मंगलवार, 28 अगस्त 2012

आओ पहले बहस करो

आओ पहले बहस करो -डॉ .वागीश मेहता ,डी .लिट .,1218 ,शब्दालोक ,सेक्टर -4 ,अर्बन एस्टेट ,गुडगाँव -122-001

बोला पुलिस मैन ,  साहब से आकर ,
गजब है तमाशा ,सुनो ध्यान  से सर ।

पकड़ा है जिस चोर को रंगे हाथ ,
अकड़ता मुकरता है ,वो साथ साथ ।

कहता है मुझसे ,करो बहस पहले ,
चाहे बाद में दर्ज़ करो, नहले दहले ।

देता खुली बहस का मैं निमन्त्रण ,
मैं देखता रोज़ ,चैनल पे संसद ।

है संसद संविधान से भी उच्चतर ,
पर बहस का रूतबा, संसद से ऊपर ।

स्वयं प्रमाणित घपले ,जो अकसर ,
उन पर भी निष्फल, बहसें निरंतर ।

आओ ,हम रपट से करें ,बहस पहले ,
विविध चैनलों पर, दिखें शाट्स सीधे ।

सुनो वोट आई -डी, लिया मैंने बनवा ,
जो है सौ रोगों की, बस एक दवा ।

मिली खूब सुविधा है वोटिस्तान   की ,
जय बोलो ,जय इंडिया देश महान की ।

सुना साहब ने तो सिर को खुजलाया ,
फिर धीरे -धीरे से यूं फुसफुसाया ,
संवेदनशील मुद्दा चाय पिलाओ ,
खामोशी से अपनी ड्यूटी निभाओ ।

प्रस्तुति :वीरेंद्र शर्मा (वीरुभाई ),
43,309 ,सिल्वरवुड ड्राइव ,कैंटन ,मिशिगन ,यु एस .ए .48 188
दूर -ध्वनी :001 -734 -446 -5451







2 टिप्‍पणियां:

शालिनी कौशिक ने कहा…

सुना साहब ने तो सिर को खुजलाया ,
फिर धीरे -धीरे से यूं फुसफुसाया ,
संवेदनशील मुद्दा चाय पिलाओ ,
खामोशी से अपनी ड्यूटी निभाओ ।
अगर वे ये न कहते तो भारत का नाम नीचा नहीं हो जाता क्या जहाँ काका हाथरसी भी कह गए कि-''.क्यूं घबराता है नर तू रिश्वत लेकर ,रिश्वत पकड़ी जाये छूट जा रिश्वत देकर.शानदार प्रस्तुति.बधाई.तुम मुझको क्या दे पाओगे?

Vibha Rani Shrivastava ने कहा…

सुना साहब ने तो सिर को खुजलाया ,
फिर धीरे -धीरे से यूं फुसफुसाया ,
संवेदनशील मुद्दा चाय पिलाओ ,
खामोशी से अपनी ड्यूटी निभाओ ।
ख़ामोशी ख़ामोशी ख़ामोशी ख़ामोशी फैली रहेगी
तभी तो अराजकता - भ्रष्टाचार छाई रहेगी .... !!