शनिवार, 4 अगस्त 2012

आखिर डाई -जेस्टिव-हेल्थ के मानी क्या हैं ?

अपनी पाचन सम्बन्धी सेहत का जायजा लीजिए ,मिलिए अपने काइरोप्रेक्टर से  रीढ़ की आवधिक जांच  के लिए

A healthy spine can improve your life -see your chiropractor for periodic spianl checkups .



आखिर  डाई -जेस्टिव-हेल्थ के मानी क्या हैं ?

आपका पाचन तंत्र 

आपका पाचन तंत्र एक लम्बी नाल है जो आपके मुख से शुरु होकर गुदा(एनस,anus)तक जाती है .इसका एकल काम है खाने को सरलीकृत रूपों में  तोड़कर उससे ऊर्जा और पुष्टिकर तत्व प्राप्त करना . 
इस पाचन तंत्र के मुख्य हिस्से हैं :
(१)इसाफगस(esophagus/oesophagaus)या वह नली जो भोजन को मुख से आमाशय या उदर ,पेट तक पहुंचाती है भोजन की नली या भोजन नाल 

(२)स्टामक  यानी उदर या आमाशय 

(३)अंतड़ियां (intestines ) 

(4)अन्य अंग पाचन के इसी आंत्र के संशोधित रूप हैं .

Your  Esophagaus & Stomach 

जब  आप  खाने को चबाकर उसका चर्वण कर छोटे छोटे टुकड़ों में ले आतें हैं तब यह इसी भोजन नाल से होकर नीचे की ओर   गुज़रता है .(esophagus is Latin for "I swallow")  .आमाशय तक पहुंचता है जहां यह सबसे ताकतवर समझे जाने वाले कुदरती तेज़ाब हाइड्रो -क्लोरिक तेज़ाब में घुल जाता है .

यकीन मानिए यह इतना तेज़ तर्रार रासायनिक रूप से सक्रिय तेज़ाब या अम्ल है जो यदि आमाशय से बाहर आ जाए तो हमारे दिल ,फेफड़ों ,यकृत (लिवर)शिराओं और धमनियों तथा हर और अंग को घुला ले .आप खुद का ही ज़िंदा भक्षण कर लें ऐसा होने पर .

एक गाढा अस्तर/श्लेष्मा /बलगम  की गाढ़ी परत (थिक लेयर ऑफ़ म्यूकस )आमाशय और पेट की अंदरूनी दीवार को ढके रहती है .वही शेष अंगों को इस अम्ल से बचाए रहता है . 

Dyspepsia & Ulcers

क्रोनिक "स्टमक एक " (बने रहने वाला पेट दर्द /उदर शूल )जिसे नर्वस स्टमक भी कह देतें हैं ,डिस्पेप्सिया भी पेट की एक आम शिकायत ,स्टमक कंडीशन है .
दूसरी आम समस्या है अल्सर .

क्या वजह बनती है अल्सर की 

जब उल्लेखित और अन्य  शक्तिशाली तमाम तेज़ाब,तथा पाचक रस मिलकर पेट को ही खाने लगतें हैं ,अंतड़ियों को निशाना बनाने लगतें हैं तब शिकयात होती है पीडादायक स्टमक कंडीशन अल्सर की .

कब और क्यों होता है हार्टबर्न 

अपच के कारण छाती में होने वाली जलन ,अम्ल शूल या हार्ट बर्न कहलाती है .

It is a pain that feels like something burning in your chest and that you get when your stomach cannot deal with a particular food .

जब कोई खाद्य पदार्थ आपको माफिक नहीं आता है तब यह भोजन नली से नीचे न खिसककर ऊपर मुख की ओर ही लौटने लगता है .आपके मुंह में भर आता है खट्टा पानी ,बिना पचे भोजन के कण .सीने में तब जलन   होती है गले में मिर्ची सी लगती है .

गैस-ट्रा-इटीस(Gastritis)

आमाशय शोथ ,उदर की दीवारों की सोजिश /संक्रमण उदर शोथ कहलाती है .

Gastritis is a term used to describe inflammation of the stomach walls.

Pyloric stenosis is a tightening or shrinking of the pyloric valve that connects the duodenum(छोटी आंत का अगला भाग ,ग्रहणी) and the stomach. छोटी आंत के अग्र भाग को आमाशय से जोड़ता है पाइलोरिक वाल्व .

The pyloric valve or sphincter regulates the flow of chyme out of the stomach into the duodenum.
Chyme is a thick fluid mass of partially digested food and gastric secretions passed from the stomach to the small intestine.

आमाशय में गैर -संक्रमण कारी(निरापद या benign)  और  संक्रमण शील (malignant tumors)ऊतकों की असामान्य  वृद्धि से पैदा  गांठें भी हो सकतीं हैं .रोग -आक्रान्त  शरीर के किसी भाग में ही पैदा होता है अर्बुद या ट्यूमर .जिसे आम भाषा में कह देतें हैं कैंसर गांठ /जड़ वाला फोड़ा .

The Medical Approach

पाचन  सम्बन्धी परेशानियां रोगात्मक स्थितयां ठीक से समझी नहीं जा सकीं हैं .उद्धहरण देखिए एक नामचीन major medical text से 

The major symptoms of (digestive )tract disease are dysphagia(निगलने में दिक्कत ),heartburn ,abdominal pain ,bleeding ,nausea and vomiting ,dai -rrhea ,and constipation .All symptoms arise from disordered function ,but our knowledge of normal alimentary tract function (पोषण /आहार क्षेत्र का काम करने का तरीका ,प्रकार्य ) is so incomplete .

ज़ाहिर  है पाचन सम्बन्धी क्षेत्र की गडबडियों की दिक्कतों यथा अम्ल शूल ,उदर शूल ,रक्तस्राव ,उबकाई आना ,कै या मिचली आना ,अतिसार ,कब्जी आदि का इल्म तो है हमें .यह भी पता है कि यह सब पाचन तंत्र के ठीक से काम न कर पाने की वजह से ही हो रहा है .लेकिन पोषण या आहार नाल और पोषण सम्बन्धी क्षेत्र के काम करने के पूरे रंग ढंग से हम ठीक से वाकिफ नहीं हैं .

अंग्रेजी दवाओं से लक्षणों का शमन कर दिया जाता है आधुनिक अंग्रेजी चिकित्सा एलोपैथी के तहत दी गई मेडिकल  केयर से ,लेकिन मात्र लक्षणों का इलाज़ करने से उनके शमित हो जाने मात्र से आप रोग मुक्त हो नहीं पातें हैं .विपरीत परिणाम अंग्रेजी दवाओं के और भुगतने पडतें हैं .सालों  साल आदमी एक ही नुसखा लेकर खाता रहता है .यहाँ (इंडिया में )तो बिना नुस्खे के भी दवाएं मिल जातीं हैं मेडिकल स्टोर से ही उसके बताये अनुसार लोग दवा लेकर खाते रहतें हैं सालों साल .

क्यों न पहले अंग्रेजी दवा दारु चिकित्सा व्यवस्था का मोह छोड़ प्राकृत चिकित्सा व्यवस्थाओं को ,natural forms of heath care को अपनाया जाए .

The Chiropractic Approach 

Every organ in your digestive system -mouth ,tongue ,throat ,esophagus ,pyloric valve ,stomach ,intestines ,glands ,pancreas and others -needs a healthy nerve supply from your spine .

ज़ाहिर  है पाचन तंत्र का कोई भी हिस्सा प्रेशर में नहीं आना चाहिए , दवाब आने पर  हर अंग की नर्व तक आने वाला सम्प्रेषण जो स्पाइन से चलता है ऐसे में ठप्प हो जाता है .काइरो-प्रेक्टर का काम इस प्रेशर को हटाना है असर ग्रस्त अंग की नसों पर से दवाब हटाना है .

The chiropractor analyses your spinal column for the vertebral subluxation complex ,a condition that damages nerves and can interfere with proper communication between your brain and internal organs , including those of the digestive system .The vertebral subluxation complex can interfere with your body function and lower your resistance to disease.  

Correction of The Subluxation  

With a spinal adjustment your doctor of chiropractic will correct or relieve your vertebral subluxation complex .Remember ,the chiropractic purpose is to relieve spinal pressure on all your nerves ,including those that go to the digestive system .

  

Water 

  लोग पर्याप्त  मात्रा में प्रतिदिन पानी भी नहीं पीतें हैं .बढती उम्र के साथ पानी की जगह  सोडा पेय ,चाय कोफी ,कहवा ,भाँति- भाँति के जूस को तरजीह देने लगतें हैं इन पेयों से प्यास तो इनकी भले बुझ जाती है लेकिन शरीर को ज़रूरी पानी और आवेश (चार्जिंग )नहीं मिल पाती .निर्जलीकृत रहतें हैं बहुलांश में बालिग़ समझे बूझे जाने वाले लोग .(आप चेक करें कितना पानी पीते हैं आप दिन भर में .).और इसीलिए कई प्रकार की सेहत सम्बन्धी समस्याओं से जुड़ जातें हैं . 
DR.F.Batmanghelidj ,MD., ने जब अपने कितने ही मरीजों को प्रति घंटे के हिसाब से रोज़ हर घंटा  ८ ओंज पानी पीते रहने के निर्देश दिए और उन्हें बा -कायदा ऐसा करते रहने के लिए कहा तब इनकी कई पाचन सम्बन्धी समस्याओं का हल निकल आया .इनमें अल्सर भी शामिल था ,कब्जी भी ,निगलने में दिक्कत (डिसपेप्सिया ),तथा Colitis जैसी समस्याएं भी थीं .

Colitis :Colitis is inflammation of colon ,characterized by lower -bowel spasms and upper abdominal  cramps.

आम भाषा में इसे बड़ी आंत की सूजन कह देते हैं आंत्र सोजिश को . कोलन  हालाकि बड़ी आंत का मुख्य और सबसे लम्बा भाग है लेकिन इसमें रेक्टम शामिल नहीं है .इसे इसीलिए बृहद -अंत्र भी कह दिया जाता है .

The Spine & Digestion

Over a century of chiropractic clinical observations have shown that correction of vertebral subluxations can have a dramatic beneficial effect on some people with a wide variety of problems with their alimentary canal ,including :dysphagia (difficulty swallowing ),"abdominal nausea ,"digestive pains ,"pseudoulcers ,"dyspepsia and epigastric distress ,"dudenal ulcers ,stomach ulcers ,gastritis ,colitis  and spastic constipation.

गत शती के  नैदानिक प्रेक्षणों से यह बात पुष्ट हुई है ,रीढ़ की हड्डियों के संरेखण में आये विकार को दूर कर देने से पोषण नाल से सम्बंधित अनेक विकारों और समस्याओं से अनेक लोगों को फायदा पहुंचा है .चाहे वह फिर निगलने में दिक्कत हो या बृहद अंत्र का अल्सर या पाचन तंत्र से ताल्लुक रखने वाले दूसरे हिस्सों की समस्याएं रहीं हों .

In Conclusion 

The digestive system can weaken ,work improperly and fall prey to a multitude of diseases .The job of the chiropractor is to ensure that the stomach and the rest of the digestive system (as well as all the other organs of the body) are receiving an unobstructed nerve supply .This promotes body harmony ,enhanced ability to cope with stress and improved resistance to disease.

सारांश यह है पाचन तंत्र अनेक समस्याओं का शिकार हो सकता है काइरोप्रेक्टर का असल काम यह देखना है इस तंत्र के जितने भी हिस्सें हैं रीढ़ की हड्डियों से आने वाली नसों के ज़रिये वहां तक निर्बाध सम्प्रेषण बना हुआ है .इस सम्प्रेषण के ठप होने से ही सारी पाचन सम्बन्धी समस्याएं ताल्लुक रखतीं हैं .यही स्पाइनल सब -लकशेशन -कोम्प्लेक्स है .इससे काया को मुक्त करना ज़रूरी है नीरोगी काया के लिए .


Remeber , if the nerves are impinged upon by vertrebral subluxations , no amount of drugs will relieve the pressure . A chiropractic spinal adjustment is what your body needs.

इस सम्प्रेषण के बाधित होने पर नसों के दबे रह जाने पर तुर्कमान भी आपको ठीक नहीं कर सकता भले रोग शमन कर दे ,रोग के लक्षणों को कुछ समय के लिए मुल्तवी करा दे .

Postscript

  You can always benefit from a healthy spine no matter what disease or condition you have .  It is as   important for healing as proper nutrition.A   

   doctor of chiropractic will remove your vertebral subluxation complex to help you better tune in to your natural innate healing ability (your internal healer )for better physical ,mental and emotional healing .That is the goal of your doctor of chiropractic : to strengthen your inner healing ability . Are you ,your family or your friends carrying the vertebral subluxation complex in your spines ? Only a chiropractic spinal checkup can tell.

A healthy spine can improve your life -see your chiropractor for periodic spinal checkups.
बेशक भारत में हड्डियां सेट करने वाले माहिर मौजूद हैं .नगर नगर गाँव गाँव लेकिन यहाँ यह विद्या Chiropractic के विधिवत अध्ययन अध्यापन और  शोध की कोई व्यवस्था नहीं है .इतने बड़े देश का इस परम्परा गत विद्या के विकास की ओर ध्यान न जाना खेद का विषय है . 

जबकि  पोषण की तरह ही नसों पे पड़ने वाले दाब को हटाना ज़रूरी है जो रीढ़ से काया के अंगों का सम्प्रेषण काट देता है और काया की खुद से  खुद -बा -खुद ठीक होने, हील होने की प्रक्रिया निलंबित हो जाती है .हमारी काया एक स्वयं स्वास्थ्य लाभ प्राप्त करने वाला जैविक आवयविक संस्थान है .इसमें कोई रुकावट न आने पावे इस एवज हर साल एक उम्र के बाद अपनी  व्यापक हृदय जांच में रीढ़ की जांच को भी शरीक करें .                                                 






10 टिप्‍पणियां:

Arvind Mishra ने कहा…

बहुत ही नयी जानकारियाँ मिलीं और आश्चर्यजनक -पेट से रीढ़ का रिश्ता

DR. ANWER JAMAL ने कहा…

कबीरा तेरी झोंपड़ी ,गल -कटियन के पास ,करेंगे सो भरेंगे ,तू क्यों भयो उदास .

veerubhai ने कहा…

भाई साहब पेट ही नहीं हमारी पूरी काया की सेहत को रीढ़ ही संभाले है कृपया पढ़ें -
सोमवार, 30 जुलाई 2012
काईराप्रेक्टिक संक्षिप्त इतिहास और वर्तमान स्वरूप
काईराप्रेक्टिक संक्षिप्त इतिहास और वर्तमान स्वरूप

काईराप्रेक्टिक एक चिकित्सीय प्रणाली है .यह मेडिकल सिस्टम इस बुनियादी अवधारणा पर आधारित है कि रोगों की जड़ रीढ़ की हड्डी के हिस्सों का परस्पर अपना संरेखण, एलाइन -मेंट खोने का नतीजा है .यह कि बीमारियों की बुनियादी वजह अस्थियों का मिस -एलाइन -मेंट ही है .इस मिस -एलाइन -मेंट के होने पर स्नायु ठीक से काम नहीं करते ,स्नायुविक प्रकार्य ,प्रोपर नर्व फंक्शन बाधित हो जाता है .हम कह सकतें हैं -

Chiropractic is a health care profession concerned with daignosis ,treatment & prevention of dis -orders of the neuro -musculo -skeletal system and the effects of these disorders on general health.

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

अच्छी जानकारी मिली .... पानी ज्यादा पीना कितना ज़रूरी है यह आपकी इस पोस्ट ने अच्छे से समझाया है ...

डॉ टी एस दराल ने कहा…

पूरा जी आई टी सिस्टम ही पढ़ा दिया .
सुन्दर प्रस्तुति .
कुपाचन का सबसे आम लक्षण है --खट्टी डकारें आना -- जो एसिडिटी का लक्षण है . यही क्रॉनिक होकर गैसट्राईटिस या अल्सर में बदल सकता है .
खट्टी डकारें आने पर एक कप दूध पीने से आराम मिलता है . दो digene गोलियां चूसने से भी आराम मिलेगा .

दिगम्बर नासवा ने कहा…

पाचन तंत्र से जुडी अनेक बीमारियों और उनके निदान की उपयोगों जानकारी दी है आपने ... बहुत शुक्रिया ..
राम राम जी ..

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

एक जतन, सब मन रम जाया..

काजल कुमार Kajal Kumar ने कहा…

बाप रे, आप इतना गहरा अध्‍ययन कैसे कर लेते हैं

Dr Varsha Singh ने कहा…

NICE ONE....

HAPPY FRIENDSHIP DAY....!!!!!!!

Dr.NISHA MAHARANA ने कहा…

bahut acchi jankari...