बुधवार, 6 जून 2012

उनसे नजर मिले तो चेहरा पलाश हो जाए

उनसे नजर मिले तो चेहरा पलाश हो जाए 

Mere interaction with men makes a woman glow/TIMES TRENDS /THE TIMES OF INDIA ,NEW DELHI ,JUNE 4 ,2012 P19


पुरुष  और महिला एक दूसरे के जैविक संपूरक हैं .पुरुष और प्रकृति का मिथक अर्वाचीन  है . पुरुष तटस्थ है तो प्रकृति स्वभाव से ही चंचला है .पुरुष की उपस्तिथि मात्र ही उसे तरंगायित कर देती है .एक चुम्बकीय आकर्षण से संसिक्त कर देती है .सारा खेल जीवन में ये अदृश्य तरंगें  ही खेलतीं हैं .वृक्ष की शाखों और पातों सा मन प्रकम्पित आह्लादित आनंदित होने लगता है इन तरंगों की लीला से .

एक चुम्बकीय आकर्षण पैदा होता है इन दोनों सम्पूरकों में और सृष्टि का पहिया घूमने लगता है .

आज आधुनिक शोध भी यही कह रहा है .महज़ पुरुष की उपस्तिथि हर श्रृंगार खिला देती है महिला के चेहरे पर .भौतिक स्पर्श इसका उद्दीपक बनता है और यौनिक स्पर्श इस चुम्बकीय आकर्षण की पराकाष्ठा .

एक नया अध्ययन कहता है पुरुष और प्रकृति का यह नैसर्गिक आकर्षण एक अभिनव इमेजिंग टेक्नोलोजी का आधार बन सकता है .

पुरुष की भौतिक उपस्तिथि मात्र एक महिला के चेहरे का तापमान मान बढ़ा देती है .अंग्रेजी भाषा में इसे ही ब्लश  करना तथा गुलामों की भाषा हिंदी में रीझना कहतें हैं .

यही प्रोद्योगिकी तापीय प्रति -बिम्बंन(Thermal imaging ) की आधुनिक जीवन  में पसरे स्ट्रेस (तनाव /सामाजिक और कार्यकारी  दवाब )एवं संवेगों (emotions ) के  भौतिक  मापन  का  आधार भी   बन  सकती  है  .


इस  प्रोद्योगिकी  के  जनक  हैं University  of St Andrews के रिसर्चर .बकौल इनके अन्य पुरुष की उपस्तिथि भर मौजूद महिला के चेहरे के तापमान को खासा बढा देती है .  

रिसर्चरों की टीम ने विषम लैंगिक (Heterosexual ) महिलाओं  के  चेहरे  का  तापमान  उस वक्त थर्मल इमेजिंग तकनीकों  से मापा जब उनकी भेंट परिवारेतर पुरुषों से हो रही थी .पता चला है उनकी मौजूदगी भर से महिला का चेहरा सुर्ख रू हो जाता है हर सिंगार हो जाता है तपने लगता है .

यह  अन्वेषण Biological letters में प्रकाशित हुआ है .इस प्राविधि का बेहतरीन इस्तेमाल भविष्य में Stress एवं  Emotions का जायजा लेने ,मानिट्रंन   करने में किया जा सकेगा .  

शोध के अगुवा Amanda Hahn के अनुसार   उनकी टीम के अन्य    रिसर्चरों ने सामाजिक संवाद उठ बैठ के दौरान महिलाओं के हस्त (हाथों ),बाजुओं तथा सीने का तापमान मापा .पता चला  ऐसी  सामाजिक भेंटों मेलमिलाप के दरमियान सबसे ज्यादा परिमाण में महिला के चेहरे का तापमान बढ़ जाता है .

कुदरत संचालित करती आई है इस नैसर्गिक चुम्बकीय आकर्षण सम्मोहन को , पुरुष और प्रकृति के .सांख्य   दर्शन की यह एक महत्वपूर्ण अवधारणा है . 

10 टिप्‍पणियां:

Arvind Mishra ने कहा…

प्रकृति और पुरुष के सम्बन्ध के दार्शनिक सवाल का आधुनिक परिप्रेक्ष्य :)

dheerendra ने कहा…

पुरुष की भौतिक उपस्तिथि मात्र एक महिला के चेहरे का तापमान मान बढ़ा देती है

MY RESENT POST,,,,,काव्यान्जलि ...: स्वागत गीत,,,,,

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

संभवतः चेहरा खिलना इसी को कहते हैं।

दिगम्बर नासवा ने कहा…

दोनों ही प्रकृति के अंग हैं और विपरीत अंग हैं ... इसलिए सहज आकर्षण तो होना ही है ...
राम राम जी ...

Maheshwari kaneri ने कहा…

प्रकृति और पुरुष के सम्बन्ध के बारे में दार्शनिक विचार..बहुत खूब सुन्दर जानकारी के लिए आभार

मनोज कुमार ने कहा…

यह तो प्रकृति की देन है।
फेरोमौन का प्रभाव भी आंकना था।

मनोज कुमार ने कहा…

यह तो प्रकृति की देन है।
फेरोमौन का प्रभाव भी आंकना था।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल शुक्रवार के चर्चा मंच पर भी लगाई जा रही है!
सूचनार्थ!

***Punam*** ने कहा…

उनसे नजर मिले तो चेहरा पलाश हो जाए.....

बस इतना ही काफी है.....!!

आशा जोगळेकर ने कहा…

रोचक ।