रविवार, 27 नवंबर 2011

मुक्तावली सम्बन्धी समस्याओं(Dental problems) के लिए कुसूरवार है आजकल की खुराक .

मुक्तावली सम्बन्धी समस्याओं(Dental problems) के लिए कुसूरवार है आजकल की खुराक .
आजकल की दन्तावली से जुडी समस्याओं के लिए दांतों के माहिरों ने आधुनिक खुराक को कुसूरवार ठाह्राया है .रिसर्चरों के अनुसार आजकल की सोफ्ट खुराक जबड़ों को दांतों के बरक्स लघुतर बनाती जा रही है .जिसका मतलब है मुंह में भीड़ बढ़ रही है .अखबार डेली टेलीग्राफ ने इस रिपोर्ट को प्रकाशित किया है .
इस निष्कर्ष पर पहुँचने के लिए रिसर्चरों ने भूमंडलीय स्तर पर ११ अलग अलग पोप्युलेशन के स्कल्स का हवाला जुटाया है .पता चला है जो लोग शिकार करके खाते हैं हंटर गेदरार जीवन शैली अपनाए रहें हैं उनके जबड़े अपेक्षाकृत लम्बे और संकरे पनपे (Narrower)पनपे हैं .
सन्दर्भ सामिग्री :शोर्ट कट्स (SHORT CUTS/'Modern diet the culprit behind dental problems'/TIMES TRENDS/THE TIMES OF INDIA,NEW-DELHI ED.P21)./NOv23,2011.
राम राम भाई !राम राम भाई !
अब एच आई वी पोजिटिव लोग भी संतान (एच आई वी निगेटिव संतान )पैदा कर सकतें हैं .
(NOW HIV+ men can have children:TOI,NOv23,2011 .SHORT CUTS).
ऑस्ट्रेलियाई रिसर्चरों ने दावा किया है उन्होंने कृत्रिम गर्भाधान कराने (Artificial insemination ) का एक ऐसा तरीका ईजाद कर लिया जिसे अपना कर एच आई वी पोजिटिव लोग भी अपनी संतानों और साथिन को संक्रमित किये बिना संतान प्राप्त कर सकेंगे ,बाप बन सकेगे .
दरअसल विक्टोरिया स्थित रोयल वूमेंज़ अस्पताल के चिकित्सकों ने एक ऐसा प्रोग्रेम तैयार किया है जिससे निषेचन (इनसेमिनेशन )के पूर्व ही स्पर्म से एच आई वी (विषाणु )को अलग किया जा सकेगा .इस प्रकार माँ और संतान दोनों को ही एच आई वी संक्रमण से बचाया जा सकेगा .
राम राम भाई !राम राम भाई !
प्रोधावस्था में मुटियाना(Middle age fat ) अल्ज़ाइमर्स के खतरे के वजन को बढा सकता है .
मिडिल एज फेट आगे चलकर बुढापे के आम डिमेंशिया अल्ज़ाइमर्स की संभावना को बढा सकती है जबकी बुढापे में ओवरवेट हो जाना इसकी संभावना को कमतर करता है एक नवीन अध्ययन से यही संकेत मिले हैं .
राम राम भाई !राम राम भाई !
बौअल कैंसर को टोह कर उसका सफाया करने वाली दवा .
रिसर्चरों ने एक ऐसी दवा ईजाद कर लेने का दावा किया है जो बौअल कैंसर को टोह कर उसका सफाया कर सकती है इसे २-in -1 bowel cancer drug कहा जा रहा है .समझा जाता है दवा के कोई पार्श्व प्रभाव भी सामने नहीं आयें हैं .
साइंसदानों की एक आलमी टीम के अनुसार दवा को ट्यूमर का पता लगाने में सिर्फ पांच मिनिट लगतें हैं .उसके बाद देखते ही देखते बस ट्यूमर का सफाया हो जाता है .नैदानिक परीक्षणों (क्लिनिकल ट्रायल्स )में इसकी पुष्टि हुई है
ram ram bhai

रविवार, २७ नवम्बर २०११
अच्छी नींद छुटकारा दिलवाती है दुखद यादों के दंश से .
केलिफोर्निया और बर्कले विश्वविद्यालय के रिसर्चरों ने पता लगाया है गहरी नींद से पैदा स्वप्न अवस्था (रैम अवस्था ,Rapid eye movement sleep )हमारे संवेगों ,मनो -आवेगों ,का संशाधन करके हमें दुखद यादों के दंश से मुक्ति दिलवा सकती है .ओवर -नाईट थिरेपी का काम करती है .वो कहतें हैं न वक्त सारे जख्म भर देता है अच्छी गुणवत्ता वाली नींद में गुजरा वक्त जादुई स्पर्श सा जख्मों को भरने वाला सिद्ध होता है .यादों को खंगालती है गहरी रैम अवस्था स्लीप उन्हें सही संदर्श और सन्दर्भ मुहैया करवाती है .कुछ ऐसे पुनर -समायोजित करती है री -एक्टिवेट करती है अच्छी नींद यादों को कि न्यूरो -केमिस्ट्री नींद की दुखद यादों का शमन करती ,स्ट्रेस न्यूरो -रसायनों का शमन करती दुखद यादोंअनुभवों के दंश से राहत दिलवाती है . माहिरों की यही राय है .
अध्ययन में शामिल 30 सेहतमंद युवाओं को रिसर्चरों ने दो वर्गों में विभक्त करने के बाद एक समूह के तमाम युवाओं को सुबह और शाम दो मर्तबा 150 संवेगात्मक छवियाँ दिखलाई .इस अंतराल में ये प्रतिभागी सचेतन जागृत अवस्था में ही रहे .छवियों को दिखलाने के बाद इनके दिमाग की सक्रीयता दर्ज़ करने के लिए MRI उतारे गए .
जबकि दूसरे वर्ग के तमाम लोगों को सिर्फ शाम को बाद उसके रात की नींद लेने के बाद अगली सुबह यही संवेगात्मक चित्र दिखलाए गए .फिर इनका चुम्बकीय अनुनाद चित्रांकन किया गया .
दूसरे समूह के तमाम युवाओं में कमतर साम्वेगात्मक प्रतिक्रियाएं दर्ज़ हुईं .
नींद का जादुई असर दिमाग के एक हिस्से Amygdala पर पड़ा .इस हिस्से की Reactivity बेहद कमतर हो गई . यही वह दिमागी हिस्सा है जो राग विराग संवेगों हमारे ज़ज्बातों सारी रागात्मकता Emotions का संशाधन ,processing करता है .
This allowed the brain's "rational"prefrontal cortex to regain control of the participants emotional reactions ,the researchers said .
ram ram bhai !ram ram bhai !
27 NOVEMBER,2011,4C,ANURADHA,NOFRA,COLABA,MUMBAI-400-005
न्यूरोन प्रत्यारोप से एक दिमागी विकार दुरुस्त हुआ .
(Researchers rebuild the brain 's circuitry /Mumbai mirror ,November 26,2011/P23,Brain stem cell transplant :Way to beat Parkinson's ?/THE TIMES OF INDIA ,NOVEMBER26,2011,MUMBAI,ED.P!9.)
एक दिमागी विकार होता है जिसमे दिमाग का आधारीय हिस्सा हाइपोथेलेमस एक हारमोन लेप्टिन के प्रति अनुक्रिया करना बंद कर देता है नतीज़न चय अपचयन की प्रक्रिया बेकार हो जाती है ,प्राणि मात्र को ऐसे में यह इल्म ही नहीं होता कि खाना कब बंद करना है भले पेट भर गया हो .नतीजा होता ओवरवेट होते चले जाना . यही वह हारमोन है जो Metabolism को Regulate करता है चयअपचयन का विनियमन करता है .दिमाग को तृप्ति और पेट भर जाने का एहसास कराता है .

लेकिन चूहों की उत्परिवर्तित किस्म (कुछ लेबोरेट्री रोदेंट्स )में इस प्रक्रिया के बाधित होने से इनमे Morbid obesity पैदा हो जाती है .न्यूरोन प्रत्यारोप से इस विकार को ही दुरुस्त किया गया है .अपने प्रयोगों में साइंसदानों ने विकार ग्रस्त दिमागी परिपथ को दुरुस्त करके चूहों के हाइपोथेलेमस को लेप्टिन का स्तेमाल करने योग्य बना दिया .इस एवज विकास की एक समुचित अवस्था में भ्रूण से सामान्यप्रकार्य करने वाले न्यूरोन लेकर रुग्न (बीमार ) म्युटेंट माइस के हाइपोथेलेमस में प्रत्यारोप लगाया गया . i
एक प्रकार से यह कोशिका स्तर पर हाइपोथेलेमस की दुरुस्ती का उदाहरण है .बेहतरीन मिसाल है .पहली मर्तबा किया गया करिश्मा है .दिमाग का बड़ा ही पेचीला इलाका है हाइपोथेलेमस जो हमारी भूख ,शरीर के तापमान ,यौन वृत्ति रूचि अरुचि ,आक्रामकता का निर्धारण और विनियमन करता है .चयअपचयन का विनियमन करता है .
उम्मीद की जाती है यही तरकीब न्यूरोन प्रत्यारोप एक दिन रीढ़ रज्जू की चोट ,spinal cord injury ,Autism ,Epilepsy ,Parkinson's और Hatington's disease का समाधान प्रस्तुत करेगी गौर तलब है आज की तारीख में आत्म विमोह (ऑटिज्म ),पार्किन्संज़ और हटिंगटन सिंड्रोम ला इलाज़ ही बने हुए हैं ..
एक अवधारणा की पुष्टि हुई है इस रिसर्च से वह यह कि नए न्यूरोन (दिमागी कोशिका )विकार ग्रस्त और पेचीला दिमागी सर्किटों (परिपथों )में समायोजित करके ऐसे सर्किटों को दुरुत किया जा सकता है .यह एक बड़ी बात है .

6 टिप्‍पणियां:

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

दाँत तभी असर नहीं कर पाते हैं, काट नहीं पाते हैं।

यादें....ashok saluja . ने कहा…

वीरुभाई राम-राम
हमेशा की तरह बढिया जानकारी .....
भाई जी ,मेरी आज सुबह की टिप्पणी गायब है ?
आभार!

डॉ टी एस दराल ने कहा…

बढ़िया जानकारियां ।
शहर में लोग कुल्ला करने में शरमाते हैं ।
यह भी एक कारण है डेंटल केरीज़ का ।

मनोज कुमार ने कहा…

आप जानकारी का खजाना लुटा रहे हैं और हम जी भर कर लूट रहे हैं।

veerubhai ने कहा…

प्रवीण भाई ,डॉ दराल साहब !आजकल लोग न गन्ना चूसतें हैं और न गाज़र मूली गोभी ही साबुत और कच्चा उतना खातें हैं .सब कुछ मिक्सी के हवाले हो गया है सरसों का साग भी जिसे चबा चबा कर खाना पड़ता था जो दांतों में फंसता था .खाना वही जो दांतों में फंसे .कुरेदनी मांगे .आजकल सब हलुवा है .

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ ने कहा…

सुन्दर प्रस्तुति