मंगलवार, 12 जून 2012

Small portions for very large people

सामाजिक सरोकारों को जो लोग असर ग्रस्त कर सकतें हैं उनकी दृष्टि अपने  व्यावसायिक हित लाभ तक सीमित रह जाती है .ऐसे वक्त में मीडिया कम्पनी वाल्ट डिज्नी की सेहत के प्रति खबरदारी से ताल्लुक रखने वाली शानदार पहल का ज़िक्र करना ज़रूरी हो जाता है .

इस कम्पनी ने अपनी तमाम वेब   साइटों   से ,चैनलिया नेट वर्क से ,रेडियो स्टेशनों से जंक   फ़ूड की बिक्री से जुड़े विज्ञापन तंत्र को प्रतिबंधित करके एक महत्वपूर्ण सामाजिक पहल की है .

अब मुमकिन नहीं रहेगा फेरी वालों को जंक फ़ूड के लोक लुभाऊ विज्ञापन मायाजाल से आबाल्वृद्धों को भ्रमित करना .

नमक और शक्कर से बे -इन्तहा लदे कबाड़िया कथित तुरता भोजन के अलावा यह प्रतिबन्ध उन विज्ञापनों पर भी आयद रहेगा जो ६०० केलोरीज़ भार से ज्यादा का मील कोर्स प्रदर्शित कर अपनी ग्राहकों को ललचायेंगे .

आप चाहे तो इसका श्रेय न्यूयोर्क महानगर नगर के मेयर साहबान Michael Bloomberg की उस अनुशंसा को भी दे सकतें हैं जिसके तहत  आधा लिटर से ऊपर के सोडा को (सोफ्ट ड्रिंक्स )को स्टोर्स से बाहर खदेड़ने की बात कही गई थी .थियेटर्स और सिनेमा हाल्स की केंटीनों  ,आम रेस्तराओं से ऐसी सुपर साइज़ ड्रिंक्स बे -दखल कर दी जायेंगी .

बेतहाशा चर्बी चढ़ रही है अमरीकियों पर इसीलिए अब 'Small portions for very large people'  की बयार बहने को है .

समझा जाता है डिज्नी इसे २०१५ तक पूरी तरह अमल में ले आयेगा कानूनन .

पूर्व में ब्लूमबर्ग ने जन स्थलों पर धूम्रपान ,धमनियों को अवरुद्ध करने वाले ट्रांस -फेटि -एसिड्स का चलन खाद्य पदार्थों में प्रतिबंधित किया था ,इस मर्तबा लोगों को कथित कम्फर्ट ड्रिंक्स गटकते चले जाने से रोक देने की पहल अपने हाथ में ली है .

कुछ मानव अधिकार वादी अपने बिलों से निकल आयें हैं .

लोग कितना आमादा और खुश है अपनी मर्जी का  ज़हर तलाशने और उसे सुपर साइज़ में गटकने को   .

फलसफा देखिए मरना तो है भैया खा पीके मरो .

धूम्रपान के बाद जबकि मौत की  अकेली  सबसे बड़ी वजह मोटापा (ओबीसिटी ) बनती रही है .

कुपोषण की मोटापे की वजह गरीब गुरबों में यही फास्ट फ़ूड बन रहा है जो सहज और सस्ते में उपलब्ध है .

आलमी स्तर पर लोगों का ओवर वेट होना और मोटापा २८ लाख वयस्कों की जान लेलेता है .

अलावा इसके मधुमेह रोगियों में ४४% तथा हृदय रोगियों में २३ % के मामले में रोग की वजह यही मोटापा बन रहा है .

७% से लेकर ४१%मामलों में कुछ कैंसर रोग समूह की वजह लोगों का ओवर वेट होना तथा मोटापा बतलाया गया है .

ये मालूमात और अन्वेषण विश्व स्वास्थ्य संगठन के  हैं .

१९८० -२०१२ के बीच आलमी स्तर पर ओबीसिटी दो गुना हो गई है .

२००८ में १.४ अरब   से भी ज्यादा लोग ओवरवेट  थे  .

बीस करोड़ के ऊपर पुरुष और तीस करोड़ से भी ज्यादा महिलायें ओवर वेट थीं .

२०१० में पांच साल से कम उम्र के चार करोड़ नौनिहाल ओवर वेट थे .

ज़ाहिर है लोगों को उनके ही हाल पे छोड़ने का जोखिम नहीं उठाया जा सकता .

किसी न किसी को पहल करनी ही थी .

सामाजिक और आर्थिक कारण कमोबेश तय करतें हैं जीवन शैलियाँ 

शिक्षा के मामले में पिछड़ जाना और सीमित आय भी खराब अस्वास्थ्यकर जीवन शैली की  वजह बनतें हैं .

मारक  रोग  संक्रमण ही नहीं ओबीसिटी और उससे पैदा जीवन  शैली रोग मधुमेह (सेकेंडरी डाय -बीतीज़) की वजह भी गरीबी ही बन रही है आलमी स्तर पर .

संशाधित फास्ट फ़ूड सस्ता है तुरत फुरत तैयार हो जाता है बरक्स स्वास्थ्यकर भोजन के जो घर में तसल्ली से पकाया खाया जाता है .

भारत के सन्दर्भ में पाव बड़ा ,कुलचे छोले ,छोले भठूरे गरीब को सस्ते में ही तृप्त कर देतें हैं 

और सबकी चाची चाउमीन बच्चों का सुप्रिय खाद्य बन रहा है कोक पेप्सी के संग , आज बच्चों की यही पहली पसंद है . 

बाल रोगों के माहिर बच्चों को क्लास रूम के खूंटे से खोलके मैदान में खेल कूद के लिए लाने की बात कहतें हैं .

हो इसके ठीक  उलट रहा है घर में लाज़वाब मम्मियां नौनिहालों को गेजेट्स से चिपकाए  रहने में एक दूसरे से बाज़ी  गार रहीं हैं .

आन लाइन और विडीयो गेमिंग फेसबुक, स्मार्ट फोन्स आदि बालकों को उम्र के दूसरे दशक में ही (पूर्व -किशोरावस्था )पहले इन पर चर्बी चढ़ातीं हैं फिर बढा देती हैं टाइप -टू  डायबीतीज़ का वजन .

जबकि    पचासा होने पर ही जीवन शैली रोग शरीर की ग्लूकोज़ अपचयन (glucose metabolism )क्षमता को असर ग्रस्त कर पाते   थे .साठा    होने पर ही अमूमन  अन्य    जटिलताएं    सामने   आ   पातीं   थीं .

इन्हीं  से फिर पैदा होते  थे ह्र्दय  रोग ,गुर्दों  की खराबी  ,डायबेटिक रेटिनो -पैथी         ,कालान्तर में अंधत्व     ,आखिर में amputations.. 

क्या मतलब होता है ओवरवेट होने का ,ओबीसिटी का 

विश्व -स्वास्थ्य   संगठन     के अनुसार    25 या    इससे    ऊपर BMI का     चले  जाना  ओवरवेट  होना  है  और  30 या  उससे  ऊपर  चले  जाना  ओबीसिटी  के  दायरे   में  आता   है  .

लेकिन    और  यह  लेकिन     भारत    के  ,दक्षिण  एशियाइओ    के  सन्दर्भ   में  बड़ा  मायने   रखता   है  

इनके  लिए  ये  अंक  क्रमश  :२३ और   25 माने   गएँ  हैं  .

स्माल portions (साइज़) पर आइये मेयर साहब की बात मानिए 

For choosing dessert over carrots and facebook over homework is okay just once in a while.

Small portions for very large people


विशेष :इधर विज्ञानियों  ने ऐसे गोगिल्स (चश्मे , आई ग्लासिज़ )बना  लिए  हैं जो दिमाग को भरमा के  छोटे पोर्शन को बड़ा  साधारण कुकीज़ को केंडी सा दिखलायेंगे .कम और तृप्त होकर खाने का इसे आसान उपाय बतलाया जा रहा है .

8 टिप्‍पणियां:

कुमार राधारमण ने कहा…

जंक फूड के बारे में इतना कुछ छपता रहता है,फिर भी इसका कारोबार बढ़ता जा रहा है। शायद,प्रतिबंध से कोई बात बने!

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

खा खा सारा जगत मुटाना,
जीभ परे सब एक हो जाना..

SM ने कहा…

informative post

काजल कुमार Kajal Kumar ने कहा…

हमारे यहां सरकार का काम कोई एक सुनीता नारायण करती है जि‍से कुछ दि‍न सारे चैनल गाते हैं फि‍र सरकार भी हां में हां मि‍लाती है और उसे कि‍सी कि‍सी कमेटी में बि‍ठा के दन्‍तहीन कर देती है. वह चुप हो जाती है, सरकार फि‍र चि‍रनि‍द्रा में चली जाती है और लाला लोग फि‍र नोट छापने में मशगूल हो जाते हैं ... तो जी बस यही कहानी है हमारे यहां की तो

डॉ टी एस दराल ने कहा…

बहुत सुन्दर काम की जानकारी जुटाई है . जीवन शैली में परिवर्तन अत्यंत आवश्यक है .
हम भी इसीलिए पहाड़ों के रास्ते नाप कर आज ही दिल्ली पहुंचे हैं . कितना साँस फूलता है लोगों का पैदल चलकर !

dheerendra ने कहा…

वाह,,,, बहुत सुंदर जानकारी प्रस्तुति के लिये आभार,,,

MY RECENT POST,,,,,काव्यान्जलि ...: विचार,,,,

Reena Maurya ने कहा…

बहुत ही बेहतरीन जानकारी दी है...
बेहतरीन पोस्ट:-)

Khilesh Bharambe ने कहा…

बहोत अच्छी जानकारी है. मेहनत करकें पोस्ट लिखी है आपने

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