शनिवार, 2 जून 2012

साधन भी प्रस्तुत कर रहा है बाज़ार जीरो साइज़ हो जाने के .

गत साठ  सालों में छ: इंच बढ़ गया है महिलाओं का कटि  प्रदेश (waistline),कमर  का  घेरा  

Women's waistlines expanding :/SHORT CUTS/TIMES TRENDS /THE TIMES OF INDIA,MUMBAI ,MAY 26 ,2012/P19

रिसर्चरों  की  माने  तो आलमी स्तर पर महिलाओं के कमर का घेरा गत साठ सालों में  छ : इंच बढ़ गया है .वजह बतलाई जा रही है .काम के स्वरूप में आया बदलाव .आधुनिक सुख साधनों घरेलू उपकरणों तक महिलाओं की सहज पहुँच .ये तमाम उपभोक्ता उपकरण इनकी पूर्वजाओं को मयस्सर नहीं थे .घरेलू महिलाओं की संख्या ज्यादा थी .

१९५० आदि के दशकों में औसतन घरेलू/ घरु काम काज में एक औसत महिला १०००  केलोरीज़ फूंक देती थी .

आज कितनी ही महिलायें घर से बाहर निकल आईं हैं लेकिन दफतर /कंपनियों में आके उन्हें डेस्क पर बैठे बठे ही काम करने के मौके ज्यादा पड़ते हैं .

दवाब भी ज्यादा बना रहता है .

दोनों सिरों को घर दफ्तर के बीच सामंजस्य तलाशते रहना भागते भागते समय के पीछे इस सामाजिक दवाब को और भी बढ़ा देता है .

खान पान भी इस दरमियान परिष्कृत हो गया है .तुरता  भी . जो वक्त पे मिल जाए वही सटीक .

लेकिन अभी भी समाज के सबसे निचले पायदान पे ले देके ज़िंदा रहने की शर्त पूरी करती महिलाओं का एक वर्ग ऐसा है हर नगर कस्बे   महानगर में जिसे काम तक पहुँचने के लिए ही मीलों पैदल चलना पड़ता है .समय की नोंक पर हाड तोड़ श्रम भी उस पर इस रिसर्च रिपोर्ट को कैसे आयद कीजिएगा ?

ज़ाहिर है इसका सम्बन्ध समाज के खाते पीते तबके  से ज्यादा है  जिसे ये आधुनिक घरु साजो सामन उपलब्ध है .

इन शमिताओं शोषिताओं  को निहारने वाला कोई रसलीन नहीं है .जबकि  लावन्य   और नूर   इनके   पास   कम   नहीं है .

इसीलिए अब कोई रसलीन भी नहीं रहा है जो कहे -

कनक छवि सी कामिनी ,कटी काहे को क्षीण ,

कटी को कंचन काटी विधि ,कुचन मध्य धर दीन्ह .

लेकिन बात यहीं खत्म नहीं होती यहाँ से शुरू होती है 

बाज़ार ने रसोई घर को खत्म कर दिया है . खान पान काम करने के उपादान बदल दिए हैं .पहले कटि प्रदेश बढाने के सारे साधन मुहैया करवा दिए , और अब उसकी पैमाइश करके उस्क्प फिर से कम करने के उपाय भी सुझा रहा है .देखिये बाज़ार की ओर क्या नहीं है वहां ? साधन भी  प्रस्तुत कर रहा है बाज़ार जीरो साइज़ हो जाने के .

5 टिप्‍पणियां:

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

घर का काम कम करने से घेरा बढ़ना स्वाभाविक है..

डॉ टी एस दराल ने कहा…

महिलाएं ही नहीं , अब तो मर्दों की कमर का नाप भी दिनों दिन बढ़ता जा रहा है .
किसी पुलिस वाले की तोंद देखकर तो हंसी ही आ जाती है . डॉक्टर्स भी अब पीछे नहीं .

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

वाह...बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार के चर्चा मंच पर भी होगी!
सूचनार्थ!

dheerendra ने कहा…

विवाह के बाद ऐसा अधिकतर देखने को मिलता है,,,,

RESENT POST ,,,, फुहार....: प्यार हो गया है ,,,,,,

दिगम्बर नासवा ने कहा…

इस घेरे को कम बढ़ना अपने हाथ में होता है अधिकतर ...