रविवार, 20 नवंबर 2011

अल्ज़ाइमर्स के खिलाफ संगर्ष में आपकी नाक भी मददगार सिद्ध हो सकती है .

अल्ज़ाइमर्स के खिलाफ संगर्ष में आपकी नाक भी मददगार सिद्ध हो सकती है .
(Your nose can help in fight against Alzheimer's )
बुढापे के लाइलाज बने रोग अल्ज़ाइमर्स रोग के खिलाफ जेहाद में अब हमारी नासिका भी एक ढाल बनके सामने आ सकती है .जर्मन साइंसदानों ने रोगनिदान हेतु एक ऐसा परीक्षण ईजाद किया है जोरोग के लक्षण प्रगट होने से सालों साल पहले ही रोग को भांप लेता है रोग निदान बतलादेता है कि आगे जाके रोग होगा ही होगा .दरअसल अल्ज़ाइमर्स के रोगियों की दिमागी कोशिकाओं में एक विषाक्त प्रोटीन ताऊ पाई जाती है .जर्मन साइंसदानों ने यही Toxic Protin Tau नासिका की स्लेश्मल झिल्ली में भी उन लोगों की नासिका में मौजूद रहने की पुष्टि की है जिन्हें आगे चलके रोग होने की आशंका बनी रहेगी .
कैंसर के खिलाफ जेहाद में कामयाबी हासिल कर पाना अभी वक्त लेगा.
कैंसर के खिलाफ जेहाद में कामयाबी हासिल कर पाना अभी वक्त लेगा. कितना ?इसका अभी कोई निश्चय नहीं .यह वक्फा दस साल का भी हो सकता है इससे ज्यादा भी हो सकता है .एक भारतीय मूल के साइंसदान ने अपने अध्ययन से पता लगाया है लाखों लोग यूं ट्यूमर लिए हैं लेकिन इनके रोग निदान में दसियों सालों का वक्त लग जाता है .ट्यूमर अपना सुराग आसानी से हाथ नहीं लगने देता .
वर्तमान में उपलब्ध रक्त परीक्षणों में रक्त संचरण में कुछ बायोमार्कर्स का पता लगाया जाता है यही वह पदार्थ होतें हैं जो कैंसर कोशायें देर सवेर रक्त प्रवाह में छोडती चलती हैं .
भारतीय मूल के ये विज्ञानी है प्रोफ़ेसर संजीव गंभीरहैं .आप स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय से जुड़े हैं .बकौल आपके एक कैंसर कोशा को ट्यूमर का आकार लेने में दसियों साल लग जातें हैं तब जाकर वह इन जैव -सकेतकों का स्राव ब्लड स्ट्रीम में छोडती है .यही बायोमार्कर्स स्क्रीनिंग में हाथ आतें हैं .
सन्दर्भ -सामिग्री :Cancer can go undetected for a decade ,says study/TIMES TRENDS /SHORT CUTS/TOI.,New-Delhi,NOV18,2011/p21.
क्या दफ्तर में आप उनींदे रहतें हैं ?यदि हाँ तो चौकन्ना रहने के लिए खाइए अंडे .
क्या दफ्तर में आप उनींदे रहतें हैं ?यदि हाँ तो चौकन्ना रहने के लिए खाइए अंडे .
बेशक अंडा सेहत के माहिरों द्वारा उतनी स्वीकृति प्राप्त नहीं कर सका है .खासकर एग यलो अंडे की पीली ज़र्दी कोलेस्ट्रोल का स्रोत समझी गई है .हमारे अश्थी रोग के माहिर ने हमें रोज़ एक अंडा खाने की सिफारिश की तो दिल के माहिर ने कहा भैया बाजरा खाओ केल्शियम की आपूर्ति के लिए .कभी हमने एक अन्य अध्ययन को खंगालते हुए पाया चिकनाई के माहिर कई पोषण विज्ञानी अंडे को उतना बुरा नहीं मानतें हैं जितना यह समझ लिया गया है .मैं कई ऐसे लोगों को जानता हूँ जो आम्लिट भी एग वाईट का ही बनवातें हैं एग यलो को अलग रख देतें हैं कोई और चाहे तो खाए .
अब साइंसदान एग यलो के गुण गायन में कह रहें हैं -यदि कामकाजी स्थल पर आप उनींदे रहतें हैं जब तब नैप के लपेटे में आते है तब चुस्त दुरुस्त चौकन्ने बने रहने के लिए बस एक अंडा रोज़ खाइए इसके सफ़ेद भाग में मौजूद प्रोटीन आप को सचेत बनाए रहेगी .
केम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के रिसर्चरों ने दम ख़म को बनाए रखने एनर्जी बूस्टर के रूप में चोकलेट्स बिस्किट्स और स्वीट्स में मौजूद कार्बोहाईद्रेतों (Carbohydrates) के बरक्स अंडे से प्राप्त प्रोटीनों को ज्यादा कारगर, असरकारी पाया है .रिसर्चरों का मकसद यह पता लगाना था कि कैसे पुष्टिकर तत्व दिमागी कोशाओं (न्युरोंस )को प्रभावित करतें हैं .यही न्युरोंस हमें चौकन्ना बनाए रहतें हैतथा ऊर्जा को ठिकाने लगातें हैं .
एक उत्तेजक स्तिम्युलेंत(Stimulant) होता है ओरेक्सिंन (Orexin) साइंसदानों ने अपने अध्ययन में एग वाईट में मौजूद प्रोटीन जैसा ही एक मिश्र जब ब्रेन सेल्स पर आजमाया तब पता चला वह इस उत्तेजक पदार्थ के उत्पादन को उकसा देता है .जबकि शक्कर (Sugar)इसके स्राव को बाधित करती है .
शोध के अगुवा साइंसदान डॉ .डेनिस बुर्दाकोव कहतें हैं आपकी कलाकारी इसमें है कैसे आप इन चुनिन्दा कोशिकाओं को चुनिन्दा खाद्यों से अधिकाधिक कारगर बनाएं ट्यून करें इन्हें दुरुस्त रहने के लिए .मान लीजिए आपके सामने नाश्ते में दो विकल्प रखे जातें हैं :
(१)जैम लगे टोस्ट .
(२)एग वाईट से सने टोस्ट .
आपकी बुद्धिमानी यह है आप दूसरा विकल्प चुनें .बेशक दोनों में केलोरीज़ का लोड यकसां हो .प्रोटीन को भांप आपका शरीर प्राप्त केलोरीज़ की ज्यादा से ज्यादा खपत को उकसाएगा .शोधार्थियों ने यह भी पता लगाया है कि अंडे में जिस किस्म का कोलेस्ट्रोल पाया जाता है उससे दिल की बीमारियों का ख़तरा न्यूनतर रहता है . पूर्व में संपन्न शोध से भी ऐसी ही ध्वनी आई थी अपने काम पर अंडा खाके निकलिए .मान्यता के विपरीत यह स्वास्थ्यकर फ़ूड के तहत आयेगा .
सन्दर्भ -सामिग्री :Have eggs to stay alert at work (PTI)./TIMES TRENDS /THE TIMES OF INDIA ,NEW-DELHI,NOV18,2011/P21.

6 टिप्‍पणियां:

रेखा ने कहा…

बहुत लाभदायक और उपयोगी जानकारी ....

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

नाक को पहले से भनक लग जाती है।

काजल कुमार Kajal Kumar ने कहा…

हम्म तो नाक की सूंघने की आदत यहां भी काम कर रही है

मनोज कुमार ने कहा…

बहुत ही ज्ञानवर्धक आलेख।

Tv100 ने कहा…

very useful information!

डॉ टी एस दराल ने कहा…

दुर्लभ जानकारियां ।
बहुत बढ़िया ।