रविवार, 9 अक्तूबर 2016

सुखी रहो निंदक जग माहिं, रोग न हो तन सारा , हमरी निंदा करने वाला ,उतरे भवन विसारा। साधौ निंदक मीत हमारा।

सुखी रहो निंदक जग माहिं, रोग न हो तन सारा ,

हमरी निंदा करने वाला ,उतरे भवन विसारा।

साधौ   निंदक मीत हमारा।

निंदक के चरणन  की अस्तुति ,बांथों बारंबारा ,

चरण दास कहें सुनिये साधौ ,निंदक साधक भारा।

https://www.youtube.com/watch?v=5QaXuFrVcj0

sadhu nindak mitra humare//rajendra das ji maharaj//sant mahima



2 टिप्‍पणियां:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि- आपकी इस प्रविष्टि के लिंक की चर्चा कल सोमवार (10-10-2016) के चर्चा मंच "गंगा पुरखों की है थाती" (चर्चा अंक-2491) पर भी होगी!
दुर्गाष्टमी और श्री राम नवमी की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा…

साधौ निंदक मीत हमारा...........जैसा भी है, तू हमको प्यारा