रविवार, 6 नवंबर 2011

अहेतुक यौन सम्बन्ध युवतियों और किशोरियों में बढा रहें हैं सर्विक्स कैंसर के मामले .

अहेतुक यौन सम्बन्ध युवतियों और किशोरियों में बढा रहें हैं सर्विक्स कैंसर के मामले .
जब से ब्रितानी समाज में सर्विक्स कैंसर की व्यापक स्क्रीनिंग शुरु हुई है तब से एक तरफ महिलाओं में सर्विक्स के कुल मामले एक तरफ लगातार कम हुए हैं लेकिन दूसरी तरफ अहेतुक यौन सम्बन्धों (केज्युअल सेक्स )के चलते युवतियों में ऐसे मामलों में वृद्धि हुई है .
कम उम्र कमसिन युवतियों में अहेतुक यौन सम्बन्ध इस अप्रत्याशित वृद्धि की गत दो दशकों से एक बड़ी वजह बना हुआ है .इसी के चलते बीसम बीस साला युवतियों में १९९२ -२००६ के दरमियान कैंसर के मामलों में ४३ %इजाफा हुआ है .
बतलादें आपको -सर्वाइकल कैंसर (गर्भाशय गर्दन कैंसर ,गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर ) ह्यूमेन पेपिलोमा वायरस की उस स्ट्रेंन की वजह से होता है जो स्त्री -पुरुष मैथुन के दौरान अंतरित होता है .अहेतुक सेक्स के चलते
,20 -29 साला युवतियों में प्रत्येक हज़ार के पीछे सन १९९२ -२००६ की अवधि में सर्विक्स कैंसर की दर ५.५ से बढ़कर ७.९ हो गई .दूसरे शब्दों में इस उम्र की युवतियों में इस कैंसर के मामले इस बीच २१५ से बढ़कर प्रति हज़ार महिलाओं के पीछे २८३ तक पहुँच गए .
दूसरी और सर्वाइकल स्क्रीनिंग शुरु होने के फ़ौरन बाद में बरसों में सर्वाइकल कैंसर के मामले एक दम से कम हुए .लेकिन १९९० के दशक के लगते ही बीसम बीस साला युवतियों में ऐसे मामलों में वृद्धि भी दर्ज़ होती गई .
अध्ययन के अगुवा रॉबर्ट अल्स्टोंन इसकी पुष्टि करतें हैं .
इसी के साथ यौन संबंधों से संचारित होते रोगों में होने वाली बढ़ोतरी इस और इशारा करती है कि अधिकाधिक युवतियां असुरक्षित यौन सम्बन्ध बना रहीं हैं और वह भी एक से ज्यादा यौन सखाओं के संग .
Head of health information and evidence at Cancer Research UK के मुखिया Hazel Nunn जिन्होनें इस अध्ययन को अनुदान मुहैया करवाया है ऐसा ही मानतें हैं .
राम राम भाई !राम राम भाई !
बेहद रचनात्मक होतें हैं बाईपोलर इलनेस के सताए लोग .
अरस्तु ने एक मर्तबा कहा था बिना किसी सनक और पागलपन के कोई महान पुरुष पैदा होता नहीं देखा गया है .मनोरोगों के माहिर मनश्चिकित्सक आज इस यूनानी दार्शनिक से इत्तेफाक रखतें हैं .रिसर्चरों ने अपने एक अध्ययन में उन तीन लाख लोगों के व्यवसाय पर नजर डालने के बाद जो मानसिक रोगों का इलाज़ करवाने अस्पतालों में आये थे नतीजा निकाला हैइनमे से जो बाईपोलर डिसऑर्डर (बाईपोलर- इटी,Bipolarity) से ग्रस्त थे उनके रचनात्मक व्यवसायों ,क्रिएटिव और परफोर्मिंग आर्ट्स से जुड़े होने की संभावना अधिकतम थी .ये डिज़ाईनर भी हो सकते थे ,आर्टिस्ट भी ,संगीतकार और लेखक भी ,यूनिवर्सिटी टीचर भी .
मेनिक डिप्रेशन या बाईपोलर इलनेस की चपेट में तकरीबन आबादी का आलमी स्तर पर १% हिस्सा आया हुआ है .
मूड स्विंग्स (Swings in mood ) ,This now that then पल में तौला पल में माशा .एक पल में आपे से बाहर इन्फ्लेतिद इगो (infletid ego ),दूसरे ही पल एक सामान्य व्यक्ति से साक्षातकार . अलावा इसके
जिन लोगों का इलाज़ और प्रबंधन Schizophrenia के लिए किया जा रहा था उनके भाई बंध भी रचनात्मक कामों से सम्बद्ध पाए जाने की संभावना मुखर थी .
British journal of psychiatry में प्रकाशित हुए है इस अध्ययन के नतीजे .
बेहद के रचनात्मक लोगों में मनोरोगों की ,Psychopatholojy की दर Disproportionate ,Unequal or out of proportion in quantity पाई गई है .Johns Hopkins University of Medicine के प्रोफ़ेसर के रेड्फील्ड ऐसा ही मानते हैं .अखबार इनडिपेंडेंट ने इस अध्ययन की पूरी रिपोर्ट प्रकाशित की है .

9 टिप्‍पणियां:

मनोज कुमार ने कहा…

खतरनाक स्थिति है।

डॉ टी एस दराल ने कहा…

सही चेतावनी ।
पैपिलोमा वाइरस के विरुद्ध अब वैक्सीन आ गई है ।
इसे प्रथम सेक्स से पहले लगाना चाहिए ।

Sunil Kumar ने कहा…

अब भी संभल जाओ .सार्थक पोस्ट आभार

Vivek Rastogi ने कहा…

परंतु जिनको आनन्द लेना होता है वे यह सब तब कहाँ सोचते हैं, वे तो अपने चरम की ओर चलते जाते हैं।

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

जीवन अनमोल है उन्हें यह समझना होगा ......

Babli ने कहा…

जीवन बहुत कीमती है! बेहद सुन्दर और सार्थक पोस्ट! बधाई!
मेरे नये पोस्ट पर आपका स्वागत है-
http://seawave-babli.blogspot.com/

Arvind Mishra ने कहा…

अहैतुक या अयाचित वीरुभाई, या दोनों ? :)

दिगम्बर नासवा ने कहा…

सार्थक पोस्ट ... समय रहते जागना जरूरी है आज के युवा वर्ग को ...

मनोज बिजनौरी ने कहा…

Bhaut Sahi jaankaari!!

http://manojbijnori12.blogspot.com