शनिवार, 26 नवंबर 2011

वीजिंग (घरघर करते हुए सांस लेने को )को कम करती है फिश डाईट .

वीजिंग (घरघर करते हुए सांस लेने को )को कम करती है फिश डाईट .
'Fish diet halves wheezing in kids ':(TIMES TRENDS/THE TIMES OF INDIA ,MUMBAI,NOVEMBER25,2011,P17).
एक नए अध्ययन केअनुसार जिन शिशुओं को उम्र के नौवें महीने से पहले ही मच्छी खाने को मिल जाती है उनके लिए वीजिंग की संभावना (घट कर )५०%कम रह जाती है .स्वीडन के गोठेन्बुर्ग (University of Gothenburg)के रिसर्चरों ने अपने एक अध्ययन में पता लगाया है कि जिन नौनिहालों को नौ माही (नौ महीने की उम्र होने से पहले पहले )मच्छी खुराक में दी गई आगे चलके उनके घरघर करके साइंस लेने (Wheezing, सांस लेने में घरघराहट )के मौके घटके आधे ही रह गए .
राम राम भाई !राम राम भाई !राम राम भाई !
दिमाग को विद्युत् स्पंदन देकर उत्तेजित करना अल्ज़ाइमर्स के खिलाफ संघर्ष में एक असरदार अश्त्र बन सकता है .
दिमाग को रुक रुक करके आकस्मिक और अल्पकाली विद्युत् स्पंदन के ज़रिए ऊर्जित करने एनर्जी देते रहने से अल्ज़ाइमर्स से पैदा दिमाग की सिकुडन (ब्रेन श्रीन्केज ) को लगाम लगती है .
दिमाग का यही वह हिस्सा है जिसके सिकुड़ते चले जाने से याददाश्त कम होती चली जाती है .
ओंटारियो राज्य(कनाडा ) के टोरोंटो वेस्ट्रन अस्पताल के रिसर्चरों ने एक स्माल स्केल स्टडी में पता लगाया है कि ऐसा नियमित करते रहने से दिमाग के ठीक उसी हिस्से का सिकुड़ना कम होता है जिसका सम्बन्ध इस बीमारी से जोड़ा जाता रहा है .
माहिरों के अनुसार डिमेंशिया की एक किस्म एल्ज़ाइमर्स में दिमाग का आधारीय हिस्सा खासकर हिप्पाकैम्पस सिकुड़ता है .न्यू साइंटिस्ट पत्रिका को इस अध्ययन के अगुवा रहे ज़नाब अन्द्रेस लोजानो ने यही बतलाया है .अध्ययन में उतारे गए ब्रेन स्केन्स से मुखर हुआ है प्रगट हुआ है साफ़ हुआ है ठीक ठीक खुलासा हुआ है कि दिमाग का temporal lobe (दिमाग का एक हिस्सा जिसे कनपटी का शंख भी कहतें हैं)तथा दिमाग का एक और भी हिस्सा जिसे Posterior Cingulate कहतें हैं सुगर की खपत सामान्य खपत से कमतर करने लगतें हैं .इन सभी लोगों को अल्ज़ाइमर्स था तथा इनके दिमाग कोregular fleeting pulses of electricity dekar उत्तेजन प्रदान किया गया था बाद उसके इनके स्केन उतारे गए थे .सुगर की खपत का कम होना मतलब दिमाग के इन हिस्सों का स्लो होना .सिकुड़ने के बाद ही ऐसा होता है . यह तथ्य सर्विदित है .
ram ram bhai !ram ram bhai !
NOVEMBER 26,2011
4C,ANURADHA,COLABA,MUMBAI-400-005
ram ram bhai!


स्लीप वाकिग नहीं स्लीप टेक्स्टिंग शुक्रिया स्मार्ट फून्वा .
स्लीप वाकिग नहीं स्लीप टेक्स्टिंग शुक्रिया स्मार्ट फून्वा .
(New sign of too much stress :Sleep -texting/TIMES TRENDS /THE TIMES OF INDIA ,MUMBAI,NOV 25 ,2011 /p17)
रिसर्चरों के अनुसार आधुनिक जीवन की ,रोजमर्रा की रहनी सहनी में तनाव इस कदर बरपा है कि लोग सोते सोते भी टेक्स्ट मेसेजिंग कर रहें हैं भलेही इन संदेशों में कोई तारतम्य सामंजस्य संगतता न हो इन -कहिरेंस ही हो .स्लीप टेक्स्तार्स की संख्या लगातार बढ़ रही है .
मजेदार बात यह है जो लोग इस आधुनिक अफ्लिक्शन,से इस अधुनातन बीमारी से ग्रस्त हैं उन्हें इस बात का इल्म भी नहीं है कि वह गहन निद्रा में भी असंगत सन्देश अपने चहेतों को नाती सम्बन्धियों को भेज रहें हैं उन्हें जो दिन रात उनके जेहन में हैं .कुछ कुछ इस तरह -
"शीशा -ए -दिल में छिपी तस्वीरे यार ,जब जरा गर्दन झुकाई देख ली "और इन लोगों का खुद हाल यह है -
"कुछ लोग इस तरह जिंदगानी के सफ़र में हैं ,दिन रात चल रहें हैं ,मगर घर के घर में हैं "-
रिसर्चर फ्रांक थोर्ने के मुताबिक़ डेली मेल अखबार ने इस रिपोर्ट को विस्तार से छापा है ..
समाधान क्या है इस संक्रमण से बचाव का ?
माहिरों के अनुसार इस समस्या से ग्रस्त लोगों को अपने शयन कक्ष में मोबाइल कथित स्मार्ट फोन रखकर नहीं सोना चाहिए .
नींद विज्ञान के माहिर डेविड कनिंगतन के मुताबिक़ स्लीप टेक्स्टिंग दिन भर की मशक्कत तनाव , बेहद की टेक्स्टिंग का ही नतीजा है .लोगों को सोते सोते भी यही लगता है वह काल ले रहें हैं .ई -मेल्स को अनवरत प्राप्त करते रहना स्मार्ट फोन्स की अधुनातन देन है .स्लीप टेक्स्टिंग इसीका पार्श्व प्रभाव है तोहफा है दिन भर के संचित स्ट्रेस का .स्मार्ट फोन्स चौबीस घंटा खबरदार करता है इत्तल्ला देता रहता है .इसी खबरदारी के चलते हम सोने और जागने में फर्क नहीं कर पाते .
घोड़े बेचके सोने के लिए ज़रूरी है रात भर के लिए अपने स्मार्ट फोन को भूल जाएँ उसे शयन कक्ष के बाहर ही रखें या फिर बंद करदें .अगर फोन नाईट स्टेंड पर रहेगा तब आप को उत्सुकता रहेगी ओबसेशन रहेगा काल बेक करने का काल को लेने की बे -चैनी रहेगी .फेसबुक एकाउंट को चेक करने की बे -चैनी सालती रहेगी .
तो ज़नाब नींद पर ध्यान दीजिये निद्रा देवी का स्वागत कीजिए नींद की गुणवता पर ध्यान दीजिए .स्लीप टेक्स्टिंग आज की युवा भीड़ का फेशन स्टेटमेंट है .क्रेज़ है ओब्शेशन है .सेल फोन यूज़र्स की बीमारी है स्लीप टेक्स्टिंग .यह सब अधुनातन प्रोद्योगिकी की बैशाखियों का सहारा लेने का खमियाजा है .वैसे तकनीकी तौर पर गहन निद्रा की अवस्था में आप संगत सन्देश भेज ही नहीं सकते गफलत में असंगत कुछ भी करते रहें असंगत सन्देश इन -कहिरेंट मेसेज भेजते रहें यह और बात है .

12 टिप्‍पणियां:

Arvind Mishra ने कहा…

,मगर पत्नी न तो फिश खाती हैं न खाने देती हैं -जबकि घरघराती रहती हैं :(

रविकर ने कहा…

@ मगर पत्नी न तो फिश खाती हैं न खाने देती हैं -जबकि घरघराती रहती हैं

बहुत खूब ||

आभार ||

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

अब ग्रीस की जगह उपयोग में लायी जा सकती है मछली।

मनोज कुमार ने कहा…

कमाल की जानकारी।

डॅा वेदप्रकाश श्योराण ने कहा…

fish nhin kha sakte sir

SM ने कहा…

interesting finding

Tv100 ने कहा…

दिलचस्प पोस्ट।

टी0वी0100 ब्लॉग पर आपका स्वागत है। इस ब्लॉग में योगदान(लिखने)देने के लिए
अपना ई-मेल पता, हमारे इस ई-मेल पते tv100news@gmail.com पर भेज सकते हैं।

काजल कुमार Kajal Kumar ने कहा…

अरविंद मिश्रा जी की प्रतिक्रिया को नमन :)
शाकाहारी ब्लागर अनुलोम विलोम व कपालभाती कर लें तो मछली की जान भी बच जाएगी और उनकी घुर्र-घुर्र भी जाती रहेगी.

Babli ने कहा…

बहुत ही दिलचस्प और जानकारी से भरपूर पोस्ट रहा!

यादें....ashok saluja . ने कहा…

वीरूभाई राम-राम !देर से आने का कारण तो आप को फोन की बात-चीत से हो ही गया है |
फिर भी ...माफ़ी का तलबगार हूँ |
ज्ञान से भरपूर और मेरे जैसो के लिए काम की जानकारी का शुक्रिया |
आभार!
थोड़ी देर के लिए दिल बहलाने के लिए यहाँ आयें !
http://ashokakela.blogspot.com/2011/11/blog-post_14.html
अब यहाँ ...
http://ashokakela.blogspot.com/2011/11/blog-post_23.html

"जाटदेवता" संदीप पवाँर ने कहा…

प्रस्तुति जानकारी से भरपूर, लेकिन बिना मछली खाये भी तो बात बन जाती है।

Navin C. Chaturvedi ने कहा…

भाई हम तो शाकाहारी हैं