मंगलवार, 7 अगस्त 2012

भौतिक और भावजगत(मनो -शरीर ) की सेहत भी जुडी है आपकी रीढ़ से


भौतिक और भावजगत(मनो -शरीर ) की सेहत भी जुडी है आपकी रीढ़ से 

You Are Improbable 

विज्ञानियों  की प्रवृत्ति चीज़ों को टुकडा टुकडा करके भौतिकी ,रसायन और कुछ गणितीय और इतर विद्याओं ,अनुशासनों के नियमों के तहत उन्हें समझने समझाने की रहती है .इसे ही कहा जाता है मेकनिज्म ,क्रिया विधि या फिर रिडक्शनइज्म .यहाँ यह मान लिया गया है कि कोई भी तंत्र कितना भी पेचीला क्यों न हो उसे सरलीकृत प्रणालियों और सरलीकृत प्रारूपों में समझाया और बूझा जा सकता है .

बेशक इस तरीके से किसी मशीन के कल पुर्जों का अध्ययन करके उसके काम करने की क्रिया -विधि को बूझा जा सकता है .लेकिन क्या ऐसा जीवित  प्राणियों के साथ भी किया जा सकता है ?

नहीं न ! क्योंकि इन्हें आवयिक रूप अलग करने के क्रम में जीवन ही नष्ट हो जाएगा .ज़ाहिर है इस मेकनिज्म और रिडक्शनइज्म की सीमाएं हैं क्योंकि यह हमें जीवित तंत्रों के बारे में इत्तला सही सही नहीं दे सकती ,पूरी खबर तो कभी दे भी नहीं सकती .

You Violate The Law

 जीवित प्रणाली नियम का उल्लंघन करती है .भौतिकी के नियमों का .जहां मार्च स्थूल से सूक्ष्म की ओर है .गोचर पदार्थ से गोड पार्टिकिल की ओर है .

इस नियम के तहत पहाड़ से पत्थर ,पत्थर से कंकड़ ,कंकड़ से बजरी ,बजरी से रेत ,धूल -धंकाड मिलनी ही चाहिए .

लेकिन जीवित प्राणियों में स्थिति इसके ठीक उलट है .

सरलतम प्रारूपों से जल ,वायु ,अग्नि ,जल ,आकाश ,पृथ्वी   से यह माटी का पुतला मानुष बना है जिसका अंग प्रत्यंग  बड़ा  पेचीला है .चाहे फिर वह नेत्र हो या कोई पेशी या फिर हमारा दिमाग .कहतें हैं इसका तो अभी दशांश भी ठीक से बूझा न जा सका है .

मेकनिज्म के अनुसार जीवन का अस्तित्व होना ही नहीं चाहिए .क्योंकि यह निर -व्याखेयय है .

Your Organizer

आपके अन्दर ऐसा क्या है जो आपको ज़िंदा रखे हुए है ,पैदा होने के बाद आप बढ़ते विकसतें हैं ,कौन है जो आपको दुरुस्त बनाए रहता है आपको स्वास्थ्य लाभ मुहैया करवाता रहता है मौत आने तक .

क्या है जो इस पेचीला तंत्र को विखंडित होने से रोके हुए है ?इस जीवन तत्व ,जन्मजात प्रज्ञा के बिना यह काया दो कौड़ी की भी नहीं बिकेगी .हो सकता है कुछ रासायनिक तत्व मिल जाए इस काया से .लेकिन आप इसी काया के साथ ज़िंदा रहतें हैं .

This is  your "higher organizing principle," also called the wisdom of the body , the wisdom of nature , your inner healer or just "life ".

Chiropractors call it Intelligence (Innate Intelligence) and it guides you towards healing ,growth ,adaptation and  fulfillment.

यही  है आपकी जन्म जात प्रज्ञा ,अंतरजात -मेधा -बुद्धि .कायिक चेतना .अपनी प्राकृत शक्तियों से रोग शमन करने वाला रोग -हर ,जीवनी तत्व .

........a kind of superintelligence exists in each uf us ,  infinitely smarter and possessed of technical know -how for beyond our present understanding.

------------------------Lewis  Thomas ,  MD

Where Thoughts Become  Actions  

आप अपनी बाजू ऊपर उठाने की सोचते हैं और बाजू आप उठा लेतें हैं तत्काल .लेकिन कैसे ?विचार क्रिया में कहाँ और कैसे बदल गया ?क्या आपके दिमाग में आये इस विचार ने कि बाजू उठाया जाए दिमागी कोशिका की कक्षा में भ्रमण शील एक इलेक्ट्रोन को खदेड़ के बाहर कर दिया ? जिसके फलस्वरूप एक स्नायुविक संवेग एक नर्व इम्प्ल्ज़ पैदा हुआ जो तत्काल सम्बंधित हाथ की पेशी तक आदेश लेके पहुँच गया था ?और आपकी पेशी ने आकुंचन की वांछित क्रिया सम्पन्न कर ली आदेश मिलते ही .

यदि ऐसा है भी तो विचार से इलेक्ट्रोन असर ग्रस्त हुआ तो आखिर कैसे हुआ ?

ता -उम्र यह सोचने और कुछ न कुछ करते रहने  की क्रियाशीलता की प्रक्रिया चलती है लेकिन आखिर विचार कहाँ पर एक्शन का ,क्रिया का रूप लेते हैं ?

आपकी तमाम कोशिकाएं और ऊतक (टिश्युज  )हरकत में आतीं हैं ,एक व्यवस्था गति का रूप लेती है लेकिन व्यवस्थापक है कौन ?वह ,आपकी काया का भौतिक शरीर का स्पर्श कैसे करता है ?
Science has yet to  discover that powerful place deep within where Intelligence percolates up to your physical reality  to organize , heal and nurture .
According to Deepak chopra ,MD :
 Intelligence turns chaos into patterns .......the matter in our bodies never disintegrates into a shapelless ,mindless pile -until the moment of death.
Your Nervous System
  वह प्रणाली है हमारी काया में 
जो एक सेतु बनती है चेतना और पदार्थ में (आप चाहें तो कहें सचेतन ऊर्जा 

और पदार्थ में ) जिसे कहतें हैं स्नायुविक तंत्र (नर्वस सिस्टम ).शरीर के जर्रे -जर्रे का स्पर्श करता है यह .सम्पर्कित रहता है हर कोशिका और ऊतक से .मन हो या  आपकी काया कुछ भी अछूता नहीं है इस प्रणाली के लिए .
पूरा एक नेट वर्क है यह संचार का .आपकी प्रज्ञा इस कम्युनिकेशन सिस्टम का ही इस्तेमाल  करती है .इसी के ज़रिये समन्वय स्थापित करती है संयोजन  करती है उन अरबों अरब हिस्सों का जिनसे मिलकर बनता है एक जीता जागता सम्पूर्ण ढांचा , a living whole.

अनुकूलन ,संतुलन और सामंजस्य और स्वास्थ्य की नव्ज़ इसी स्नायुविक तंत्र से जुडी है .शर्त एक ही है यह तंत्र निर्बाध रूप ऊर्जा और प्रज्ञा से मिलने वाली हर खबर हर सूचना को बिना किसी अड़ंगे के  सम्बंधित अंगों ,ऊतकों कोशिकाओं तक पहुंचाता रहे ,

इस प्रज्ञा का पूर्ण रूपेण क्षय ही तात्कालिक मृत्यु है .

इस मेधा का आंशिक ह्रास हारी है बीमारी है .बीमार होने पर यह बुद्धि तत्व छीजता रहता है हौले -हौले .

बीमार पड़ जाने पर आप उतना जीवन से भरे नहीं रह पातें हैं ,आपका ऊर्जा का स्तर भी वह नहीं रह पाता है .कम ऊर्जित महसूस कर पातें हैं आप .दवाबों से दो चार होने का माद्दा भी कमतर हो जाता है .प्रति -रोध कम होजाता कुछ भी सहने बर्दाश्त करने का ,रोगकारकों से लड़ने का . 

पैथोजंस की सराय बन जातें हैं आप .बीमारियों का घर यही रोग प्रति -रोधी क्षमता छीजने पर .

The Vertebral Subluxation Complex 

The healer's job has always been to ...remove obstructions between the sick patient and the force life driving obscurely towards wholeness...........
             ---------Robert Becker ,MD

एक भौतिक प्रावस्था (अवस्था )ऐसी आती है जो इस कायिक तंत्र में ऊर्जा और सूचना के सम्प्रेषण में खलल डालती है व्यतिरेक पैदा करती है .बस आप बीमार हो जातें हैं .इस अवस्था में बस थोड़ा सा वह भी  पीड़ा रहित रीढ़ की हड्डियों के परस्पर संरेखण  में विचलन पैदा हो जाता है,मिस -एलाइन -मेंट हो जाता है परस्पर रीढ़ की हड्डियों का . .अकसर आपको इसकी खबर भी नहीं रहती है .यही है "Vertebral  Subluxation".

काइरोप्रेक्टर वैज्ञानिक  तरीके से आपकी काया की जांच और विश्लेषण करके इस तालमेल को ,समायोजन को रीढ़ के पुनर स्थापित कर देता है .यही है काइरोप्रेक्टिक स्पाइनल एडजस्टमेंट .

आप एक बार फिर अपनी जन्म जात प्रज्ञा से निर्बाध रूप संवाद करने लगतें हैं जर्रा -जर्रा पुन :सम्पर्कित  हो जाता है इस प्रज्ञा से .आप को अब अपना आपा तन  भी और मन भी अच्छा लगने लगता है .

Free of subluxations ,your energy flows more freely and you are more "in touch"with your Innate Intelligence so you may better experience physical and emotional health and happiness .

आपकी काया और मनो -शरीर के नव्ज़ जुडी है आपकी रीढ़ से याद रहे .

10 टिप्‍पणियां:

रविकर फैजाबादी ने कहा…

रीढ़ की हड्डी / यानी संरचना को खड़ी करने का सामर्थ्य ।।

दिगम्बर नासवा ने कहा…

नर्व तंत्र ... रीड की हड्डी से जुड़ीं है सेहत ... कितना कुछ है शरीर में जो रोमांचकारी है ...
राम राम जी ...

Shanti Garg ने कहा…

बहुत ही बेहतरीन और प्रभावपूर्ण रचना....
मेरे ब्लॉग

जीवन विचार
पर आपका हार्दिक स्वागत है।

डॅा वेदप्रकाश श्योराण ने कहा…

wah sab wah

रविकर फैजाबादी ने कहा…

उत्कृष्ट प्रस्तुति बुधवार के चर्चा मंच पर ।।

Dr Varsha Singh ने कहा…

बहुत ही सारगर्भित ....

G.N.SHAW ने कहा…

भाई साहब ..आस्थ और विज्ञानं में ताल मेल बनाती रीढ़ की हड्डी | प्रश्न और उत्तर के प्रयास सुन्दर

सुशील ने कहा…

बहुत खूबसूरती से समझाया है जनाब !

Anita ने कहा…

वाह, बहुत उपयोगी पोस्ट !

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') ने कहा…

सचमुच हमारा शरीर अद्भुत है...
उपयोगी पोस्ट...
सादर आभार।