रविवार, 4 दिसंबर 2011

रिलेक्सिंग का असली मतलब है सक्रिय निष्क्रियता .

रिलेक्सिंग का असली मतलब है सक्रिय निष्क्रियता .
(Relaxing can make you fatter ......faster /SCI-TECH /MUMBAI MIRROR P22,DEC3,2011).
Tel Aviv University के रिसर्चरों के अनुसार आपका बुद्धू बक्से के सामने आराम की मुद्रा में देर देर तक पसरके बैठे रहना दरअसल एक किस्म की सक्रिय निष्क्रियता "Active inactivity" है और आपके बदन पर चढ़ती हुई चर्बी की एक बड़ी वजह बनता है फिर भले ही आप वजन घटाने के लिए रोज़ कसरत भी करते हों .
दरअसल इस प्रकार की निष्क्रियता हमारे बदन को शरीर तन्त्र को वसा कोशाओं (फेट सेल्स )को नै वसा बनाने को उकसाती है .फलस्वरूप फेट सेल्स में और भी चर्बी चढ़ने लगती है .यही कहना है Amit Gefen का .आप टेल अवीव विश्वविद्यालय के जैव चिकित्सा इंजीनियरिंग विभाग में कार्य रत हैं .
दरअसल जब हम ठाले बैठे होतें हैं तब हम अपने शरीर के ऊतकों पर एक ख़ास किस्म का भार डाल रहे होतें हैं .जब हम आराम से लेटे होतें हैं तब भी ऐसा ही होता है . इसे मिकेनिकल स्ट्रेचिंग लोड कहा जाता है .यांत्रिक तननकारी बल भी इसे कह सकतें हैं .इसके दीर्घावधि चलते यानी देर तक आराम फरमाने से टी वी देखते रहने या देर तक लम्बी तान के सोते रहने से ही फेट सेल्स का आदिम स्वरूप जिसे Preadipocyte cells कहतें हैं फेट सेल्स में तेजीसे तबदील होने लगता है .यानी नै फेट सेल्स पैदा होने लगती हैं दीर्घावधि में इस अंतरण से .
अमरीकन जर्नल ऑफ़ फिजियोलोजी "Cell Physiology"में यह शोध कार्य प्रकाशित हुआ है .आधुनिक जीवन का एक और अभिशाप बनके उभर रहा है पड़े पड़े Couch potato बने टी वी देखना .
तो ज़नाब मोटापा सिर्फ केलोरीज़ का असंतुलन नहीं है .कोशाएं भी अपने माहौल के प्रति अनुक्रिया करतीं हैं .खासकर अपने यांत्रिक परिवेश के प्रति प्रतिक्रिया करतीं हैं कोशिकाएं .जब हम ठाले बैठे होतें हैं तब वसा कोशाएं और भी ज्यादा triglycerides बनातीं हैं और ज्यादा मुस्तैदी ज्यादा तेज़ी से बनातीं हैं .क्योंकि उनका साबका स्टेटिक स्ट्रेचिंग से पड़ रहा है .
स्टेटिक स्ट्रेचिंग का देर तक कायम रहना बने रहना ५०%तक ज्यादा चरबी पैदा कर सकता है .इस चर्चित अध्ययन से यही खुलासा हुआ है .ऐसे में स्वास्थ्य कर खुराक और नियमित व्यायाम के चलते भी सेहत पर नकारात्मक असर पडतें हैं .ज़ाहिर है मानव शरीर की संरचना बैठे रहने के लिए नहीं की गई थी .
RAM RAM BHAI !RAM RAM BHAI !
ram ram bhai

शुक्रवार, २ दिसम्बर २०११
कैंसर भी पैदा कर सकता है सन स्क्रीन .
कैंसर भी पैदा कर सकता है सन स्क्रीन
(Sunscreen may be cancerous:short cuts/TOI,MUMBAI ,DEC2,2011/P17).
एक धात्विक यौगिक अकसर उपभोक्ता सामिग्री ,उपभोक्ता उत्पादों और सन स्क्रीन्स लोशनों में भी पाया जाता है जो कैंसर पैदा कर सकता है .इस यौगिक का नाम है जिंक ऑक्साइड जिसका स्तेमाल नुकसान दायक परा -बैंजनी विकिरण (Ultra-violet radiations ) की ज़ज्बी (अवशोषण )के लिए किया जाता है .लेकिन जब यह नेनो -आकारीय कणों में (आणविक या और भी अव -परमाणुविक आकारों)में टूट जाता हैं तब यह घात लगाके मानवीय कोशाओं में दाखिल हो जाता है .फलस्वरूप यह उपभोक्ता का DNA नष्ट कर देता है damage कर देता है .
राम राम भाई !राम राम भाई !
मुंबई दिसंबर 4 ,2011.
नए गुल खिलाता है रोग निदान के अभाव में तपेदिक .का लौटना .
(Untreated TB causes fatal fungal infection)
तकरीबन दस लाख ऐसे मरीज़ जिन्हें बा -कायदा तपेदिक रोग होने की नैदानिक पुष्टि हो जाती है आगे चलके एक ला -इलाज़ लेकिन प्रबंधन योग्य फंफूंद संक्रमण (fungal infection )की चपेट में आजातें हैं .इसे तपेदिक का लौटना समझ लिया जाता है जबकि यह एक फफून्दीय संक्रमण होता है जिसका रोग निदान ही नहीं हो पाता है .और इसीलिए यह चुपके चुपके बढ़ता रहता है और बे -काबू होके ला -इलाज़ हो जाता है .
इस तथ्य का खुलासा हालिया प्रकाशित विश्व स्वास्थ्य संगठन की उस रिपोर्ट में हुआ है जिसे प्रस्तुत किया है मानचेस्टर तथा टोरोंटो विश्वविद्यालयों के रिसर्चरों ने .बकौल शोध कर्ताओं की इस टीम के इस बीमारी (फंगल इन्फेक्शन )के एक्स -रे फीचर्स तथा आम लक्षण तपेदिक से इतने मिलेजुले से होतें हैं कि अकसर माहिर इसका गलत रोगनिदान कर जातें हैं .तथा गलत इलाज़ भी शुरु कर देतें हैं .फलस्वरूप सैंकड़ों लोग बे -मौत मारे जातें हैं .
इस फंगल इन्फेक्शन का पूरा नाम है Chronic pulmonary aspergillosis (CPA) .यह हमारे रोग प्रति -रोधी तंत्र से बचके निकल जाता है चकमा दे जाता है इस रोग निरोधी तंत्र को फेफड़ों में जबकि इस की दस्तक रहती है .ऐसे में यह घात लगाके चुपके चुपके बढ़ता रहता है और बरसों बरस इसका निदान ही नहीं हो पाता है .जब तक कि यकायक इसके लक्षणों के रूप में तौल में गिरावट ,बेहद की थकान ,कफ़ का निरंतर हमला होना कफिंग और रक्त स्राव का प्रगटीकरण नहीं होने लगता .
लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी होती है ऐसे में कामयाबी के साथ इलाज़ की संभावना क्षीण हो जाती है .लिहाजा ५०%मरीजों की इसके साथ बने रहने की संभावना पांच साल से ज्यादा नहीं रह जाती है .
भारत अफ्रीका और चीन के लिए इस रिसर्च के गहरे अर्थ हैं जहां CPA का रोग निदान न हो पाना एक आम बात हो गई है .पश्चिमी देशों में ये हालत नहीं है .
बेशक १९९५-२००८ की अवधि में तीन करोड़ साठ लाख लोगों को तपेदिक से मुक्ति दिलवाई गई लेकिन इसी दरमियान नब्बे लाख नए मामले भी तपेदिक के सामने आये .जिन लोगों को दीर्घावधि यह समस्या बनी रहती है वे चिंता ज़रूर पैदा करतें हैं स्वास्थ्य सेवाओं के लिए अपनों के लिए यकसां .
सन्दर्भ- सामिग्री :TIMES TRENDS/THE TIMES OF INDIA ,MUMBAI,DEC3,2011/p19.

4 टिप्‍पणियां:

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

तभी मेरा लड़का टीवी देखते हुये उछलता कूदता रहता है।

काजल कुमार Kajal Kumar ने कहा…

काहिली के लिए कैसे कैसे सांइटिफ़िक नाम ढूंढ लेते हैं हम मानव :)

प्रेम सरोवर ने कहा…

सार्थक प्रस्तुति। मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है । आभार.।

यादें....ashok saluja . ने कहा…

वीरुभाई राम-राम !
" निष्क्रियता .' की एक दम सही परिभाषा ...
सौ फीसदी सच्ची |
आभार |