गुरुवार, 30 अगस्त 2012

लम्पटता के मानी क्या हैं ?

लम्पटता के मानी क्या हैं ?

लम्पटता के मानी क्या हैं ?






यूं अखबार वालों की  स्वतंत्र सत्ता नहीं होती है.अखबार श्रेष्ठ नहीं होता है औरों से ,अन्य माध्यमों से ,अखबार की एक नियत बंधी बंधाई भाषा होती है उसी के तहत काम करना होता है हमारे मित्र बाबू लाल शर्मा (पूर्व सम्पादक ,माया ,दैनिक भास्कर ,अब स्वर्गीय ) बतलाया करते थे वीरू भाई कुल २२,००० शब्द होतें हैं जिनके गिर्द अखबार छपता है .अखबार की एक व्यावहारिक सी भाषा होती है जिसमें कोई ताजगी नहीं होती .








सन्दर्भ :
लंपटक्या हममें से अधिकांश लंपट हैं???
आज अख़बार में छपे एक रपट पर नज़र पड़ी, जिसका शीर्षक है –
ब्लॉग की दुनिया में लंपटों की कमी नहीं

3 टिप्‍पणियां:

मनोज कुमार ने कहा…

आपने सोच को एक नई दिशा दी है। आभार आपका।

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

शब्दों की भी कमी है, विचारों की भी..

dheerendra ने कहा…

आपने लम्पट शब्द को नई दिशा देकर सोचने के लिए
लिए मजबूर कर दिया,,,,

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