शुक्रवार, 13 जनवरी 2012

मानव रचित विश्वव्यापी तापन मुल्तवी रख सकता है घातक हिम युग को .

जनवरी १३ ,२०१२ . मानव रचित विश्वव्यापी तापन मुल्तवी रख सकता है घातक हिम युग को .
Manmade global warming could defer 'lethal'Ice Age' Next Glaciation is Due To Start Within 1,500 Years/TIMES TRENDS /THE TIMES OF INDIA,MUMBAI ,JANUARY 10,2012,P15.
केम्ब्रिज विश्वविद्यालय के साइंसदानों के मुताबिक़ जिस हिम युग की संभावित वापसी अब से कोई १५०० साल बाद होनी थी वह मुल्तवी हो सकती है .मानव का कार्बन फुटप्रिंट मानव निर्मित कार्बन उत्सर्जन इसकी वजह बनेगा .मानव निर्मित विश्वव्यापी तपन वायु मंडल में अब तक दाखिल हो चुकी कार्बन डाई ऑक्साइड घातक हिम युग को थामे रहेगी .हिम नदों का प्रसार अब अपनी सामान्य अवधि के बाद योरोप और उत्तरी अमरीका को अपनी गिरिफ्त में न ले पायेगा .
बेशक लोग थोड़ी तपन में बेहतर रहेंगें .लेकिन असल बात कुछ और है जिसे हम अभी समझ नहीं पा रहें हैं .माहिरों के अनुसार अब यदि कार्बन उत्सर्जन पर लगाम भी लगा दी जाए तो भी इस ग्रीन हाउस गैस का अतिरिक्त रूप से बढ़ा हुआ स्तर आइन्दा आने वाले हज़ार साल तक यूं ही कायम रहेगा .संचित तपन (गर्मी या ऊष्मा ) अगले हिम युग को टाले रहेगी .
बेशक थोड़ा बहुत तपन कम ज़रूर होगी उत्सर्जन थाम लेने से लेकिन उतना नहीं कम होगी यह विश्वव्यापी तपन .
अलबत्ता पृथ्वी पर धुर ठंडक हिमनदों के प्रसार से न होने पाएगी .हिमनदन (Glaciation )मुल्तवी ही रहेगा .फिलवक्त हमारी हवा में प्रति -दास लाख भागों में ३९० भाग ग्रीन हाउस गैस कारबनडायऑक्साइड मौजूद है .माहिरों के अनुसार अगले हिम युग की वापसी के लिए इस स्तर को घटाकर २४० पी पी एम् (पार्ट्स पर मिलियन ) तक लाना होगा .
सवाल यह है क्या हम तपन भरे विश्व में बेहतर होंगें या हिमनदन के साथ ?
हो सकता है ज़वाब सकारात्मक हो लेकिन तथ्य यह है कि यदि उत्सर्जन आज के स्तर पर भी थाम लिया जाए और आगे न बढ़ने दिया जाए तब हिमनदन के बीच का अंतराल बेशक लंबा हो जाएगा अपेक्षाकृत तपन भरा ही रहेगा .यानी इंटर ग्लेशियेशन पीरियड लंबा खिंच जाएगा .हिमनदन के बीच का यह अंतराल अपेक्षाकृत गर्म रहता है .
"इंटर -ग्लेशियल " पीरियड्स आर वार्मर पीरियड्स बिटवीन पीरियड्स ऑफ़ ग्लेशियेशन .
आखिरी हिम युग हमारे पूर्वजों ने अब से कोई ११,५०० बरसपहले देखा था .इस हिमनदन चक्र का सम्बन्ध पृथ्वी कीसूरज के गिर्द कक्षा में होने आने वाला थोड़ा सा विक्षोभ भर होता है .हिम युगों के दौरान हिमनदों का प्रसार महाद्वीपों में व्यापक स्तर पर प्रसार पाता है .
आखिरी हिम युग के दौरान योरोप का एक बहुत बड़ा हिस्सा एशिया और उत्तरी अमरीका हिमाच्छादित हो गए थे .हिम चादर में लिपट के रह गए थे .हिमनदन के विनाशकारी प्रभाव मानव सभ्यता पर पडतें हैं .लेकिन हम किधर जा रहें हैं .असल बात यह है हम पहले से ही गरमा चुकी कायनात ,सारे आलम को और भी गरमा रहें हैं काश हम मौजूदा तपन को ही कायम रख पाते .लेकिन तमाम जलवायु परिवर्तन से ताल्लुक रखने वाली गुफ़ -त -गु निष्फल सिद्ध हो रही है कोरी लफ्फाजी साबित हो रही है .वार्मर क्लाइमेट में और कार्बनडायऑक्साइड झोंकते चले जाने और कोल्ड क्लाइमेट में ऐसा करना दो जुदा बातें हैं .क्या कोई सुन रहा है ?
RAM RAM BHAI ! RAM RAM BHAI! RAM RAM BHAI!
HEALTH TIPS :
अवसाद से और अवसाद में राहत के लिए चाय -कोफी के स्थान पर १५ ग्राम गुलाब के फूल की पंखुड़ियां (Rose petals) 250 मिलीलीटर पानी में उबालकर लीजिए .
जो बच्चे(शिशु ) रात को शैया पर आराम से नहीं सो पातें उन्हें दो चम्मच शहद एक ग्लास पानी में मिलाकर सोने से पहले दीजिए .
ram ram bhai ! ram ram bhai !

लीजिए आज का नीतिपरक दोहा -
पावस देखि रहीम मन ,कोइल साधेइ मौन ,
अब दादुर वक्ता भये ,हमको पूछत कौन .
बरसात में मेढक टर्राना शुरु कर दतें हैं .जैसे चुनाव पूर्व दिग्विजय .ऐसे में बुद्धिमान प्राणियों को मौन धारण करना चाहिए .फिर अवसर आयेगा अपनी बात कहने का .कोई सुनने वाला भी तो हो इसलिए अवसर देख के अपनी बात कहिये मौके की , यहाँ तो हर तरफ दिग्विजय हैं टर्र टर्र टर्राते बरसाती मेढक से .यहाँ पावस वर्षा ऋतु के लिए आया है और दादुर कहतें हैं मेंढक को .

5 टिप्‍पणियां:

यादें....ashok saluja . ने कहा…

वीरू भाई राम-राम !
दोहा और दोहे के भावार्थ सब सही जगह ,सही समय
पर फिट हो रहें हैं !
बधाई !

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

हाँ, जब इतनी आग लगा दी तो बर्फ कैसे आयेगी?

Rakesh Kumar ने कहा…

वीरू भाई बहुत सुन्दर जानकारी प्रस्तुत की है आपने.अवसाद का नुस्खा लाजबाब है.
दोहे के तो कहना ही क्या.
बेचारे दिग्गी बाबू,
अब तो तुम्हे मेंढक बनना ही पड़ेगा.

राम राम भाई.

SM ने कहा…

yes we humans and politicians will destroy the earth.

Amrita Tanmay ने कहा…

रोचकता लिए बढ़िया पोस्ट के लिए आभार..