गुरुवार, 4 अप्रैल 2013

PUSHY MOM,DOUBTING KID

Mothers specially those who are forced to sacrifice a fulfilling carrer in the interests of their families and to bring up their children ,often pass on their unfulfilled ambitions to the kids ,which can severely affect the child's psychological development

१ ४ साला विकास को रसायन शाश्त्र (Chemistry)के पर्चे में यद्यपि पूर्णांक ८ ० में से ७ ५ अंक प्राप्त हुए थे लेकिन उसके चेहरे पे ख़ुशी नहीं थी  .चालीस विद्यार्थियों की कक्षा में अभी भी उसका नंबर तीसरा था ,थर्ड था वह क्लास में .

प्रथम सत्र में भी उसके इतने ही अंक थे और उसकी माँ ने उसे विशेष कोचिंग मुहैया करवाई थी केमिस्ट्री की .विकास को यही चिंता अन्दर अन्दर खाए जा रही थी ,माँ की अपेक्षाओं पर वह खरा नहीं उतरा है .उसके ग्रेड में सुधार नहीं आया है .हालाकि उसने पानी पूरी क्षमता से पढ़ाई की है .

स्वेता अभी दस साल की ही थी ,माँ सुमिता  ने कहना शुरू कर दिया था तुझे चार्टर्ड एकाउंटेंट बनना है .दरअसल सुमति का यह खुद का बचपन का खाब था ,जो पूरा न हो सका  था .पारिवारिक दिक्कतों की वजह से वह यह मुकाम हासिल न कर सकी थीं  .स्वेता को नंबरों से जमा जोड़ से चिढ़ थी .कैसे बताये वह यह बात अपनी माँ को इसी कशमश में रही आई थी .

माँ के हिसाब से हर काम पलक झपकते पूरा होना चाहिए चाहे वह होम वर्क हो या कुछ और .

Mothers are meant to be magicians who make trouble -be it neighbourhood bully ,terrible cuts from a fall or complex homework sheets .

मोहल्ले के दबंग का भी इलाज़ था माँ के पास रोज़ मर्रा गिरते पड़ते लगने वाली चोटों का भी .माँ अलादीन का चराग है जादूगरनी है .लेकिन बच्चों के लिए परेशानी का सबब भी बनती है .बच्चों को अनचाहा काम करने के लिए मजबूर करने वाली माँ .इसे ही आप कह सकते  हैं PUSHY MOM.

माहिरों के अनुसार मेजिक माताएं कई मर्तबा अपनी भूमिका की हदों के पार चली जातीं हैं .माँ का रूपांतरण  यह दवाबकारी  माँ में कर डालतीं हैं .एक आक्रामक माँ बन जाती हैं जो बच्चों को परेशान किये रहतीं हैं .

वह अपने बच्चों में अपना लघु संस्करण तलाशती रहतीं हैं .सोच होती हैं जो हम न कर सके हमारे बच्चे करेंगे .अपनी जैविक प्रतिलिपि मान बैठतीं हैं अपने बच्चों को ये दवाबकारी माताएं .अपेक्षा रहती है इनकी हर पल हमारा टूटा हुआ खाब हमारे बच्चे पूरा करें जो हम न कर सके वह कर दिखाएं .यही कहना है बालरोगों के माहिर और इमोशनल कोशेंट ट्रेनर संदीप केलकर साहब का .

यह माताएं यह भूल जाती है बच्चे उनके जीवन का एक हिस्सा मात्र हैं न की उनका पूरा जीवन,उनकी ज़िन्दगी .यही कहना है  ,मनोरोगों के माहिर हरीश शेटी साहब का .

यह समस्या मुंबई जैसे नगरों में उग्र रूप लेती जा रही है जहां ऐसी माताएं बहुलता में मिल जाएँगी जो अपना केरीयर ,अपनी अकादमिक उपलब्धियां एक तरफ रख बच्चों की परवरिश  में जुट गईं हैं .

आज ऐसी माताएं इसलिए भी आपको मिल जाएँगी क्योंकि आज परिवार का आकार छोटा है पति -पत्नी और एक या दो बच्चे बस .ज़ाहिर है संयुक्त परिवार के तकाज़े यहाँ नहीं हैं .दूसरी मजबूरियां भी नहीं हैं .यह कहना है निराली सांघी साहिबा का .आप एक उद्यमी हैं और एक पेरेंटिंग वेबसाईट चला रही हैं .

Psychologist Varkha Chulani says pushy mothers see their children as a reflection of themselves ."Her self- worth comes from her child .If the child does well ,so does she,hence she is hence intolerant of mistakes made by the child ."

सुमति को लगता है वह एक Pushy mother नहीं है .वह तो परिवार के सारे तकाज़े हरेक की मांग पूरी करती है .मांगने से पहले सब को सब कुछ परोस देती है .पहले ही कयास लगा लेती है किसको क्या चाहिए .मुझे यकीन है मेरी बेटी का भविष्य संवर जाएगा सुरक्षित हो जाएगा उसके चार्टर्ड एकाउंटेंट बनने पर .और यह मुश्किल भी कहाँ हैं बस उसे थोड़ी मेहनत  ही तो करनी है .(रुझान बालक का जाए चूल्हे में ).

(ज़ारी )


10 टिप्‍पणियां:

Vikesh Badola ने कहा…

इस तरह की लहर चल ही रही कि जो अभिभावक नहीं कर पाए विशेषकर माता श्री नहीं कर पायी उसकी अपेक्षा वे बच्‍चों से करती हैं। चाहे इस हेतु बच्‍चे तैयार न हों, पर अभिभावकों विशेषकर माता का अपेक्षा-दबाव बच्‍चों को दिग्‍भ्रमित कर रहा है। पुशी मदर के बजाय पलेक्सि मदर होना ज्‍यादा असरकारी होगा अभिभावकों और बच्‍चों दोनों के लिए।

Rohitas ghorela ने कहा…

कुछ एक माताएँ अपने बच्चों से वो सब कुछ करवाती है जो कभी उनका अधुरा सपना था ..
ऐसा करने से बच्चों के दिमाग पर केवल दबाव बढ़ता हैं ..जिससे बच्चे तनाव से घिर जाते हैं।

पधारिये आजादी रो दीवानों: सागरमल गोपा (राजस्थानी कविता)

रविकर ने कहा…

आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति शुक्रवारीय चर्चा मंच पर ।।

पुरुषोत्तम पाण्डेय ने कहा…

ये मानसिकता यहाँ आम तौर पर देखी जा सकती है, बहुत सुन्दर ढंग से आपने एक माँ के मनोभावों को उजागर किया है.

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

समय के साथ मानसिकता भी विकृत हो चली है!

डॉ टी एस दराल ने कहा…

मां ही नहीं , पिता का भी बहुत दबाव रहता है बच्चों पर , विशेषकर स्कूल परफोर्मेंस के बारे में।
सही कहा , अक्सर यह स्वयं की अधूरी इच्छाओं और उपलब्धियों को पूरा करने की दिशा में बच्चों का अनावश्यक शोषण है।

Anita ने कहा…

सचमुच यह एक तनावपूर्ण स्थिति होती है बच्चे के लिए..उसका स्वतंत्र विकास रुक जाता है..

Kalipad "Prasad" ने कहा…

माता पिता की अपेक्षाएं ही बच्चों में तनाव का एक प्रमुख कारण है
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Shalini Rastogi ने कहा…

माता-पिता का अति महत्त्वाकांक्षी होना आजकल बच्चों के लिए बड़ी समस्या है ... विचारोत्तेजक लेख!

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

बच्चों को पेड़ की तरह बढ़ते देना चाहिये।