बुधवार, 18 जनवरी 2012

आखिर नेट लती होने का मतलब क्या है ?

आखिर नेट लती होने का मतलब क्या है ?
Net addicts 'brains like cocaine users .Most are gamers who get so involved they go without food and water for extended periods/TIMES TRENDS/THE TIMES OF INDIA,JANUARY 15,2012 P19.
पहली मर्तबा इंटरनेट की लत का सम्बन्ध दिमाग में दर्ज़ होने वाले उन बदलावों से जोड़ा गया है जो उन लोगों के दिमाग में दर्ज़ किए गए हैं जिन्हें शराब ,कोकेन और केनाबिस जैसे नशीले पदार्थों की लत पड़ चुकी होती है .
रिसर्चरों ने अपने एक हालिया अध्ययन में एम् आर आई स्केनर्स से उन किशोर किशोरियों के दिमाग का अवलोकन अध्ययन किया है जिन्हें इंटरनेट की लत इस कद्र पड़ जाती है कि उनकी सामाजिक और व्यक्तिगत ज़िन्दगी भी इससे असर ग्रस्त होने लगती है .अध्ययन से इनके व्यवहार से जुडी अन्य समस्याओं पर भी रोशनी पड़ सकती है .इलाज़ की एक नै दिशा भी यहीं से हाथ लग सकती है .
समझा जाता है ५-१० फीसद नेट यूज़र्स को इसकी लत पड़ जाती है .जिसका सीधे साधे शब्दों में अर्थ यह है कि वह इसके स्तेमाल को चाहें तो भी रोक नहीं पातें हैं .ऐसे में इन्हें न खाने का होश रहता है न पीने का .घंटों ये इंटरनेट गेम्स में उलझे रहते हैं .जिससे इनकी शिक्षा इनका व्यवसाय सामाजिक सम्बन्ध सभी असर ग्रस्त होतें हैं .इनमे ज्यादातर गेम्स प्लेयर्स ही होतें हैं .
माहिरों के अनुसार ऐसे में ये ज़िन्दगी के ज़रूरी तकाज़े अपनी यूनिवर्सिटी एज्युकेशन भी पूरी नहीं कर पातें हैं .इनके वैवाहिक सम्बन्ध इसलिए टूट जातें हैं क्योंकि ये गेम्स के अलावा और किसी चीज़ से कनेक्ट नहीं कर पाते खुद को .गेम्स गेम्स और बस गेम्स .यही कहना है Henrietta Bowden Jones का .आप इम्पीरियल कोलिज में सलाहकार मनोविज्ञानी हैं .आप ब्रिटेन भर की अकेली क्लिनिक NHS चलातें हैं .
यह पूरी तरह इंटरनेट एडिक्ट्स को समर्पित क्लिनिक है .
बेशक आबादी का एक बड़ा हिस्सा आज ऑन लाइन काफी समय बिताता है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है ये तमाम लोग नेट लती हैं .ये एक दम अलग मुद्दा है .यह तो आज धंधा धौरी कामकाज से जुडी ज़रूरी रवायत है .आज कितने ही व्यावसायिक सामाजिक तकाजों के लिए नेट से जुड़ना पड़ता है .लेकिन यह सब एक ओबसेशन के तहत नहीं होता है और न ही होना चाहिए .
लेकिन अगर कोई आप से आकर यह कहे मैं कल रात सो न सका .१४ घंटा तक गेम्स ही खेलता रहा .परसों भी मेरे साथ ऐसा ही हुआ था .अब ऐसे में ये चाह कर भी इस लत से जब हट न सकें अपना पिंड न छुडा सकें गेम्स से तब यह एडिक्शन है .इंटर नेट लत है .
चीन में रिसर्चरों ने ऐसे ही १७ इनर- नेट लतियों के दिमाग के स्केन लिएँ हैं .ये तमाम किशोर अवस्था के लोग थे इन्हें बाकायदा इंटर नेट एडिक्शन डायग्नोज़ किया गया है रोग निदान के बाद .इसे इंटर नेट एडिक्शन डिसऑर्डर कहा गया है .इनके स्केन का मिलान इनके १६ अन्य हमजोलियों से किया गया .इन्हें शंघाई मेंटल हेल्थ सेंटर देख रेख के लिए भेजा गया है .
पता चला इनके दिमाग में White matter fibres की विशेष क्षति हुई है .ये दिमाग के उन हिस्से में हुई है जिनका सम्बन्ध संवेगों के संशाधन ,ध्यान एक जगह टिकाने संकेंद्रित करने ,लगाने से रहता है .फैसले लेने और बोध सम्बन्धी या संज्ञानात्मक नियंत्रण के कामों से ,रहता है .
ठीक ऐसे ही बदलाव वाईट मेटर में उन लोगों के दर्ज़ किए गएँ हैं जिन्हें एल्कोहल और कोकेन जैसे मादक पदार्थों की लत पड़ जाती है .अखबार THE INDEPENDENT ने इस पूरी रिपोर्ट को प्रकाशित किया है .
राम राम भाई ! राम राम भाई !
सेहत के नुश्खे :
HEALTH TIPS :
ज्यादा पी ली हो तो रात के नशे पत्ते के बाद के हेंगओवर से निजात के लिए नाश्ते में बेकन सैनविचिज़ (सूअर की पीठ या बगल के भुने हुए नमक लगे गोश्त से तैयार किया गया सैन -विच )लें .एक तरफ बेकन प्रोटीन ज़रूरी अमीनो अम्लों में टूट जाएगी दूसरी तरफ ब्रेड आपको कार्बोहाईड्रेट्स मुहैया करवाएगी .शाकाहारी लोगों को शहद लगे सैन -विच और गर्म दूध से काम चलाना चाहिए .कार्बोहाईड्रेट बहुल खुराक हेंगओवर में राहत दिलवाती है .
A bacon sandwich cures hangovers .The bread has the carbohydrates you need and the bacon's protein breaks down into amino acids.
Posted 18th January by veerubhai


लम्बी उम्र के लिए खबरों की खबर रखिये .
लम्बी उम्र के लिए खबरों की खबर रखिये .

'Stay in touch with news & you are sure to live longer /TIMES TRENDS /THE TIMES OF INDIA,MUMBAI /JANUARY 16 ,2012/P17

एक नवीनतर शोध से इल्म हुआ है कि जो लोग टी वी अखबार या इंटरनेट के मार्फ़त देश -विदेश की नवीनतम जानकारी रखतें हैं ख़बरों की खबर हर स्रोत से लेते रहतें हैं वह ज्यादा स्वास्थ्य सचेत पाए जातें हैं .उनकी खुराक भी हेल्दी के तहत आती है .

सेक्रेड हार्ट, रोम की केथोलिक यूनिवर्सिटी के रिसर्चरों ने संपन्न किया है यह अध्ययन जिसके अनुसार दीर्घजीवी होने का कारगर नुश्खा है ख़बरों की खबर रखना .

5 टिप्‍पणियां:

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

बहुधा स्वयं को रोकने का प्रयत्न करता हूँ..

Urmi ने कहा…

बहुत बढ़िया लगा! सुन्दर पोस्ट!

डॉ0 ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ (Dr. Zakir Ali 'Rajnish') ने कहा…

Aabhaar.

रेखा ने कहा…

अच्छा सुझाव दिया है आपने ....सार्थक पोस्ट

डॉ टी एस दराल ने कहा…

सबसे ज्यादा लत तो फेसबुक पर नज़र आती है । लोग जागने से लेकर सोने तक की सारी बातें मिनट मिनट में डालते रहते हैं । ऐसा करने वालों में बच्चे ही नहीं बड़े भी हैं ।