बुधवार, 9 नवंबर 2011

मुकम्मिल तौर पर बदलियेगा आँखों की रंगत ?

मुकम्मिल तौर पर बदलियेगा आँखों की रंगत ?
एक अमरीकी नेत्र विद एक ऐसा लेज़र ट्रीटमेंट खोज निकाला है जिसमे इस किरण पुंज के ज़रिये मात्र २० सेकिंडों में भूरी आँखों को नीला बनाया जा सकता है .कलर्ड कोंटेक्ट लेंस से निजात दिलवा सकता है देर सवेर यह इलाज़ .
आँखों के माहिर डॉ. ग्रेग होमर के अनुसार लेज़र किरण पुंज २० सेकिंडों में ही आँखों केभूरे रंग के रंजक (पिगमेंट )का सफाया कर देता है .बस धीरे - धीरे आँखें नीली रंगत लेने लगतीं हैं .अपने रिसर्च के इस बेहतरीन काम को आगे बढाने के लिए डॉ ग्रेग को अनुदान की दरकार है ताकि क्लिनिकल ट्रायल्स को संपन्न किया जासके .कलर्ड कोंटेक्ट लेंसों से छुटकारा दिलवाने का वायदा करतें हैं ग्रेग .
इस अभिनव प्रोद्योगिकी और प्रोसीज़र को व्यावसायिक पैमाने पर लाने के लिए स्ट्रोमा मेडिकल को खडा किया जा रहा है .सुरक्षा सम्बन्धी परीक्षण १८ माह के भीतर ही संपन्न कर लिए जायेंगें .
बेशक कुछ माहिरों ने आगाह किया है प्यूपिल पर जरा ज्यादा लेज़र प्रकाश की बौछार पड़ने से बीनाई सम्बन्धी परेशानी सामने आ सकती है .इसलिए लेजर पुंज की एक दम से नियंत्रित क्वांटम चाहिए इस प्रोसीज़र में .इस आशय की खबर बी बी सी वर्ल्ड सेवा ने भी प्रसारित की है .
इस प्राविधि में एक कम्प्युत्रिकृत स्केनिंग प्रणाली काम में ली जायेगी .यह आयरिस की तस्वीर उतारेगी .इसी के बाद ही तय किया जाएगा किस इलाके का ट्रीटमेंट किया जाना है .एक बार में आयरिस का एक ही स्पोट उपचारित किया जाएगा .हरेक स्पोट को उपचारित कर लेने के बाद इसे दोहराया जाता है .बेशक एक सिटिंग में सिर्फ २० सेकिंड ही लगतें हैं .
दरअसल इस प्राविधि में लेज़र किरण पुंज डालकर आयरिस की सतह पर मौजूद रंजक को अजिटेत(आंदोलित ) किया जाता है . जब सारी सतह आंदोलित हो जाती है सारी प्रक्रिया फिर दोहराई जाती है .डॉ होमर स्वयं स्ट्रोमा मेडिकल के मुखिया एवं प्रमुख साइंसदान हैं .लेज़र किरण पुंज में दो अलग आवृतियों का प्रकाश काम में लिया जाता है इन आवृत्तियों के प्रकाश को डार्क पिगमेंट पूरा का पूरा ज़ज्ब (अवशोषित )कर लेता है .इसलिए आँख को किसी तरह का जोखिम नहीं रहता है .
सन्दर्भ- सामिग्री :Change your eye colour with lasers
In 20 Seconds ,New Treatment Can Zap Brown Eyes Blue Permanently /TIMES TRENDS /TOI ,NOVEMBER 8,2011
RAM RAM BHAI
नौनिहालों को नुश्खे में बिला वजह तजवीज़ किए जातें हैं एंटीबायटिक्स .
अमरीकी बालरोग विद हर साल नुश्खें में तजवीज़ कर रहें हैं फ्ल्यू और दमा जैसी शिकायतों में नौनिहालों को तकरीबन एक करोड़ एंटीबायटिक .इसी वजह से नौनिहालों मेंखतरनाक स्तर पर ड्रग रेजिस्टेंस बिला वजह बढ़ रहा है यह पता चला है एक ताज़ा अध्ययन से .
१८ साल से कम उम्र के तकरीबन ६५,००० बहिरंग रोगियों के एक सेम्पिल के अध्ययन विश्लेषण के बाद रिसर्चरों ने ये नतीजे निकाले हैं .ये सेम्पिल २००६-२००८ की अवधि के है .पता चला पांच में से एक विज़िट में बाल रोगों के माहिरों ने नौनिहालों को दमा तथा सांस सम्बन्धी श्वसनी क्षेत्र की आम शिकायतों के प्रबंधन के लिए नुश्खे में एंटीबायटिक्स तजवीज़ किए हैं .यह एक चिंताजनक स्थिति है .अवांछनीय तो है ही .
सन्दर्भ -सामिग्री :"Antibiotics for kids overprescribed"/TIMES TRENDS/NOVEMBER 9,2011 /TOI,New-Delhi.Ed.
RAM RAM BHAI !
इंसुलिन का विकल्प और बचावी चिकित्सा बन सकती है यह गोली .
(Coming soon :An oral pill to treat daibetes ?)
साइंसदान गत दस सालों से एक ऐसी गोली बनाने में मुब्तिला है जो न सिर्फ जीवन शैली रोग डायबितीज़ के खिलाफ एक बचावी उपाय के बतौर स्तेमाल कि जा सकेगी ,इंसुलिन का भी विकल्प बन सकेगी .ऑस्ट्रेलिया की Curtin University के नेत्रित्व में साइंसदानों की अंतर -राष्ट्रीय टीम इसका विकास कर रही है .सिरिंजों और सुइयों से ली जाने वाली इंसुलिन का विकल्प बनेगी यह गोली .टीम के मुखिया प्रोफ़ेसर Eric Helmerhorst और उनकेतमाम साथी गत बरसों में लाखों औषधीय यौगिकों की पड़ताल कर चुकें हैं मकसद रहा है इंसुलिन के आणविक नक़्शे कदम नक़्शे पा की खोज .
RAM RAM BHAI !
स्तन पान की नियत अवधि भावी जीवन में ब्लड प्रेशर के खतरे को कम करती है .
कमसे कम छ :माह तक शिशु को अमृतपान सदृश्य स्तन पान करवाना शिशु को तो रोगों के प्रति -अनुरक्षण प्रदान करता ही है माँ के लिए भी आगे चलके हाई ब्लड प्रेशर के जोखिम को घटाए रख सकता है .प्राथमिक आहार और पोषण तो यह शिशु का है ही .यही लब्बोलुआब है एक अमरीकी अध्ययन का जिसमे तकरीबन ५०,००० महिलाओं को शरीक किया गया था .ज़ाहिर है माँ और शिशु एक ट्विन सिस्टम है स्तन पान दोनों की सेहत के लिए अच्छा है .आत्मीय लगाव और शिशु के आत्म -विश्वास के लिए भी .
रात को सोते वक्त लीजिए एक ग्लास चेरी का ज्यूस .
नियमित चैरी ज्यूस का सोने से पहले सेवन करना अच्छी नींद की कुंजी है .इनसोम्निया में दिलवाएगा राहत .एक नवीन अध्ययन के अनुसार जो लोग बिना नागा रात्री सोने से पहले एक ग्लास चैरी ज्यूस लेना नहीं भूलते वह तकरीबन २५ मिनिट फ़ालतू नींद लेते हैं .यह निष्कर्ष निकाला है नोर्थम्ब्रिया यूनिवर्सिटी के रिसर्चरों ने अपने एक ताजातरीन अध्ययन से .पता चला है अच्छी नींद में सहायक है चैरी ज्यूस .
बौवल डिसऑर्डर की वजह बन सकता है सदमा (ट्रौमा ):
स्ट्रेस से स्टमक अपसेट होने के बारे में जानकारी आम हो चुकी है लेकिन दिल को लगने वाली चोट ,आघात या आकस्मिक सदमा (ट्रौमा )संवेगात्मक हो चाहे मनोवैज्ञानिक स्तर पर दिल को ठेस लगे नतीजा होता है -इर्रितेबिल बौवल सिंड्रोम (Irritable bowel syndrome i.e IBS).एब्डोमिनल पैन (उदर शूल ,पेट दर्द )कब्जियत तथा अतिसार (डायरिया )इसके ज्ञात लक्षण हैं .यही सार है एक ताज़ा अध्ययन का .

9 टिप्‍पणियां:

डॉ टी एस दराल ने कहा…

कमाल की जानकारी है .

लेकिन क्या भारत में काम आएगी ?

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

अब तो नीली आँखों की परियाँ हर जगह होंगी।

डॅा वेदप्रकाश श्योराण ने कहा…

ankhiyan milaun kabhi ankhiyan churaun......

Kajal Kumar ने कहा…

देखें कब भारत पहुंचती है ये तकनीक आम आदमी के लिए

मनोज कुमार ने कहा…

बहुत अच्छी प्रस्तुति। हार्दिक शुभकामनाएं!

SM ने कहा…

interesting but who will go under it
eyes are preciouse

Babli ने कहा…

बहुत बढ़िया, महत्वपूर्ण और ज्ञानवर्धक जानकारी प्राप्त हुई ! धन्यवाद !
मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है-
http://seawave-babli.blogspot.com/
http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.com/

रेखा ने कहा…

काफी रोचक जानकारी दी है आपने ..

मनोज कुमार ने कहा…

भूरे आंखों वाले लोगों के लिए बढिया विकल्प और खुशखबरी भी है यह तो!!