मानिंद परिवास योग्य ग्रहों और चन्द्रों के समक्षऔर समकक्ष ला खडा करती है .
इस शोध के अगुवा हैं केलिफोर्निया विश्वविद्यालय में खगोल विज्ञान और तारा -भौतिकी (Astrophysics) के आचार्य (Professor) Steven Vogt.
यह अनुसंधान ११ बरसों की तपस्या का नतीजा है .इस दरमियान लगातार निकटस्थ रेड ड्वार्फ स्टार Gliese 581 के प्रेक्षण लिए गए हैं .इस लाल बौने सितारे के गिर्द एक नहीं दो -दो ग्रहों को प्रेक्षण में लिया गया है .अब तक इसके गिर्द कुल मिलाकर छ :ग्रहों का पता चल चुका है .
हमारे सौर मंडल के बाहर यह छ :ग्रह अब तक की सबसे बड़ी ज्ञात संख्या में किसी सौर परिवार के सदस्य हैं . इन सबकी कक्षाएं करीब करीब वृताकार हैं .पृथ्वी की ही तरह सर्क्युँल्र ओर्बिट्स लिए हैं ये तमाम ग्रह .
इस ग्रह का द्रव्यमान पृथ्वी से तीन से चार गुना ज्यादा है .यह ३७ दिन में अपने पेरेंट स्टार की एक परिक्रमा कर लेता है यानी इस ग्रह पर एक वर्ष की अवधि ३७ दिन की बराबर है .इसके द्रव्यमान से भासित होता है यह चट्टानी प्रकृति का है ,सुनिश्चित आकार लिए है तथा प्रयाप्त गुरुत्व लिए है एक आवास योग्य वायुमंडल को थामे रखने के लिए .

7 टिप्‍पणियां:

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

चलिये थोड़ा भोजन और कम कर देते हैं।

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ ने कहा…

भोजन से कैलोरी कम कैसे हो इसका कोई उपाय है ज़नाब!

यादें....ashok saluja . ने कहा…

वीरुभाई राम-राम !
आप की सलाह सर-माथे !
मधुमेह वालों के लिए लाभदायक जानकारी .....!
आभार|

Maheshwari kaneri ने कहा…

मधुमेह वालों के लिए अच्छी और लाभदायक जानकारी दी है.....!आभार|...

डॉ टी एस दराल ने कहा…

डाईट कंट्रोल डायबिटीज के इलाज में पहला कदम है । लेकिन अक्सर पर्याप्त नहीं होता । दवा की ज़रुरत भी पड़ती ही है । कुल मिलाकर डॉक्टर की देख रेख में ही इलाज चलना चाहिए ।

Sunil Kumar ने कहा…

मुफ्त के डाक्टर को नमन अच्छी सलाह आपका आभार

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

सही सलाह .... जीने के खाना होना ...खाने के जीना नहीं :)