रविवार, 29 जनवरी 2012

जी हाँ पीने  वालों को तो बस पीने का बहाना चाहिए लेकिन ....
हकीकत कुछ और है .भले बीअर को लेकर जनमानस में यह भ्रांत धारणा चल निकली है कि बीयर गुर्दे की पथरी से राहत दिलवाती है .भले इसमें एल्कोहल की मात्रा कमतर रहती है लेकिन लेदे कर स्टाउट  बीअर्स (Stout beers)  को छोड़ दें तो जो केल्सियम को जमा  होने  से रोकतीं हैं तथा पथरी  बनने की दर को ३० -३५%तक कम करतीं हैं (एक अमरीकी अध्ययन )  तब शेष बीअर जो प्युराइन(Purine) से युक्त रहतीं हैं,यूरिक एसिड से बनने वाली पथरी के खतरे को उलटा बढ़ाती ही हैं .यही कहना है मुंबई के मशहूर मूत्र रोग विज्ञानी (यूरोलोजिस्ट )डॉ मनीष बंसल साहब का .
क्या     है स्टाउट बीअर जानिएगा   ?  क्या  है स्टाउट बीअर ?अंकुरित जौं  को भाड़ में भूनके रोस्ट करके तैयार की जाती है .
It is a dark strong beer ,a strong very dark ,almost black beer made from roasted malted barley.Malt is a grain used to make alcoholic drinks, grain such as barley that has begun germination by being soaked in water. 
माहिरो  के अनुसार चाय कोफी और संतरे का जूस भी गुर्दे की पथरी को घुलाकर निकाल बाहर करने में उतना ही कारगर सिद्ध होता है जितना की बहुप्रचारित बीअर .
एक मिथ चल पड़ा है -एलकोहल(शराब ) दिल के लिए अच्छी होती है . माहिरों के अनुसार यह विवाद का विषय है .पब्लिक हेल्थ फाउनदेशन  की मलिका अरोरा कहतीं हैं ऐसा दावा भारतीय आबादी के लिए नहीं किया जा सकता कि शराब दिल के लिए मुफीद रहती है .भारतीयों को इसके कार्डियोवैस्क्युलर फायदे मिलते नहीं देखे गएँ हैं .यह नतीजा उस अध्ययन से निकला जो अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ,नै दिल्ली तथा पब्लिक हेल्थ फाउनदेशन ने २०१० में भारत के दस नगरों के ४००० भारतीयों पर संपन्न किया था . इस अध्ययन में पीने वालों की तुलना न पीने वालों से की गई थी .
कार्डियोवैस्क्युलर माने हृदय और ब्लड वेसिल्स से सम्बंधित .
  बात साफ़  है पीने वा... लों को पीने का बहाना चाहिए  . आज     मैं    बहुत    खुश  हूँ  इसलिए  पी  रहा  हूँ  कल  मैं  बहुत  दुखी  था इसलिए  पी  गया ,परसों मेरे  भांजे  की शादी    थी इसलिए   थोड़ी   सी   पी   ली   थी .
आइये  देखें  यू . के. हाउस  ऑफ़  कोमंस (UK HOUSE OF COMMONS) की ताज़ा  सलाह  क्या है शराब पीने के बारे  में ? 
हाउस  ऑफ़  कोमंस  ने ब्रिटेन  वासियों  को शराब से कमसे  कम सप्ताह  में दो  बार  परहेजी  रखने  के लिए कहा है .और यह सलाह  इसलिए  दी  गई है, शराब सारी हमारे  यकृत  (लीवर  )से होकर  जाती है ताकि  लीवर  को दो  दिन  आराम  मिले  नुकसानी  की भरपाई  के लिए थोड़ा  सा  वक्त  मिले  .
पहले कहा  गया था -रोजाना  एक दो  पेग  लिए जा सकतें  हैं .
तो ज़नाब  शराब न दिल  के लिए अच्छी  है न मधुमेह  से बचाती  है न गुर्दे की पथरी से बीअर हिफाज़त  करती  है महज़  मिथ हैं यह .निश्चयात्मक  कुछ भी नहीं कहा जा सकता .अलबत्तादिल के बहलाने को 'ग़ालिब    'ये ख्याल बहुत अच्छा है -
ज़िन्दगी जीने को दी ,तो जी मैंने ,
किस्मत में लिखा था पीना ,तो पी मैंने ,
और मैं न पीता  तो तेरा लिख्खा गलत हो जाता ,
तेरे लिखे को निभाया ,ये खता की मैंने .
और आज एक मौजूं शेर हो जाए -
जाम को टकरा रहा हूँ जाम से ,
खेलता हूँ गर्दिशे ऐयाम से ,
(और) उनका गम ,उनका तसव्वुर ,उनकी याद ,
अरे !कट रही है ज़िन्दगी आराम से .
इसकी पलट भी देखिये -
पूछना है गर्दिशे ऐयाम से ,
अरे !हम भी बैठेंगें कभी ,आराम से .

17 टिप्‍पणियां:

काजल कुमार Kajal Kumar ने कहा…

पीने वालों को तो बस पीने का बहाना चाहिए ☺

डा. अरुणा कपूर. ने कहा…

शराब से दूर ही रहना चाहिए!..उम्दा पोस्ट!

यादें....ashok saluja . ने कहा…

वीरू भाई ,,आज की शायरी मूड बना गई !
पेश है ..
न करता शिकायत जमाने से कोई
अगर मान जाता मनाने से कोई
न मेरी निगाहों से सागर छलकते
जो तौबा न करता पिलाने से कोई ||

आदाब ...:-))))

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

पथरी न सही, कोई और बीमारी ठीक कराने का बहाना ढूढ़ लेंगे लोग...

sushma 'आहुति' ने कहा…

प्रभावशाली प्रस्तुती....

Bharat Bhushan ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
Bharat Bhushan ने कहा…

पीने वालों की जान खाने वाली रचना. आपकी पोस्ट पढ़ते-पढ़ते नशा आ गया. बहुत खूब वीरूभाई जी.

रेखा ने कहा…

शराब नुकसानदेह है यह जानते हुए भी लोग इसे पीते हैं ...सचेत करती हुई पोस्ट ,आभार

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति
आपकी इस सुन्दर प्रविष्टि की चर्चा कल दिनांक 30-01-2012 को सोमवारीय चर्चामंच पर भी होगी। सूचनार्थ

मनोज कुमार ने कहा…

इसे पढ़ने के बाद लगा कि मैं एक सदाबहार उत्तेजना महसूस कर रहा हूं।

Kunwar Kusumesh ने कहा…

किसी का एक शेर याद आ गया:-
शराबे-इश्के-नबी की भी है अजब तासीर,
कि बढ़ता जाता है ईमान इसके पीने से.

सदा ने कहा…

बेहतरीन प्रस्‍तुति ।

Ranbir Singh ने कहा…

शौक और शरीरक्रिया विज्ञान में फर्क नहीं कर सकने वाले लोग यहाँ दी गयी अन्य टिप्पणिओं को देख कर भी बहुत कुछ समझ जायेंगे. लेकिन मूत्राश्मरताके लिये वरुण पेड़ की छाल से बनने वाले काढे से उत्कृष्ट दावा संसार मैं मैनें न तो अभी तक पढ़ी है और न सुनी है. जिस किसी को गुर्दे अथवा पेशाब की नाली मैं पथरी की शिकायत है उसे यह काढ़ा देने से पथरी स्वयमेव घुल कर बिना दर्द किये हुए बाहर निकल आती है और पुनः संश्लेषित नहीं होती... आजीवन प्रकट नहीं होती. लेकिन काढ़ा तो एक प्रकार की रामबाण दावा समझिये जिसे बनाने की विधि वैद्यों को ज्ञात होती है. उनकी सलाह के बिना दावा नहीं लेनी होती है.

SM ने कहा…

one should avoid it and if can not then it should be limited and controlled.
nice post

anju(anu) choudhary ने कहा…

सार्थक पोस्ट ...बहुत खूब
पीने वाले हर मौका खोज लेते हैं
बस इंतज़ार करते हैं किसी भी बहाने का
मना करो तो ,दुहाई देंगे
अपने गमे-दस्तानो का ....

पीने दो यार ...आज गम में हूँ
जीने दो मुझको ..
जीने का हक मुझको भी हैं
ये हक मुझ से मत छीनो .....(एक पीने वाले के कुछ शब्द जो कभी सुने थे ..आज लिख दिए )

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

Kitne hi Bahane hon.... Schet rahna bhi zaroori hai...

dheerendra ने कहा…

पीने वालों को पीने का बहाना चाहिए,..शराब क्या कोई भी नशा हो सब सेहत के लिए नुकसांन दायक है
उपयोगी ...बहुत सुंदर प्रस्तुति अच्छी लगी.,
welcome to new post --काव्यान्जलि--हमको भी तडपाओगे....