बुधवार, 7 दिसंबर 2011

नाश्ते के लिए अब वक्त कहाँ ?

अब लोगों के पास उतना भी वक्त नहीं है कि अपने परिवार के साथ सुकून से नाश्ता भी कर सकें.एक अध्ययन के अनुसार ब्रितानी लोग किसी भी वीक डे पर लेदेके तीन मिनिट पंद्रह सेकिंड ही निकाल पातें हैं नाश्ते के लिए .सच बात तो यह है बा -मुश्किल आधे ब्रितानी ही नाश्ता कर पातें हैं .वक्त की तंगी कुछ इस तरह रहती है इनमे से भी कितने ही खड़े खड़े ही नाश्ता करतें हैं .कुछ सोते रह जाते हैं ,इनके लिए नाश्ते से बड़ी चीज़ है मुंह ढक के सोइए ,नाश्ता हो न हो सुबह की नींद पूरी हो .जबकि कुछ के लिए सुबह जल्दी काम पर पहुँचने का दवाब बना रहता है जो नाश्ते का वक्त भी ले उड़ता है .
अब केवल एक तिहाई ब्रितानी ही रसोई घर में नाश्ता करतें हैं .कुछ लोग इसे बेड रूम में ही गड़प लेते हैं तो कुछ स्नान घर में ही नाश्ता कर लेते हैं .इनमे से २२%साथ साथ ड्रेस अप भी होते रहते हैं .कुल नाश्ता करने वालों का पांचवां हिस्सा ले देकर आधा नाश्ता ही कर पाता है .समय की तंगी इतनी ज्यादा रहती है इनके लिए पूरे नाश्ते का वक्त नहीं बचता .एक तिहाई के अनुसार ये लोग अपना ब्रेकफास्ट बस या ट्रेन में ही कर पातें हैं .इस पूरी रपट को अखबार डेली मेल ने छापा है .
Brimingham के ५९%लोगों ने कहा उनका सारा समय टी वी और इंटरनेट ले उड़ता है ब्रेकफास्ट कहाँ से करें .लन्दन में ५७%तथा ब्रिस्टल में ५२ %लोगों ने नाश्ता न कर पाने की ये ही वजह बतलाई है .
सन्दर्भ -सामिग्री :-TIMES TRENDS/THE TIMES OF INDIA ,MUMBAI ,DEC6,2011,P17
RAM RAM BHAI !RAM RAM BHAI !
दिल की हिफाज़त के लिए तैयार किए गए 'seleno -sugar compounds'.
यकीन मानिए अब दिल की दुरुस्ती तंदरुस्ती के लिए एक चम्मच शक्कर ही काफी रहेगी . साइंसदानों ने एक ऐसी कृत्रिम मिठास (sweetener)सुगर तैयार कर ली है जो हार्ट फेलियोर से बचाव करेगी .दिल को इस काबिल बनाए रहेगी की वह पूरा और पर्याप्त मात्रा में रक्त उलीचे .
इसे सुगर और सेलेनों(sugar and seleno) का यौगिक, संयुक्त रूप कहा जा रहा है जो प्रतिक्रियात्मक अम्लों(Reactive acids) से दिल कोहोने वाली नुकसानी(Damage) को मुल्तवी रखेगा .इसे तैयार किया है अंतर -राष्ट्रीय साइंसदानों की एक ख्यात टीम ने जिसके बाबत पूरी रपट रसायन विज्ञानके एक नाम चीन प्रपत्र 'Chemical communications'में प्रकाशित हुई है .
ये seleno -sugar के यौगिक ऐसे सफाई कर्मचारी का काम अंजाम देंगे जो Hypohalous acids का सफाया कर देंगे .ये तेज़ तर्रार बेहद क्रियात्मक Highly reactiveतेजाबों का एक ऐसा समूह है जो गलत समय पर गलत अवांछित जगह पर पैदा होकर ऊतकों को नुकसान पहुंचा सकतें हैं .खासकर जब इनका उत्पादनस्तर ज्यादा रहे तब यह तबाही और भी ज्यादा होती है .
एक एंजाइम होता है जो हाइपोएसिद्स के निर्माण को प्रेरित करता है .इस एंजाइम का ऊंचे स्तर पर होना भविष्य में होने वाले हृद रोगों की और साफ़ इशारा है प्रागुक्ति है भविष्य कथन है .यही कहना है प्रोफ़ेसर Carl Schiesser का जो इस अध्ययन के अगुवा हैं .आप मेलबोर्न विश्वविद्यालय से सम्बद्ध हैं .
इनके नेतृत्व में काम करने वाली टीम ने अपने इस अध्ययन में पता लगाया है कि सेलेनों सुगर कंपाउंड्स की मौजूदगी में हाईपोहेलास अम्ल मानवीय प्लाज्मा में मौजूद महत्वपूर्ण अमीनो अम्लों को कोई नुकसान नहीं पहुंचा पातें हैं .यही कुंजी है दिल की बीमारियों को बढ़ने से रोके रहने की .
साइंसदान अब इन यौगिकों का आदर्श रूप गढ़ रहें हैं आइन्दा औषधवैज्ञानिक स्तेमाल के लिए .ये नए रसायन भविष्य में हमारे दिल को चुस्त दुरुस्त तंदरुस्त बनाए रहेंगे .ऐसी उम्मीद रखी जा सकती है .
Ram Ram Bhai !
ram ram bhai

4C,Anuradha ,NOFRA,COLABA,MUMBAI-400-005,DEC7,2011
भविष्य वेत्ता भविष्य निर्धारक सुपर -कंप्यूटर .
जल्दी ही बनेगा एक ऐसा सुपरकंप्यूटर जो न सिर्फ भविष्य को देख सकेगा उसकी नियति भी तय कर सकेगा .आप चाहे तो इसे भविष्य वेत्ता और भविष्य निर्धारक भी कह सकतें हैं .
(Deep Thought :Soon a supercomputer that can predict (and also control)the future/Mumbai Mirror/SCI-TECh/Dec6,2011P22).
योरोपीय यूनियन ने कमर कसली है फैसला कर लिया है पूरी तैयारी करली है एक स्कीम को अनुदान मुहैया करवाने की जिसके तहत एक ऐसी बिरली कंप्यूटर प्रणाली विकसित की जाएगी जो न सिर्फ बीमारियों के फैलने की पहले से इत्तला दे सकेगी रोकथाम के उपाय भी बतलाएगी .आर्थिक मंदी की प्रागुक्ति कर सकेगी .भले इस पर व्यय आने वाली राशि वर्तमान में ९०० मिलियन पोंड बतलाई जा रही है .
इसे LIVING EARTH SIMULATOR PROJECT(LES)कहा जा रहा है .दुनिया भर के चुनिन्दा साइंसदान इसकी हिमायत कर रहें हैं यह हर उपलब्ध चीज़, प्रणाली की नक़ल उतारने को उद्यत रहेगी .वैसी ही स्थितियां पुनर -रचित करेगी जो हमारे पृथ्वी नामक इस ग्रह पर कहीं भी मौजूद हैं .फिर चाहें वह त्वीट्स हो या सरकारी गैर -सरकारी निगमीय आंकड़े हों .इनका संग्रहण और विश्लेह्सन कर यह सामाजिक रवायत चलन सोशल ट्रेंड्स तथा आइन्दा आने वाली संभावित आर्थिक मंदी के बारे में आगाह कर सकेगी .
इसके लिए आलमी स्तर पर उपलब्ध सबसे ज्यादा शक्तिशाली और तेज़ी से काम को अंजाम देने वाले कम्प्यूटरों का स्तेमाल किया जाएगा .इस प्रणाली को सही अर्थों में हमारे ग्रह का स्नायुविक तंत्र" Nervous system for the planet " कहा जा रहा है .इसे वर्तमान बेकार या नाकारा हो चुके आउट देतिद (Out dated economic models)अर्थ शाश्त्रीय निदर्शों का स्थानापन्न ,कारगर विकल्प कहा जा रहा है .
केन्द्रीय विचार व्यापक स्रोतों से ताज़ा ताज़ा सूचना Live information जुटा कर उसका विश्लेषण करना है .यह सब इत्तला अखबार डेली मेल को मुहैया करवाई है Swiss Federal Institute of Technology ,Zurich के Dirk Helbing ने .इसे सन्डे टाइम्स ने भी प्रकाशित किया है .
आज हमारे सामने अनेक समस्याएं मौजूद हैं -सामाजिक और आर्थिक अनिश्चितताएं हैं अस्थिरताएं हैं ,लडाइयां हैं फसाद हैं ,बीमारियों का फैलाव है ,दह्श्द गर्दी,इन्तहा पसंदगी है,आतंकवाद है आलमी स्तर पर . .इनमे से कितनी ही मानवीय व्यवहार से जुडी है ,उसकी उपज हैं लेकिन समाज के चलने काम करने तथा आर्थिक ढांचों के काम करने की उतनी समझ अभी हमें नहीं है .यही कहना है Helbing का .इस सबका समाधान भविष्य की इसी प्रणाली के पास सुरक्षित है .इति .

10 टिप्‍पणियां:

डॉ टी एस दराल ने कहा…

सही कह रहे हैं आप ।
रोज तो भागते भागते नाश्ता करते हैं , सन्डे के दिन करते ही नहीं क्योंकि ब्रंच हो जाता है ।

G.N.SHAW ने कहा…

भाई साहब एक दम ठीक - ठीक कही है आपने ! जमाना बदल रहा है और हम दौड़ाने में व्यस्त ! पीछे कौन है किसी को पता नहीं ! साथ में ह्रदय रोग से दुरुस्त और राशी फल का अदभुत जरिया भी कमल का है !

यादें....ashok saluja . ने कहा…

वीरुभाई राम-राम ,
१. ब्रितानी लोग काम ही किस लिए करते हैं ?

यादें....ashok saluja . ने कहा…

२. बात अधूरी रह गई वीरू भाई हाथ की ऊँगली धोखा दे गई ,गलती से फिसल गई |खैर ..ये दिल की सुगर कहाँ मिलेगी .हा हा हा ..
देव साहब को तगड़ी श्रद्धांजलिदी भाई साहब आपने और सटीक.... अपनी बात को वो पूरा कर गए ..उनका फलसफ़ा अपना फलसफ़ा ...जो भी प्यार से मिला हम उसी के हो लिए ...मौत के साथ भी हो लिए प्यार से ....ठीक कहा आपने ,हमारा अतीत चला गया ....

यादें....ashok saluja . ने कहा…

वीरू भाई टिप्पणी गायब हो रही है ...उसे स्पैम से निकालें ऐसे ...

आजकल टिप्पणी गायब होने का चलन सा चल
रहा है ....कोई दिल से टिप्पणी दे और वो पोस्ट
पर प्रकाशित न हो तो टिप्पणी करने वाले और
टिप्पणी न पाने वाले को समान दुःख होता है ...
इस कष्ट का निवारण बताया मुझे ......
सरदार साहब पाबला जी ने जो मैं यहाँ आप के
साथ बाँट कर उसका लिंक दे रहा हूँ ....
http://www.blogmanch.com/viewtopic.php?f=7&t=25
धन्यवाद के हकदार : पाबला जी |

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

हम तो नहा धो के सुकून से नाश्ता करते हैं।

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

Sahmat hun.... Bhagdaud me bahut kuchh chhoot raha hai.... Nashta bhi ...Sehat bhi...

रविकर ने कहा…

शुक्रवारीय चर्चा-मंच पर है यह उत्तम प्रस्तुति ||

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ ने कहा…

सही कह रहे हैं आप

Jyoti Mishra ने कहा…

Reality unleashed...
A great message conveyed with sarcasm !!

Awesome read !!!