शनिवार, 24 दिसंबर 2011

दर्द से ध्यान हटा सकता है पसंदीदा संगीत .

दर्द से ध्यान हटा सकता है पसंदीदा संगीत .
(म्यूजिक कैन टेक अवे पैन /MUSIC CAN TAKE AWAY PAIN /YOU /MUMBAI MIRROR /DEC 24,2011P29).
जिन लोगों की बे -चैनी दिन रात बनी रहती है एन्ग्जायती लेविल उच्चतर बना रहता है तथा जिनका ध्यान बोध सम्बन्धी (संज्ञानात्मक कामों )में ज्यादा रमता है संगीत उनके लिए एक बेहतरीन दर्द -हारी (ANALGESIC ) )का काम कर सकता है .
कृत्रिम दर्द उद्दीपनों के प्रति होने वाली अनुक्रिया को रेस्पोंस को भटका सकता है पसंदीदा संगीत .दर्द के केन्द्रों की तरफ बढ़ने से भटका सकता है .यही कहना है University of Utah Pain Research centre के साइंसदानों का .
अपने अध्ययन के दौरान उन्होंने बतलाया है ,संगीत व्यक्ति का ध्यान दर्द से विमुख कर सकता है .संज्ञानात्मक केंद्र से बाहर खदेड़ सकता है दर्द के केंद्र बिंदु को एहसास को .
इस अध्ययन का केन्द्रीय बिंदु है मरीज़ का ध्यान दर्द से हटाना .यही दर्द के विनियमन का कामयाब ज़रिया बन सकता है एक दिन .
अध्ययन में १४३ प्रतिभागियों का जायजा लिया गया है .
उन्हें संगीत के ट्रेक्स सुनवाए गए ,उनके माधुर्य पर ध्यान लगाने को तथा संभावित विचलन वेरिएशन का पता लगाने के लिए कहा गया .
इसी दरमियान उन्हें फिंगर टिप्स इलेक्ट्रोडों के ज़रिये सह सकने लायक सुरक्षित experimental pain shocks भी दिए गए .पता चला दर्द की लहर खासी कम हो गई थी संगीत की स्वर लहरी माधुरी के असर से . दर्द का उद्दीपन माधुर्य और सुने गए संगीत की मात्रा के अनुरूप ही कमतर होता गया .
Central arousal from the pain stimuli reliably decreased with the increasing music task demand .
संगीत दर्द के एहसास को कमतर कर देता है .यह इन्द्रिय बोध सम्बन्धी रास्तों को सक्रीय करके एक तरफ संवेगात्मक अनुक्रियाओं को बढा देता है जो दर्द के रास्तों से मुकाबला करके दर्द की लहर को दर्द का एहसास करने वाले हिस्सों तक पहुँचने से रोक देती है .दूसरी तरफ मन को संगीत लहरी में ही रमा देता है .संगीत इस तरह एक प्रकार का बोध और संवेगात्मक सम्बन्धी मानसिक अनुबंध है . जो दर्द के एहसास को घटाता है .यह अध्ययन जर्नल ऑफ़ पैन में प्रकाशित हुआ है .

6 टिप्‍पणियां:

dheerendra ने कहा…

आपने सही कहा सुंदर सगीत दर्द को कम कर सकता है,....सुंदर आलेख

मेरी नई रचना --"काव्यान्जलि"--बेटी और पेड़.... में klick करे...

डॉ टी एस दराल ने कहा…

सही कहा ।
दुखते दिल को भी सुकून देता है संगीत ।

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

संगीत शरीर की आवृत्ति बदल देता है।

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ ने कहा…

आपकी इस सुन्दर प्रविष्टि की चर्चा कल सोमवारीय चर्चामंच http://charchamanch.blogspot.com/ पर भी होगी। सूचनार्थ

अरुण कुमार निगम (mitanigoth2.blogspot.com) ने कहा…

बिल्कुल 100 % सही कहा आपने. संगीत जीवन की सारी पीड़ाओं का अहसास कम कर बड़ा ही सुकून देता है.यह न केवल इंसान बल्कि जानवरों तथा वनस्पतियों को भी प्रभावित करता है.
जब भी मुझको याद आते हैं, मेरे बिछड़े मीत
मन ही मन मैं गाने लगता , भूले बिसरे गीत

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') ने कहा…

संगीत तो जादू है सर...
बढ़िया प्रस्तुति...
सादर आभार...