शुक्रवार, 17 अगस्त 2012

गर्भावस्था में काइरोप्रेक्टिक चेक अप क्यों ?


गर्भावस्था में काइरोप्रेक्टिक चेक अप क्यों ?

Pregnancy -Chiropractic Bringing out the best in you .

Your Body ,Your Baby

Chiropractic if you are pregnant ?Absolutely!

यही  वह वक्त है गर्भ -काल ,जेस्टेशन पीरियड ४० सप्ताह का जब आपकी रीढ़ (स्पाइन )हर हाल vertebral subluxation complex (VSC) से विमुक्त रहनी चाहिए किसी भी विध किसी भी तरह का स्पाइनल मिसएलाइनमेंट या स्पाइनल और नर्वस स्ट्रेस इस अवधि में वांछित नहीं है .गर्भ वती महिला को ही इस चिकित्सा व्यवस्था ड्रग लेस हेल्थ केयर की सर्वाधिक ज़रुरत रहती है .

Chiropractic For Your Body & Your Baby

आपका काइरोप्रेक्टर (काइरोप्रेक्टिक चिकित्सा का माहिर )हर विज़िट में आपकी रीढ़ की हड्डियों के परस्पर संरेखण की जांच करता है ,कहीं संरेखण में त्रुटी या मिसएलाइनमेंट तो नहीं हैं ?जो VSC की वजह बन सकता है .

क्योंकि VSC स्नायुविक तंत्र को क्षति ग्रस्त कर सकतें हैं जो पूरे शरीर का नियंता है और इसीलिए इस तंत्र के असर ग्रस्त होने दवाब में आने से पूरा कायिक तंत्र उसके काम करने का ढर्रा प्रभावित होता है .काइरोप्रेक्टिक स्पाइनल एडजस्टमेंट (रीढ़ समायोजन )के ज़रिये काइरोप्रेक्टर काया को इनसे मुक्त करवा देता है .बाद इस समायोजन के स्पाइनल स्ट्रेस  से महिला वि -मुक्त हो जाती है .

VSC के न रहने होने पर ही काया ढर्रे पे आती है परिपूर्ण दक्षता से काम करने लगती है ,बीमारियों से मुकाबला करने की ताकत बढ़ जाती है .आप स्वस्थ महसूस करतें हैं .सबलक -सेसंस आपको बीमार रखतें हैं .इसीलिए इनका निवारण ज़रूरी हो जाता है .

यह ज़रुरत गर्भावस्था में और भी बढ़ जाती है ताकि गर्भ वती का शरीर प्रसव पीड़ा का मुकाबला कड़ाई से कर सके प्रसव से चस्पां सभी मुश्किलातों का हँसते झेलते सामना कर सके .

काइरोप्रेक्टिक देख भाल इस बात को सुनिश्चित करती है कि गर्भ्रिणी का प्रजनन तंत्र  तथा अन्य कायिक प्रणालियाँ पूरी मुस्तैदी से अपना काम करें .इस एवज रीढ़ स्तंभ (मेरु स्तंभ ,स्पाइनल कोलम )से इन अंगों तक तमाम तंत्रों तक तंत्रिका की आपूर्ति (सम्प्रेषण )निर्बाध होती  रहे ,.कहीं कोई इम्पिन्ज्मेंट न रहे ,कहीं से कोई भी नस ,स्नायु या तंत्रिका तंतु न दबा रह जाए .,यह ज़रूरी होता है .

तंत्रिका आपूर्ति में आई लेशमात्र बाधा भी गर्भवती  -गर्भस्थ शिशु तंत्र  के लिए मुसीबत खड़ी कर सकती है .


The slightest interference to the nerve supply could adversely affect the mother and the developing fetus.

Drugless Health Care 

एक  बड़ी वजह बन जाती है इस गर्भवती के लिए काइरोप्रेक्टिक केयर में जाने की क्योंकि  यहाँ दवाओं से इलाज़ नहीं है .बिना दवा दारु के है .आप जानतें हैं विकासशील भ्रूण को प्रेस्क्रिप्शन ड्रग जो डॉक्टरी नुसखे को दिखाके मिलतीं हैं और ओवर दी काउंटर ड्रग्स समान रूप से नुकसान पहुंचातीं हैं .पहुंचा सकतीं हैं हर हाल .सुरक्षित या निरापद दवा जैसी कोई शह नहीं है .सर्वोत्तम उपाय और चयन हैं गर्भ धारण कर चुकी महिला के लिए ऐसी वैकल्पिक चिकित्सा देख भाल जहां दवाओं का इस्तेमाल न किया जाता हो .

गर्भावस्था में भावी माँ द्वारा इस्तेमाल में ली गईं तकरीबन सभी दवाओं का सम्बन्ध  या तो फीटल डेमेज से जोड़ा गया है या गर्भस्थ के विकास सम्बन्धी विकारों से malformations से  .लगभग असंभव है किसी भी एक दवा का उल्लेख कर पाना जो जन्मजात विकृतियों  की वजह न बनती हो .लेबोरटरी एनिकल्स पर किये गए प्रयोगों आजमाइशों में इस तथ्य की पुष्टि हुई है .

It is virtually impossible to specify any drug that will not result  in  an increased frequency of congenital malformations when administered in a certain dose to a sufficiently large panel of different laboratory animals .No drugs should be prescribed during pregnancy without weighing the maternal need against the risk of fetal damage .Some common substances which can damage the mother and fetus are antibiotics (including tetracycline),aspirin ,alcohol ,cigarettes ,marijuana and cocaine.

Diagnostic Dangers 

Invasive diagnostic procedures also have the potential to cause damage and should be avioded if possible.(गर्भ जल का परीक्षण करवा गर्भस्थ के लिंग की जांच करवाने वाले नोट करें ).

ROBERT  MENDELSOHN   ,MD,CAUTIONS AGAINST THE USE OF MEDICAL TESTS ON HEALTHY PATIENTS :"STAY AWAY FROM X -RAYS ,DAIGNOSTIC ULTRASOUND ,DOCTOR -PRESCRIBED MEDICATION ,AND EVERY OTHER FORM OF DANGEROUS OBSTETRICAL  INTERVENTIONS." 

Pregnant Women Have Special Concerns

कितनी ही परेशानियां और दुश्चिंताएं घेरे रहतीं हैं गर्भवती को :

(१)गर्भपात से बचे रहना पूरे गर्भकाल में (चालीस हफ्तों तक ).
(२)मोर्निंग सिकनेस .सुबह सवेरे कितनी ही गर्भवती महिलाओं को मिचली आने की शिकायत गर्भावस्था की पहली तिमाही में बनी रहती है यही है मोर्निंग सिकनेस .
(३)शिशु का विकास सामान्य  तरीके से आगे बढ़ता रहे .
(४)कमर दर्द ,पैरों -टांगों रानों में दर्द .
(५)प्रसव को लेकर जिज्ञासाएं ,क्या सब कुछ ठीक ठाक हो जाएगा जैसे ख्यालों का बारहा आना .

क्या काइरोप्रेक्टिक इमदाद उनके खाबों ख्यालों से ये दुश्चिंताएं निकाल सकती है ?काइरोप्रेक्टिक मदद से बहुविध फायदा पहुंचता है गर्भवती और प्रसूता को ,प्रसव के समय भी मन ठीक रहे इसके इंतजाम किए जातें हैं .

काइरोप्रेक्टिक रीढ़ समायोजन ,स्पाइनल एडजस्टमेंट से सब कुछ संभल जाता है ठीक हो जाता है चित्त भी .मिचली भी थम जातीं हैं .गर्भ काल भी कामयाबी के साथ पूरा होता है प्रसव भी सामान्य होता है .पिछले सौ सालों का दर्ज़ काइरोप्रेक्टिक चिकित्सा इतिहास यही बतलाता है .बच्चा भी तंदरुस्त  माँ भी चुस्त दुरुस्त .

In the Journal of the American Osteopathic Association , a number of practitioners commented on the effectiveness of spinal care for pregnant women .The following are a small sampling of their remarks:

"For normal patients ,correction of vertebral subluxations definitely helps normal function and rehabilitation .Manipulation can be of great value in normalizing the body functions of women with problems of pregnancy such as toxemia."

"Manipulative therapy ......normalizes functions of the pituitary ,adrenal ,ovarian ,and placental systems ,including the craniosacral  respiratory mechanisms. This shortens the labor ....and lessens medication requirement .......Postpartum depression is a rarity in  patients receiving ...manipulative therapy."

Postpartum depression /Postnatal depression

Occuring in or relating to the period immediately after child birth .

उत्तर प्रसव अवसाद ग्रस्त होना प्रसव के फ़ौरन बाद या गर्भ काल में ही अवसाद की चपेट में आजाना" पोस्ट -पार्ट -अम- डिप्रेशन" है .  

Spinal Adjutsments 

'"Wellness care is administering spinal adjustments to optimize the biomechanical and  nervous function ,therefore allowing the highest level of neurophysiological integartion ."

गर्भावस्था   में महिला का कायांतरण सा हो जाता है अनेक कायिक परिवर्तन होतें हैं ,भौतिक भी और रासायनिक भी .लगातार न सिर्फ उसका कायिक गुरुत्व केंद्र तबदील होता है उसका मेरु दंड का ढांचा ,संरचना लगातार स्पाइन की बदलती है .लचीला होजाता यह ढांचा क्योंकि महिला के तौल में भी तो इस दरमियान लगातार बदली होती रहती है .हारमोनों में भी बदलाव आता है .यही बदलाव    

पेल्विस के लिगामेंट्स (श्रोणी क्षेत्र के अस्थि बंधों ,उन ऊतकों में जो हड्डियों को परस्पर जोड़तें हैं )में भी बदलाव लाता  है .ये अस्थि बंध शिथिल पड़ जातें हैं .यह तैयारी होती है प्रसव के दौरान स्ट्रेचिंग की जो इन अस्थि बंधों की होती है .

ऐसे में पहले से ही हिली हुई अस्थिर रीढ़ में समस्याओं के उग्र होने की संभावना बढ़ ज़ाती है .

Chiropractic care is especially needed during pregnancy because of the many physical and chemical changes the woman's body is going through .Not only her centre of gravity changing because of the added physical weight she is carrying ,but her spinal structure becomes more flexible due to hormonal changes which relax the ligaments in the pelvis ,preparing them for stretching during child birth .In an already unstable spine ,that could aggravate spinal problems.

Webster Breech Technique 

One of the latest developments in chiropractic  prenatal  care has been a method of correcting breech presentations in which the baby isn't positioned properly for birth.Developed by the late Larry Webster ,D.C.,

of the International Chiropractic Pediatric Association ,chiropracters are able to release stress on the pregnant woman's pelvis and cause relaxation to the uterus so the baby will turn naturally .Called the Webster Breech technique ,Dr .Webster stated that it is "up to 94% successful in turning babies in utero so they can be delivered easily."

कई मर्तबा गर्भस्थ शिशु जन्म पूर्व की सही स्थिति में प्रसव हेतु गर्भाशय में अवस्थित नहीं होता है ऐसे में श्रोणी क्षेत्र दवाब में आजाता है .ऐसे में इस दवाब को हटाकर काइरोप्रेक्टर प्रसव पूर्व की सटीक स्थिति में गर्भस्थ को एक ख़ास काइरोप्रेक्टिक तकनीक से ले आतें हैं .इसे विख्यात काइरोप्रेक्टर लारी वेबस्टर ड़ी .सी .ने विकसित किया था आप अंतर -राष्ट्रीय काइरोप्रेक्टिक शिशु संघ से सम्बद्ध विख्यात काइरोप्रेक्टिक चिकित्सा के माहिर चिकित्सक थे .इस प्रकार काइरोप्रेक्टिक चिकित्सा व्यवस्था में गर्भ वती महिला की तकरीबन हर मुसीबत का समाधान उपलब्ध है .आपके तौल की ही तरह गर्भ काल में स्पाइनल चेक अप्स ज़रूरी हैं .

काइरोप्रेक्टिक और गर्भावस्था पर अकसर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

क्या कहतें हैं माहिर ?
? क्या काइरोप्रेक्टिक गर्भावस्था के लिहाज़ से सुरक्षित चिकित्सा समझी जा सकती है 

.*केवल सुरक्षित ही नहीं व्यवहार -कुशल भी है सेंसिबिल चयन है माँ और उसकी होने वाली संतान के लिए भी .

?गर्भावस्था की किस   अवधि तक ,कौन सी तिमाही के किस चरण तक यह चिकित्सा व्यवस्था आजमाई जा सकती है 

* प्रसव पीड़ा के दौरान भी इस काइरोप्रेक्टिक समायोजन के लिए प्रसूताएं आगे आईं हैं .

?क्या समायोजन में गर्भावस्था के दौरान कोई दिक्कत आती है 

*  काइरोप्रेक्टर विशेष प्रशिक्षण लिए होते हैं गर्भ वती महिलाओं के रीढ़ समायोजन के लिए ,इस एवज विशेष काइरोप्रेक्टिक एड्जस्तिंग टेबिल्स की व्यवस्था रहती है काइरोप्रेक्टिक क्लीनिकों में .

?क्या उत्तर प्रसव होने वाले अवसाद से भी रीढ़ देखभाल बचा सकती है 

* संवेगात्मक स्ट्रेस और शख्शियत (पर्सनेलिटी ) को बरसों से इस चिकित्सा व्यवस्था से  फायदा होता आया है .

?क्या कमर दर्द में भी राहत दिलवाती है यह चिकित्सा 

* बेशक बेक और स्पाइनल पैन का यह इलाज़ नहीं है लेकिन रीढ़ समायोजन के बाद हमारी काया कमर और रीढ़ दर्द की दुरुस्ती अपेक्षाकृत जल्दी कर लेती है .हीलिंग जल्दी होती है स्पाइनल एडजस्टमेंट करवाने के बाद राहत जल्दी मिले पीर से ,पीड़ा से ,ये ही तो असल बात है . अलावा कमर और रीढ़ दर्द के इस समायोजन के बाद अन्य समस्याओं से भी राहत मिलती है आम स्वास्थ्य में सुधार आता है .

?Do I have to have a problem in pregnancy to see a chiropractor 

* Not at all .Chiropractic should be used as preventive maintenance .Periodic spinal checkups  during pregnancy should be as common as periodic weight checkups. 

बचावी कवच बन सकती है यह चिकित्सा व्यवस्था ,गर्भकाल में .आवधिक जांच उतनी ही ज़रूरी है जितना हर सप्ताह गर्भावस्था के दौरान तौल(वेट ) लेना .

?क्या नवजात के लिए भी है यह जांच 

* ज़रुरत  पड़ने पर जन्म के चंद घंटे बाद भी नवजात का स्पाइनल चेक अप किया गया है ,समायोजन भी ज़रुरत पड़ने पर किया गया है .

आबाल्वृद्धों (छोटे ,बड़े ,बूढ़े सभी )के लिए है काइरोप्रेक्टिक चिकित्सा व्यवस्था (बिना दवा के रीढ़ समायोजन से इलाज़ ).


4 टिप्‍पणियां:

Kailash Sharma ने कहा…

बहुत उपयोगी जानकारी...आभार

Kunwar Kusumesh ने कहा…

मेरे लिए ये सब एकदम नई जानकारी है.
धन्यवाद.

मनोज कुमार ने कहा…

रोचक प्रस्तुति, उम्दा जानकारी।

DrZakir Ali Rajnish ने कहा…

बहुत ही उपयोगी जानकारी है, आभार।

............
राष्‍ट्र की सेवा में समर्पित...
विश्‍वविख्‍यात पक्षी वैज्ञानिक की अतुलनीय पुस्‍तक।