गुरुवार, 13 अक्तूबर 2016

जेएनयू राष्ट्रविरोधी -लिवर कैंसर से ग्रस्त है

बरसों से ,महाभारत काल और उससे भी बहुत पहले से दिल्ली भारत की राजधानी रही है कभी हस्तिनापुर और कभी इंद्रप्रस्थ कहलाती हुई। आज उसी दिल्ली का केंद्र  जेएनयू राष्ट्रविरोधी -लिवर कैंसर से ग्रस्त है। लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की आज़ादी का यह अर्थ नहीं है आप लोकतंत्र को ही नष्ट कर दो ,आपको आत्मघात की छूट नहीं दी जा सकती माना की जनेऊ राष्ट्रविरोधी गतिविधियों की प्रयोग भूमि है। पर इसका अर्थ यह नहीं है आप कहें मैं तो अपने घर को ही आग लगाऊंगा ,इससे पहले कि देश को और नुक्सान पहुंचे राष्ट्रविरोधी लिवर कैंसर के इस केंद्र नष्ट करना ज़रूरी है। इलाज़ इसका कुछ हो नहीं सकता। विज्ञान भी लिवर कैंसर से निजात नहीं दिलवा सका है ,यहां तो रोग इसके अंग प्रत्यंग तक पसारा पसारे हुए है।

लखनऊ में मोदी के पुतले का दहन इसी आलोक में देखा जाना चाहिए।

Virendra Sharma http://naidunia.jagran.com/national-in-jnu-pm-effigy...
पुतला दहन से पहले एनएसयूआइ के नेता सनी धीमान ने छात्रों को संबोधित किया था।
NAIDUNIA.JAGRAN.COM
Virendra Sharma रावण की लंका जेएनयू में ऐसा होना अनहोनी नहीं है। ये कट्टरपंथी इंतहा पसंदों का गढ़ है। यहां आकर राहुल भी कन्हैया की गोद में खेलते रहे हैं। रक्तरंगी लेफ्टियों से रूस से पल्ला छुड़ाकर दहशदगर्दों के नुमाइंदों का पल्लू थाम लिया है यह भी आकस्मिक नहीं है। लेफ्टियों को पैसा चाहिए ,कहीं से भी मिले।
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1 टिप्पणी:

savan kumar ने कहा…

सहीं कहाँ आपने