शनिवार, 23 मार्च 2013

आखिर सारा प्रबंध इटली का ही तो है यहाँ .


कांग्रेस की सरकार की नाक इटली की  सरकार काट भी देती तो सरकार क्या कर लेती अब लेदेके घुटने टेकने के बाद नाक बच   गई तो सरकार के विदेश मंत्री को शाखामृग की तरह इस तरह उछल कूद करने की कोई वजह नहीं बनती है .भिखारी भिक्षा पे न तो नाज़ ही कर सकता है न ही यह कह सकता है सामने वाले ने मुझे भिक्षा डर  कर दी है .

अगर सरकार इटली के साथ हुए गुप्त मौखिक  या लिखित  समझौते को जग ज़ाहिर कर दे तो सरकार  के लेने के देने पड़ जायेंगे .बेशक इटली के लोग हमारे ख़ास मेहमान हों उनका हर धत कर्म हम बर्दाश्त करते आयें हों लेकिन इस मर्तबा जन मानस को संकेत यह गया भारत के लोगों की विदेशियों  द्वारा हत्या करके साफ़ बचा जा सकता है .सरकार कितनी बे -शर्मी से कह रही है इटली के नौसैनिक आराम से इटली   के दूतावास में मज़े से रहेंगे .उन्हें फांसी नहीं होगी .सरकार उनपे मुकदमा चलायेगी तो उनकी अदालत में पेशी भी होगी .उन्हें पुलिस रिमांड पे भी लिया जाएगा .कानूनन उन्हें कमसे कम दस साल की सजा भी हो सकती है माहिरों के अनुसार लेकिन यहाँ तो क़ानून मंत्री ही क़ानून में सेंध लगाके विकलांगों की बैसाखी भी चट कर जाते हैं और अपनी इस हाथ की सफाई के लिए विदेश मंत्री का पद भी पा जाते हैं .अब यही विदेश मंत्री कूद फांद मचा रहें हैं अपनी पीठ ठोक रहें हैं .कहा जा आरहा है इटली वाले डर  गए . जबकि कानूनी प्रक्रिया की धज्जी कौन उड़ा रहा है यह जग ज़ाहिर है .

"मेहमाँ जो हमारा होता है वह जान से प्यारा होता है" और फिर मेहमान इटली का हो तो फिर बात ही क्या सरकार लाल कालीन बिछाएगी उनके स्वागत में पलकों पे बिठाए फिरेगी .आखिर सारा प्रबंध इटली का ही तो है यहाँ .

इटली के ही पास गिरवीं है भारत की नाक .

4 टिप्‍पणियां:

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ ने कहा…

वाह! बहुत ख़ूब!

डॉ. मोनिका शर्मा ने कहा…

सब कुछ किसी योजना से कम नहीं लगता ....

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

अतिथि मानकर आवाभगत कर ली जाये तब।

Vikesh Badola ने कहा…

ये मारा पापड़वाले को।