मंगलवार, 26 मार्च 2013

आनुवांशिक तौर पर संशोधित केला हाँ या न ?


आनुवांशिक तौर पर संशोधित केला हाँ या न ?

पक्ष :विटामिनों और लौह तत्वों से संवर्धित पोषक केला हिन्दुस्तान के आधे से ज्यादा नौनिहालों को  जो खून की कमी से ,कुपोषण से ग्रस्त हैं को पोषण प्रदान कर सकता है .

Recipe for slaying anaemia

तर्क सीधा है यदि केले को पोषक तत्वों यथा विटामिन समूह और लौह तत्व  से संपुष्टि कृत कर दिया जाए तो भारत जो केले का सबसे बड़ा उत्पादक देश है और सारे उत्पादन को खुद ही चट कर जाता है ,हिन्दुस्तान के आधे से ज्यादा  नौनिहालों को कुपोषण के मुंह में जाने से बचा सकता है .बेशक खून में लौह तत्व की कमी आयरन डेफिशियेंसी एनिमीया हिन्दुस्तान की आम समस्या है खासकर शाकाहारी आबादी इसकी  ज्यादा चपेट में है और मातृत्व मृत्यु की यह एक बड़ी वजह बना हुआ है .ऑस्ट्रेलियाई साइंसदान जीन प्रोद्योगिकी हमारे जिनीयागरों (जीन इंजिनीयरों )के साथ सांझा करने को राजी हैं .

बेशक अमरीकी खाद्य एवं दवा संस्था फ़ूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन आनुवंशिक तौर पर खाद्यों की सुधरी पुष्टिकृत किस्मों के साथ अतिरिक्त सुरक्षा मानकों को बीच में लाना गैर ज़रूरी मानती है .बस उतनी ही सुरक्षा यहाँ भी चाहिए जितनी परम्परागत किस्मों के लिए ज़रूरी समझी जाती है .

मक्का ,सोयाबीन और केनोला का ९ ० फीसद उत्पाद इस वक्त अमरीका में जीन संशोधित ही है .

ब्राज़ील इन्हीं सुधरी किस्मों के चलते अब अपनी ज़रुरत का पूरा खाद्यान्न पैदा कर रहा है .पहले वह खाद्यान्नों के आयात पर आश्रित था .

चीन पपीता ,टमाटर और बेल पेपर की सुधरी किस्म के अतिरिक्त उत्पादन पर इतराने लगा है .

GM POPLAR IS NOW SUPPLYING CHINA TIMBER ON A COMMERCIAL SCALE.

कुछ माहिर कह रहें हैं देर सवेर भारत को अन्न की बढती ज़रूरियात  को पूरा करने के लिए GM CROPS को गले लगाना ही होगा भले आज भारत सरकार ने बैंगन की सुधरी किस्म (Bt brinjal )पर पाबंदी लगाईं हुई है जबकि दो टूक और दृढ शब्दों में Genetic Engineering Approval Committee ने इसका समर्थन किया था .

विशेष :

अगली क़िस्त में पढ़िए आनुवंषिक  तौर पर खादयान्नों की सुधरी किस्म के विपक्ष में तर्क और साक्ष्य  

 आनुवंषिक  तौर पर खादयान्नों की सुधरी किस्म के विपक्ष में तर्क और साक्ष्य  
Don't open this Pandora's box 

केले की गिनती एक स्वास्थ्यवर्धक आहार के रूप में होती रही है .सभ्यता के  आरम्भ से ही इसे सेहत के लिए मुफीद आवश्यक तत्वों और कार्बोहाइड्रेट से भरपूर एक सम्पूर्ण आहार माना जाता रहा है .

अचानक ऐसा क्या हुआ ,केला अपने उच्च पोषक मान  स्तर से इतना नीचे आ गया ,उसकी जीन संवर्धित किस्म पैदा करने की नौबत आ गई ?हमारे साइंसदान ऑस्ट्रेलिया की मदद से इसकी सुधरी हुई संवर्धित पुष्टिकर तत्वों से संयुक्त किस्म तैयार करने को राजी हो गए हैं और जल्दी ही यह हमारे आहार का हिस्सा भी बन सकती है . तरस आता है इनकी कुशला बुद्धि पर .
एक बार ये बुराइयों का पिटारा खुल गया तो एक धारावाहिक सिलसिला चल निकलेगा जो किसी के रोके न रुकेगा .

आखिर इस जीनीय हस्तक्षेप (जीवन इकाइयों में  तबदीली )की ज़रुरत क्या है ?

क्या इसमें विटामिन और केल्शिअम की कमीबेशी हो गई ?क्या अब चार केले खाने से ही उतने पोषक तत्व हासिल हो जायेंगे जितना पहले  छ : केले खाने से होते थे ?क्या इसीलिए चीज़ों के  कुदरती स्वरूप के साथ छेड़ छाड़ की वाजिब वजह बनती है ?जबकि दीर्घावधि अध्ययनों के अभाव में हमारा ज्ञान इन कथित जीनीय रूप से परिशोधित अतिरिक्त पुष्टिकर तत्वों से युक्त किस्मों में बारे में अत्यल्प ही कहा जाएगा .फील्ड ट्रायल्स हमारे यहाँ इस आशय के नहीं हुए हैं .बिना विचारे हम एक पैंडोरा बोक्स (Pandora's box)खोलने को राजी हो रहे हैं .इनके पर्यावरण -पारि तंत्रों पर पड़ने वाले प्रभावों  के बारे में हम बा -खबर नहीं हैं .

ये कथित सुधरी किस्में परम्परागत किस्मों का भी बेड़ा  गर्क कर सकतीं हैं .पर्यावरण के साथ एक नया ही गुल खिला सकतीं हैं .कहीं ऐसा न हो धोभी का कुत्ता न घर का रहे न घाट  का .

Further in the developed world ,perhaps precautions such as adequate labelling of GM crops and seeds ,and similar measures can be implemented to mitigate their risks for those who are unwilling to jump on the GM bandwagon .Does anyone really think that such regulations would be followed any more assiduously in India than any of the hundreds of others in all walks of life we ignore blithely ?The safest way is to simply say no to GM.


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5 टिप्‍पणियां:

Rajendra Kumar ने कहा…

केला जैसा था वैसा ही है,बुद्धिजीवियों की सोच बदल गयी है,होली की हार्दिक शुभकामनाएँ.

madhu singh ने कहा…

सर जी ,होली की हार्दिक मंगल
कामनाओं के साथ दोनो पक्षों पर विचार
विमर्श के उपरांत विद्वत जनों का
देश के हित में निर्णय लेना उचित होगा

ताऊ रामपुरिया ने कहा…

आपकी पोस्ट तो स्वास्थय के बारे में हमेशा ही गुणवता लिये रहती हैं.

भाईश्री को होली की हार्दिक शुभकामनाएं और प्रणाम.

रामराम.

डॉ. मोनिका शर्मा ने कहा…

जानकारीपरक पोस्ट .... शुभ होली , मंगलकामनाएं

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

जब कुछ खाने का मन नहीं होता है, हम केला उठा लेते हैं। हमें क्या ज्ञात कि हम अनमने ही अपनी सेहत बना रहे हैं।