रविवार, 29 जुलाई 2012

उम्र के साथ बदल जाता है रोग और चिकित्सा का स्वरूप

उम्र के साथ बदल जाता है रोग और चिकित्सा का स्वरूप 

Changing Times ,Changing Meds 

YOu don't stay the same .Why should your medication?

जैसे -जैसे हम बुढ़ाने लगतें हैं हमारी चिकित्सा का स्वरूप भी बदलने लगता है .पहले अल्पकालिक रोगों(acute illneses ) से पाला पड़ता था यथा acid reflux disease या फिर प्रत्युर्जिता एलर्जिक रियेक्शंस से ,एलर्जीज़  से .और बढती उम्र के साथ अब ला इलाज़ उच्च रक्त चाप और जीवन शैली रोग मधुमेह का प्रबंधन करना पड़ता है .

दूसरे मुद्दे भी महत्व लेते जातें हैं मसलन दवा किस वक्त ली जाए किस चीज़ के साथ ली जाए .इन दवाओं की परस्पर क्रिया -प्रति -क्रिया  का सवाल भी महत्वपूर्ण हो जाता है .अलावा  इसके वह लोग जो दूसरे महायुद्ध के बाद इस दुनिया में आयें हैं वह चिर युवा बने रहने के लिए नए नए नुसखें,खुराक ,कसरत और अनेक सम्पूरण का सहारा ले रहें हैं .

बावजूद इसके -

Today ,age doesn't necessarily equal medication .That's why it's important to get professional advice on what to take as your life changes .

Ages 45 to 55 


   चालीसा पार करते करते अनेक लोग पीड़ा- हर (pain relievers)लेने लगतें हैं Aches and pain से राहत   के लिए .कुछ को नींद न आने की शिकायत होने लगती है .नींद आने में खासी दिक्कत आने लगती है .

अचानक अस्थि  क्षय(ओस्टियोपोरोसिस ) और दिल के रोग तवज्जो मांगने लगतें हैं ,जिन रोगों की  अब तक उपेक्षा होती रही थी अब वह महत्वपूर्ण हो उठतें हैं .

आप को ऐसे कितने ही लोग मिल जायेंगे जो जीवन के इस चरण में भी prescriptions नहीं लेना चाहतें हैं .जबकि  अगर  आप इस चरण में किसी रोग को जल्दी पकड़ लेतें हैं उसकी शिनाख्त हो जाती है रोग निदान हो जाता है तब आप अपने चिकित्सक की सलाह पर चलते हुए जीवन शैली में समुचित बदलाव लाकर बचावी रणनीति बना लेते  हैं .ज़रूरी सम्पूरण(supplements) लेने लगतें हैं .  

हो  सकता  है रोग से पहले रोग की आहट को भांप कर आप अब prescription medications से  भी बचें रहें .

Ages 55 to 65 

इस आयु सौपान में ला -इलाज़ रोगों से घिर जाने के मौके और भी बढ़ जातें हैं .अनिद्रा रोग आम हो सकता  है .अब संक्रमण और बीमारियाँ या फिर कोई चोट ही लग जाए तो उतनी आसानी से ठीक नहीं होती हैं .

इसी उम्र में आदमी एक छटपटाहट के तहत  घडी की सुइयों का रुख पीछे की ओर मोड़ने के लिए फिश आयल से लेकर विटामिनों का सहारा लेने लगता है .

अनेक सम्पूरण आदमी आजमाना चाहता है .कुछ इसने बताये कुछ उसने .यहाँ हर घर में हकीम हैं .अनेकानेक नुसखे  भी बिना सोचे समझे आजमाए जाने लगतें हैं .

बेशक यह बड़ा जोखिम भरा काम है .सेहत से खिलवाड़ है .एक ही चिकित्सक के संपर्क में रहने की उम्र है यह क्यंकि वह आपको और आपके शरीर के मिजाज़ को आपके चिकित्सा पूर्व वृत्तांत को जानने बूझने लगता है .

जब कभी आपने खुद से आगे बढ़के इसके या उसके कहे में आकर दवा बदली है या कोई दवा लेनी ही बंद कर दी है  कृपया अपने चिकित्सक की जानकारी में यह बात लायें . 

अवांछित परिणाम हरेक दवा के होतें हैं उनसे छुटकारा पाने के ,विकल्प के बारे में जानकारी प्राप्त करिए  .करते रहिये समय समय पर .

Ages 65 -plus

यह वह उम्र है जब आप की आय सीमित और तय सी हो जाती है .

Beyond age 65 ,many people are on fixed incomes.

अब दवा की कीमत मायने ज्यादा रखने लगती है .एक ही फार्मेसी से संपर्क रखिए .कितने ही लोग पैसे की तंगी की वजह से ही इस उम्र में दवा लेना  बंद कर देतें  हैं .

यही वक्त है जब आप generic drugs लें.मालूम करें कहाँ -कहाँ हैं आपके इलाके में या आसपास ऐसे ड्रग स्टोर्स .   दो तीन महीने की दवा एक साथ लेके रखें .सीनियर सिटीजन्स को १०% तक दवाओं पे कमीशन कई दवा विक्रेता दे रहें हैं .निस्संकोच पूछें . 

5 टिप्‍पणियां:

शालिनी कौशिक ने कहा…

बिलकुल सही कहा आपने.बहुत सार्थक प्रस्तुति. आभार रफ़्तार जिंदगी में सदा चलके पाएंगे मोहपाश छोड़ सही रास्ता अपनाएं

Vivek Rastogi ने कहा…

बिल्कुल अब इस उम्र तक आते आते प्रभाव दिख रहे हैं ।

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

अपने हिस्से का पढ़ लिया, गुन लिया..

डॉ टी एस दराल ने कहा…

सही तस्वीर उतारी है .
अभी से सोचना शुरू कर देना चाहिए ,कलेंडर के हिसाब से .

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

सही सलाह ... अच्छी पोस्ट