शुक्रवार, 2 दिसंबर 2011

अल्ज़ाऐमर्स रोग के खतरे को कम करती है खुराक में मच्छी .

खुराक में मच्छी खासकर baked या फिर broiled fish ,चूल्हे अंगीठी की सूखी आंच में सिंकी हुई मच्छी अल्ज़ाइमर्स रोग के खतरे के वजन को पांच गुना और Mild cognitive impairment को कम से कम पांच साल तक के लिए क्षीण कमज़ोर बनाए रहती है .यह लब्बोलुआब है एक अध्ययन का जो हाल ही में रेडियोलोजिकल नोर्थ अमरीकी कोंग्रेस ने अपनी एक रिसर्च में प्रस्तुत किया है .
अध्ययन के नतीजे बतलातें हैं जो लोग सप्ताह में कमसे एक मर्तबा baked या फिर broiled fish खातें हैं उनके खासकर उन हिस्सों में ग्रे मेटर वोल्यूम बेहतर स्तर पर बना रहता है जो हिस्से खासकर अल्ज़ाइमर्स रोग के खतरे को झेलते है .इनके दिमाग के MRI उतारने से यही इल्म हुआ है .
यह ऐसा पहला विस्तृत अध्ययन है जिसमे MIld cognitive impairment (MCI)की संभावना के क्षीण पड़ने और मच्छी के सेवन का एक अंतर सम्बन्ध स्थापित हुआ है .यह कहना है अध्ययन के अगुवा Cyrus Raji का .आप University of Pittsburgh Medical centre से सम्बद्ध हैं . अन्वेषणों से पुष्ट हुआ है साप्ताहिक तौर पर मच्छी के सेवन और दिमाग के कई प्रमुख हिस्सों में ग्रे मेटर वोल्युम्स का परस्पर रिश्ता है .
(Greater hippocampal ,posterior cingulated and orbital frontal volumes in relation to fish consumption were recorded ,"Raji added .).
नतीजों से यह भी पता चला जिन लोगों ने चूल्हे की आंच में सिंकी हुई मच्छी ज्यादा बार खाई थी उनमे संग्यान्ताम्क बोध सम्बन्धी कुशलता और क्षमता ज्यादा है.
गौर तलब है MCI में भी संज्ञानात्मक बोध सम्बन्धी ह्रास देखने को मिलता है हालाकि यह अल्ज़ाइमर्स के मामलों में मौजूद ह्रास से कमतर रहता है .MCI की चपेट में जो लोग आजातें हैं वे अल्ज़ाइमर्स से भी बच नहीं पातें हैं .
ग्रे मेटर का दिमागी स्वास्थ्य से सीधा रिश्ता है निर्णायक सिद्ध होता है ग्रे मेटर वोल्यूम .इसके उच्चतर स्तर का मतलब दिमागी स्वास्थ्य का कायम रहना है .इसके आयतन में कमी का मतलब है दिमागी कोशायें सिकुड़ रही हैं .
अध्ययन के लिए संज्ञानात्मक रूप से सामान्य अवस्था वाले (cognitively normal)२६० लोगों का चयन किया गया था .इनकी मच्छी की कुल खपत की पड़ताल की गई .इनमे से १६३ मरीज़ ऐसे थे जो हफ्ते में एक मर्तबा मच्छी खाते थे .लेकिन इनमे ज्यादातर ऐसे थे जो सप्ताह में एक से चार मर्तबा मच्छी का सेवन करते थे .हरेक मरीज़ का 3-D Volumetric MRI brain का लिया गया था .नतीजे आखिरी इन्हीं पर आधारित थे .
ram ram bhai !ram ram bhai!ram ram bhai!
December2,2011 .
खून खराबे से भरपूर हिंसक विडियोगेम्स ब्रेन डेमेज की वजह बनतें हैं
खून खराबे से भरपूर हिंसक विडियोगेम्स ब्रेन डेमेज की वजह बनतें हैं .एक अध्ययन के अनुसार हिंसा से भरपूर ऐसे वीडियो खेल नौनिहालों के सहज व्यवहार ,याददाश्त ,संवेग और रागात्मकता तथा सीखने की क्षमता को भी भोथरा बनाते हैं .
'Violent videogames damage brain'.It can Affect children's Behaviour ,Memory ,Emotion and Learning Power :Study/THE TIMES OF INDIA ,MUMBAI ,DECEMBER 1,2011,/P19
क्या आपका बच्चा ऐसे वीडियो खेल खेल रहा है जिनमे , वह घंटों या तो दैत्यों की बन्दूक से गोली दाग के ह्त्या करता रहता है या फिर बुरे चरित्रों को कत्ल करता रहता है ?यदि ऐसा है तो ये खेल दिमाग के उस हिस्से को असर ग्रस्त कर रहे होंगें जो नौनिहालों के व्यवहार के निर्धारण में एहम भूमिका में रहते हैं .याददाश्त के पनपने आवेगों संवेगों और सीखने की प्रक्रिया में भी खासा दखल रखते हैं .
भारत के सन्दर्भ इस अध्ययन के नतीजे इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं क्योंकि यहाँ ऐसे खेलों का तकरीबन वर्तमान में ही ९०० सौ करोड़ रूपये का व्यापार है जिसके ५३%बढ़कर जल्दी ही २१२५ करोड़ रूपये का हो जाने का अनुमान है .
अध्ययन में जब उन युवजनों के ब्रेन का functional magnetic resonance imaging से विश्लेषण किया गया जो एक हफ्ते तक लगातार ऐसे ही खेलों में दीर्घावधि तक रोज़ मशगूल रहे थे तब पता चला इनके दिमाग का वह हिस्सा खासा प्रभावित हुआ है जिसका सम्बन्ध संज्ञानात्मक प्रकार्य, बोध सम्बन्धी कार्यों से पड़ता है तथा जो हमारे आवेगों और संवेगों को काबू रखते हैं .
रेडियोलोजिकल सोसायटी ऑफ़ नोर्थ अमरीका की वार्षिक बैठक में हाल ही में इस अध्ययन से निकले ये नतीजे विवेचना के लिए रखे गए थे . बेशक बरसों से इस बात को लेकर एक राय नहीं थी कि क्या वायोलेंट विडियोगेम्स उपयोग करता को नुकसान पहुंचाते हैं .इनके दीर्घावधि नकारात्मक प्रभावों को लेकर उल्लेखनीय साक्ष्य भी नहीं जुटाए जा सके थे .
इस अध्ययन के ज़रिये पहली मर्तबा यह तथ्य सामने आया है कि अव्यवस्थित बेतरतीब चुने गए ऐसे युवजनों के दिमाग के कुछ अग्रइलाकों में ,फ्रन्टल रीजन्स में अपने घरों में एक हफता हिंसक विडियोगेम्स खेलने के बाद कमतर सक्रीयता दर्ज़ हुई .यही कहना है Yang Wang का .आप रेडियोलोजी और इमेजिंग साइंसिज़ विभाग ,इंडियाना स्कूल ऑफ़ मेडिसन ,इंडियानापोलिस में असिस्टेंट रिसर्च प्रोफ़ेसर हैं .बकौल आपके दिमाग के यही वह हिस्से हैं इलाके हैं जो हमारे आक्रामक व्यवहार और संवेगों को काबू में रखतें हैं .
अध्ययन के लिए बे -तरतीब क्रम में १८-२९साला ऐसे युवजनों का चयन किया गया जिन्होनें ऐसे विडियोगेम्स नाममात्र को ही पूर्व में खेले थे इन्हें ११ -११ के दो समूहों में रखा गया .पता चला हिंसक वीडियोगेम का दिमाग के काम करने के ढंग पर दीर्घावधि असर पड़ता है ..

12 टिप्‍पणियां:

"जाटदेवता" संदीप पवाँर ने कहा…

चाहे जो हो जाये मांस के पास नहीं फ़टकना चाहिए।

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

दुखदायी चीजें भूलना ही अच्छा।

डॉ टी एस दराल ने कहा…

मच्छी खाने वालों के लिए तो शुभ समाचार है भाई जी ।

SM ने कहा…

yes eating habits affect us
sometimes bad or sometimes good benefits.

रविकर ने कहा…

बढ़िया प्रस्तुति ||

बधाई ||

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ ने कहा…

बहुत सुन्दर वाह!

मनोज कुमार ने कहा…

इस विषय पर कम ही ज्ञान था।

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

इस व्यापार के चलते बचपन बहुत कुछ भोग रहा है..... बढ़िया पोस्ट

Kunwar Kusumesh ने कहा…

शाकाहारी क्या करें ?

डॅा वेदप्रकाश श्योराण ने कहा…

good

सुरेन्द्र सिंह " झंझट " ने कहा…

जानकारीपूर्ण लेख...

Maheshwari kaneri ने कहा…

जानकारी देती. बढ़िया प्रस्तुति ||