सोमवार, 4 मार्च 2013

Less housework + more technology = worse health, study says

1960s के बाद से लगातार महिलाओं के कामकाजी घंटे ,दफ्तर के कार्यस्थल के औपचारिक माहौल   में काम

करने

के समय में लगातार इजाफा हुआ है घरेलू कामों में बिताये  जाने वाले समय के बरक्स .

प्रोद्योगिकी ने घर के काम को भी आसान बना दिया है श्रम के मौके कम कर दिए है .अलावा इसके कार्यस्थलों

पर भी बैठे बैठे ही कम करने के घंटे बढे हैं .

बचे हुए समय का अब बड़ा हिस्सा औरतें टी वी ,कम्प्यूटर्स ,टेबलेट्स आदि के सामने बिताने लगी हैं इस सबका न

सिर्फ उनके स्वास्थ्य पर ,उनकी  ,संततियों पर भी नकारात्मक प्रभाव दर्ज़ होने लगा है साल दर साल .घर हो या

दफ्तर -

जीवन के हर क्षेत्र में प्रोद्योगिकी का दखल बढ़ा है .घरेलू काम का बोझ कमतर हुआ है .एक नए अध्ययन के यही

नतीजे निकलें हैं जिसे डॉ एडवर्ड आर्चर के नेत्रित्व में साउथ केरोलिना विश्वविद्यालय कूल्म्बिया के आर्नल्ड

स्कूल आफ पब्लिक हेल्थ के रिसर्चदानों ने संपन्न किया है .सन्देश यह नहीं है की औरतें घर गृहस्थी में ज्यादा

खपें .

"Our world "  no longer necessitates moderate or intense physical activity.Therefore ,women (and men

)need to locate more time to deliberate exercise to overcome the decrement in daily activity ,"he said .

यह अध्ययन यू एस ब्यूरो आफ लेबर स्टेटिस्टिक्स द्वारा जुटाए गए आंकड़ों पर आधारित २ ० ११ में संपन्न एक

अध्ययन   का विश्लेषन प्रस्तुत करते हुए कहता है -अब दफ्तरों में हाड़  तोड़ और श्रम साध्य गतिविधियों के

मौके एक दम से घट  गए हैं .बरक्स इसके अब अधिक समय कम्प्यूटर के आगे बैठे काम करते हुए ही बीत रहा

है .इस सबके चलते गुजिस्ता बरसों के बनिस्पत देखते ही देखते औरतों और मर्दों का वजन भी बढ़ा है ओबीसिटी

में भी इजाफा हुआ है .अलबत्ता इस अध्ययन में उन लोगों  को शरीक नहीं किया गया था जो घर से ओपरेट

करते हैं कार्यस्थल के कामकाज को साथ ही घर को भी चला  रहें हैं .ज़ाहिर है ऐसे लोगों में बहुलांश में महिलायें

ही

रहीं हैं .

संदर्भित अभिनव  अध्ययन ने २ ० १ १ के आंकड़ों के संपूरक का काम किया है .पड़ताल की है ,कामकाजी

महिलाओं की जीवन  शैली में आये बदलाव के साथ साथ कार्यस्थल में काम के स्वरूप में आये बदलाव की भी

पड़ताल की है .घरु काज में आये बदलाव की भी .

गत ४ ५ सालों में आये बदलावों का जायजा लेने के लिए आर्चर और उसके साथियों ने उन "time use diaries"का

अध्ययन किया जिनके लिखने की शुरुआत १ ९ ६ ५  में  की गई थी .

American Heritage Time Use Study में तब हज़ारों महिलाओं ने शिरकत की थी .रोजनामचे में किस काम में

कितना समय खर्च किया  इसका पूरा ब्योरा रोज़ लिखा गया . किस काम  में कितनी केलोरीज़ खर्च हो रहीं है

और समय के साथ इसमें क्या बदलाव आया ,काम के स्वरूप में क्या बदलाव आया गुजिस्ता सालों में यह सब

लिखा जाता रहा है इन टाइम डायरीज़ में .

पता चला जो महिलायें १ ९ ६ ५ में  घर की  साफ़ सफाई और लौंड्री में प्रति सप्ताह २ ५ .७ घंटा बिता रहीं थीं

,2010 वह घटके १ ३ . ३ घंटे पर आ गया .

एक तरफ सक्रीय घरु कामकाज   के घंटों में कमी आई दूसरी तरफ टी वी और कम्प्यूटर के सामने भी ज्यादा

 समय

बीतने लगा .

१ ९ ६ ५ में कंप्यूटर तो था ही नहीं महिलायें टी वी के सामने सप्ताह में कुल  आठ घंटा बिता रहीं थीं .२ ० १ ० में

कम्प्यूटर ,टेबलेट आदि के आने के साथ साथ यह समय बढ़के १ ६ . ५ घंटा प्रतिसप्ताह हो गया .


आर्चर कहते हैं सवाल यह नहीं है की पहले आप बर्तन खुद साफ़ कर रहे थे अब उन्हें डिशवाशर में सेट करते हैं

,बल्कि यह है बचे हुए समय का नियोजन आप कैसे करते हैं ?क्या स्क्रीन से चिपके रहतें हैं या जिम की राह

पकड़ते हैं ,भौतिक रूप से निष्क्रिय रहते हैं या सक्रीय असल सवाल तो यह है .

अध्ययन केवल इस बात की पड़ताल में नहीं जुटा था ,आपकी निष्क्रियता ओबीसिटी को कैसे बढ़ा रही है

,गर्भावस्था और उसके प्राप्य संततियों  के  स्वास्थ्य के आकलन से भी जुड़ा था .


"Most importantly, as women became more sedentary (not out of laziness but because of the evolution of technology), their energy metabolism became less well regulated. When a woman is pregnant, the transient hyperglycemic/hypertriglyceridemic state from inactivity and long periods of sedentary behavior induces metabolic dysfunction in their offspring, predisposing them to obesity, diabetes, cardiovascular disease and cancer," according to the study.

इसका मतलब यह हुआ एक पीढ़ी की निष्क्रियता दूसरी को मधुमेह 

,मोटापा तथा हृदय और रक्त वाहिकाओं (ब्लड 

वेसिल्स )के रोग थमा रही है .नवजात जन्मना ज्यादा फेट सेल्स लिए 

आ रहे हैं .

"The hand that rocks the cradle rules the health of the next generation. ... Children are being born with a greater number of fat cells. This is due to maternal prenatal inactivity and the fat-producing nature of sedentary behavior," Archer said.


"If we truly wish to impact obesity, we need to explain that inactivity and sedentary behavior are two of the four horsemen of the apocalypse during pregnancy (alcohol and smoking being the other two); and the effect of these behaviors last a lifetime."

सन्दर्भ -सामिग्री :-





Less housework + more technology = worse health, study says

By Chris Boyette, CNN
February 28, 2013 -- Updated 1955 GMT (0355 HKT)
Chores have become less time-consuming and lives more sedentary, which has a negative impact on health, a new study says.


Chores have become less time-consuming and lives more sedentary, which has a negative impact on health, a new study says.








10 टिप्‍पणियां:

रविकर ने कहा…

बिलकुल सही |
aabhaar bhaai ji -

ZEAL ने कहा…

Thanks for this useful and highly informative post.

Kalipad "Prasad" ने कहा…

टेक्नोलॉजी प्रकृति से दूर है ,प्रकृति के नजदीक रहकर स्वस्थ रह सकते है
latest post होली

डॉ टी एस दराल ने कहा…

बात तो सोलह आने सही है।
लेकिन बच पाना भी मुश्किल है।

SM ने कहा…

this clearly shows importance of doing exercise

तुषार राज रस्तोगी ने कहा…

एक दम सच्ची बात कही आपने |


कभी यहाँ भी पधारें और लेखन भाने पर अनुसरण रूप में स्नेह प्रकट करने की कृपा करें |
Tamasha-E-Zindagi
Tamashaezindagi FB Page

Aziz Jaunpuri ने कहा…

सर जी,महिलाओं पर किये गये हालिया
अध्ययनों के आधार आप की प्रस्तुति
में जो लिखा है वह एक हकीकत है
हर ज़गह कमोबेस यही स्तिथिति है ,

डॉ. मोनिका शर्मा ने कहा…

Haalat sach me yahi hain....

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

आपका कहना सही है, हम पर लागू होना प्रारम्भ भी हो गया है, अब कुछ हिलना होगा।

RAHUL- DIL SE........ ने कहा…

एकदम सही ....