सोमवार, 23 जुलाई 2012

अमरीका नहीं देखा उसने जिसने लास वेगास नहीं देखा



अमरीका  नहीं देखा उसने जिसने लास वेगास नहीं देखा 



रविकर फैजाबादी -


भोग शिखर पर वे खड़े, कर्म शिखर पर राम |
सुख दोनों ही अहर्निश, भोग रहे अविराम |
भोग रहे अविराम, शाम से सुबह करें वे |
पुन: सुबह से शाम, जाम पर जाम भरें वे |
रविकर अपने राम, कर्म कोसमझें पूजा |
यही परम सुख धाम, नहीं घर खोजूं दूजा ||




नंगों के इस शहर में, नंगों का क्या काम ।

बहु-रुपिया पॉकेट धरो, तभी जमेगी शाम ।

तभी जमेगी शाम, जमी बहुरुपिया लाबी ।

है शबाब निर्बंध, कबाबी विकट शराबी ।

मन्त्र भूल निष्काम, काम-मय जग यह सारा ।

चल रविकर उड़ चलें, घूम न मारामारा ।।


विभाजन पूर्व के लाहौर के बारे में कहा  जाता था जिसने लाहौर नहीं देखा उसने पंजाब नहीं देखा ,खूबसूरती का शिखर नहीं देखा .अमरीका के बारे में कहा जाता है जिसने लास वेगस (यहाँ वेगस ही कहतें हैं वेगास नहीं )नहीं देखा उसने अमरीका नहीं देखा .

यह एक ऐसा माया नगर है जो आपको भोग के शिखर पर ले जाता है .यहाँ पहुचने पर आप रिश्ते के बिना भी जी सकतें हैं .यहाँ से बाहर आकर आप फिर अपनी पूर्व धारणाओं में फंस जाएगें .

पूरब के साहित्य में (पौर्बत्य  साहित्य  ,औरिएन्तल लिटरेचर )में अमरावती का ज़िक्र है .इसे और लासवेगस को आप चाहे तो भोगावती (भोगा नगरी )कह सकतें हैं .

भोग दो तरह का होता है 

(१) कर्म का उच्चतम शिखर पर पहुंचना और उसके बाद प्राप्त सुख भोग 

(२)बिना कर्म के भोग का शिखर या भोग के शिखर पर पहुंचना 

लास वेगस में आके आपको करना कुछ नहीं है सिर्फ भोगना है .

आप कितने भोगे जाते हैं ,कितना भोगते  हैं अहर्निश ,आपको होश नहीं रहता .भोग की यहाँ कोई उम्र नहीं .ट्रेनिंग है बचपन से .सडक पर कुछ परिवारों का बचपन थिरकता है आजीविका के लिए कुछ हवा में कला बाजियां दिखाता है .

बह रूपिया जगत है यह .यहाँ 'पुलिस नकली 'आपका मनोरंजन करेगी असली आपको फ्रेंडली लगेगी मगर एक दम से चौकस .

मशहूर फिल्मों के चरित्र मुखौटों में दिखलाई देंगें .

उनमें होगा बम्बल  बी (फिल्म ट्रांस -फोर्मर ),स्पाइडर मैंन ,आयरन मैन,स्टार वार्स के तमाम चरित्र .कार्टून करेक्टर्स .सभी आपका मनोरंजन करते मिलेंगे .

संगम की वैजयंती माला -'मैं का करू राम मुझे बुड्ढा मिल गया' ,दिनकर की 'उर्वशी' ,तमाम मेनकाएँ यहाँ रोशनियों के साथ सडकों पर आजाती है .आप उनके साथ तस्वीर खिंचवा सकतें हैं .टिप दे सकतें हैं .न भी देंगें तो भी वैसे ही मुस्काएंगी .

इनके गिर्द लोग जमा दिखलाई देंगे  .

'मिराज़ ' के गिर्द सु निश्चित समय पर ज्वालामुखी फटता हुआ आप देख सकतें हैं .एक मायावी  सृष्टि करता है यह नगर वोल्केनिक इरप्शन की, आप तक जलती हुई विशाल गैस राशि की  गर्मी भी पहुचती है .

एक और 'केसिनो'BELAGIO के सामने म्यूजिकल  फाउन्टेन थिरकता नियत समय पर  है .कई बार .

एक केसिनों इतालवी जीवन की हू -बा -हू नकल उतारता मिलेगा .इसने एक क्रत्रिम आसमां खड़ा किया हुआ है .खुश नुमा शाम का एहसास हर पहर यहाँ होगा .

यहाँ आकर व्यक्ति पाप पुण्य की अव -धारणाओं से मुक्त हो जाता है .

यहाँ सिर्फ जिस्म हैं जिस्मों की नुमायश है जिस्मों का मेला है .मनोरंजन जन- रंजन प्रधान नगर है यह .यहाँ शराब ,शबाब और कबाब  निर्बंध हैं .

अपराध कमतर हैं शेष अमरीका के बरक्स .

अमरीका अपने सारे प्रयास के बाद एक और सिर्फ एक अमरावती गढ़ सका है लेकिन यह  करके भी अमरीका घाटे में नहीं है .घाटे का सौदा तो अमरीका करता ही नहीं .

यहाँ 'कर्ता' दिखलाई ही नहीं देता .यहाँ 'कर्ता' के द्वारा प्रायोजित कर्म भोग है .अमरीका आपको यहाँ भोग के शिखर पे ले जाता है .

बस यहाँ आकर आप अपनी पूर्व धारणाओं से मुक्त हो जाए .

सारा नगर हर नुक्कड़ चौराहा (नगर दो सड़कों पर ही आबाद है जो अहर्निश रोशन रहतीं हैं )24x7  नाचता थिरकता है .फ्लाई ओवर्स ,सेतु सारे नगर के हर चौराहे के चल सीढ़ियों से जुड़े हैं .

त्रि -आयामीय सिनेमा हर जुआ घर की शान है उसका विज्ञापन पटल है .ये केसिनोज़ पूरे नगर के नगर हैं यहाँ सब कुछ है संगीत सर्कस खेल कूद नांच ,तरणताल ,लाइव शोज़ .चोग भोग सब कुछ .चयन आपका है .खेल डॉलर का है .

7 टिप्‍पणियां:

रविकर फैजाबादी ने कहा…

भोग शिखर पर वे खड़े, कर्म शिखर पर राम |
सुख दोनों ही अहर्निश, भोग रहे अविराम |
भोग रहे अविराम, शाम से सुबह करें वे |
पुन: सुबह से शाम, जाम पर जाम भरें वे |
रविकर अपने राम, कर्म कोसमझें पूजा |
यही परम सुख धाम, नहीं घर खोजूं दूजा ||

Maheshwari kaneri ने कहा…

हमें तो अपना देश ही अच्छा लगता है..

दिगम्बर नासवा ने कहा…

अमेरिका का ये शहर अपने आप में अनोखी दुनिया समेटे हुवे है ... २४ घंटे जिन्दा रहता है ये शहर .. राम राम जी ...

सदा ने कहा…

सार्थकता लिए सटीक लेखन ... आभार

Rajesh Kumari ने कहा…

आपकी इस सुन्दर प्रविष्टि की चर्चा कल २४/७/१२ मंगल वार को चर्चा मंच पर चर्चाकारा राजेश कुमारी द्वारा की जायेगी आप सादर आमंत्रित हैं

Rakesh Kumar ने कहा…

लास वेगास देखने का मौका मुझे हाल में ही मिला.
पहाड़ी,पथरीले वीरानों में जिस तरह से
भोग नगरी बसाई गयी है,वह दुनियाभर के
लोगो को आकर्षित करने के लिए ही है.

अच्छा चित्रण किया है आपने लॉस वेगस का.

Kailash Sharma ने कहा…

बहुत रोचक प्रस्तुति...