शनिवार, 12 नवंबर 2011

सावधान जी का जंजाल बन सकती है समय पूर्व रजोनिवृत्ती .

सावधान जी का जंजाल बन सकती है समय पूर्व रजोनिवृत्ती .
भारत में रजोनिवृति की औसत उम्र महिलाओं में औसतन ४७ बरस है लेकिन अनेक कारणों से प्रीमेच्योर मीनोपोज़ अब ४० साल से पहले आ रही है .एक तरफ दोषपूर्ण खानदानी विरासत ,खराब जीवन इकाइयां ,तपेदिक जैसे आम रोग दूसरी तरफ ,केमोथिरेपी इतर विकिरण प्रभावन (रेडियेशन एक्सपोज़र ),ऑटोइम्यून डिसऑर्डर्स ,मेडिकल तथा सर्जिकल प्रोसीज़र्स इसकी वजह बन रहें हैं .
चालीस साल की उम्र से पहले का मीनोपोज़ ही समय से पहले आई रजोनिवृत्ती कहलाता है .यकीन मानिए यह अवस्था किशोरावस्था में भी आ सकती है .
दुर्भाग्य यह है कि प्रजनन क्षम महिलाओं की एक बड़ी फीसद तादाद इसकी चपेट में है जो इलाज़ के लिए प्रसूति एवं स्त्री -रोगों के माहिरों के पास नहीं पहुँच रही है .नजर अंदाज़ किए है इस स्थिति को जब कि इसका बाकायदा इलाज़ उपलब्ध है .
गौर तलब है इस स्थिति में तकरीबन तकरीबन अंडाशय दोनों ही (ओवरीज़ )स्त्री होरमोन इस्ट्रोजन बनाना स्थगित कर देते हैं .इस्ट्रोजन का स्तर एक दम से नतीज़न गिर जाता है .इस होरमोन का कमतर स्तर औरत की सेहत को कई तरह से असर ग्रस्त करने लगता है .एक तरफ अश्थी क्षय (ओस्टियोपोरोसिस )का जोखिम बढ़ने लगता है दूसरी तरफ दिल की बीमारियों के खतरे का वजन .
बड़ी आंत (कोलोन )तथा मसूढ़ो की बीमारियों (पेरियोदोंतल डिजीज )का जोखिम सिर उठाने लगता है .ड्राई आईज ,दांतों का छीजना (टूथ लोस ),सफ़ेद मोतिया होने लगता है .
Mood swings और Hot flashes के अलावा भावात्मक संवेगात्मक समस्याएँ भी कई महिलाओं के सामने आती हैं .
सामान्य मीनोपोज़ जैसे ही लक्षण होतें हैं प्री -मेच्युओर मीनोपोज़ के :
मासिक के दौरान बहुत ज्यादा या फिर बहुत कम रक्तस्राव का होना ,शरीर के विशेषकर ऊपरी हिस्से में एक दम से बेहद की गर्माहट महसूस होना (होट फ्लेशिज़ ),मासिक चक्र का अनियमित हो जाना .कभी आना कभी कई माह तक न आना .
योनी में सूखापन महसूस होना ,योनी का लोच खोकर छीजना थिन पड़ते जाना ,bladder irritability and worsening of the loss of bladder कंटोल .(इन्कोन्तिनेंस )असंयम ,मल त्याग के वक्त ऐंठन और मल त्याग पर control न रख पाना ,चमड़ी ,आँखों और मुंह का Dry रहना .,नींद न आना ,अवसाद ,irritability mood swings ,सेक्स में अरुचि आदि आम लक्षण है इस स्थिति के .
अलावा इसके जिन महिलाओं को अर्ली मीनोपोज़ का सामना करना पड़ता है उनमे आत्मविश्वास की कमी ,अवसाद में जाने का जोखिम ,जीवन की गुणवत्ता में कमी ,negative body image का सामना करना पड़ता है .
देश के राज्यों में Andhra pradesh की महिलाओं में इसका pratishat sarvaadhik 31.4 %,के baad Bihar का nambar aataa है jahaan 21.7%feesad महिलाएं प्रिमेच्युओर मीनोपोज़ झेल रहीं हैं jabkee Karnatak के लिए यह स्थिति bas zaraa सा कम २०.२ %महिलाओं के लिए बनी हुई है .
kerala की स्थिति 11.6% पर थोड़ी सी ठीक कही जायेगी .West Bangal और Rajasthaan के लिए यह स्थिति १२.८ तथा १३.१ %महिलाएं झेल रहीं हैं .कुल मिलाकर शहरी क्षेत्रों में १६.१%तथा ग्रामीण में थोड़ा सा इससे ज्यादा १८.३% महिलाएं समय पूर्व रजोनिवृत्ती का सामना कर रहीं हैं .तकरीबन २०%अपढ़ तथा ११.१ %महिलाएं प्रिमेच्युओर मीनोपोज़ की चपेट में हैं .
गरीब महिलाएं इस स्थिति से ज्यादा जूझ रहीं हैं खाते पीते घर की महिलाओं के बरक्स .
चंडीगढ़ में संपन्न एक हालिया अध्ययन में भी इसकी दर १८%पाई गई है .संयुक्त परिवारों का बिखरना औरत के ऊपर आर्थिक स्वतंत्रता का बढ़ता दवाब और परिवार में उससे बढती हुईनित नै अपेक्षाएं उसे भौतिक मानसिक और संवेगात्मक दवाब तले रौंद रहीं हैं .दिल्ली की एक मशहूर prasuti विद का यही मानना है .
अलावा इसके उचित पोषण और स्वास्थ्य शिक्षा का अभाव औरतों के हारमोन संतुलन को बिगाड़ रहा है .नतीजा है प्रिमेच्युओर मीनोपोज़ .
दुर्भाग्य यह भी है जब तक औरत को अश्थी भंग (Bone Fracture) )का सामना न करना पड़ जाए अश्थी क्षय (ओस्टोपोरोसिस)की तरफ परिवार में किसी का ध्यान ही नहीं जाता है .इसलिए ज़रूरी है महिलायें अपने पारिवारिक चिकित्सक से संपर्क बराबर बनाए रहें .अपनी मेडिकल कंडीशन की अनदेखी न करें .
इलाज़ और समाधान क्या है इस स्थिति से उबरने के लिए ?
(१)मनोवैज्ञानिक सलाह मशविरा (Psychological कोउन्सेल्लिंग ) इस स्थिति में विशेष असरकारी सिद्ध होती है .support ग्रुप से संपर्क भी लाभदायक सिद्ध हुआ है .
(२)हारमोन पुनर्स्थापन एक स्वीकृत चिकित्सा मानी गई है .(Hormone replacement Therappy,)HRT के बेशक इस आयु वर्ग के लिए जोखिम भी सामने आयें हैं जल्दी मीनोपोज़ होना खुद भी तो एक जोखिम है .जितनी जल्दी जितनी कम उम्र में रजोनिवृत्ती आ धमकती है और harmone पुनर्स्थापन चिकित्सा फ़ौरन शुरु होकर दीर्घावधि चलती है उसी के अनुरूप जोखिम (पार्श्व प्रभाव )भी 60 साल की उम्र तक रहता ही है .
सर्जिकल कारणों से जिन महिलाओं को जल्दी रजोनिवृत्ती का सामना करना पड़ता है उनके Vasomotor symptoms को काबू में रखने के लिए इस्ट्रोजन की ज्यादा खुराक लेनी पड़ती है .
वैकल्पिक चिकित्सा के माहिर इस स्थिति से निजात के लिए आयुर्वेद के अलावा पुष्प चिकित्सा (flower remedies),aromatherapy(गंध चिकित्सा )की भी वकालत करते हैं .योग तो इन दिनों रामबाण है ही .

9 टिप्‍पणियां:

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

प्रकृति रही दुर्जेय......

डॅा वेदप्रकाश श्योराण ने कहा…

संयुक्त परिवारों का बिखरना औरत के ऊपर आर्थिक स्वतंत्रता का बढ़ता दवाब और परिवार में उससे बढती हुईनित नै अपेक्षाएं उसे भौतिक मानसिक और संवेगात्मक दवाब तले रौंद रहीं .......sahi kaha.......

Arvind Mishra ने कहा…

सचमुच एक स्वास्थ्य विभीषिका

रविकर ने कहा…

आपकी प्रस्तुति

सोमवारीय चर्चा-मंच पर

charchamanch.blogspot.com

SM ने कहा…

nice post
need more awareness

मनोज कुमार ने कहा…

फ़्लावर रिमेडी मैंने भी अपनाया था। बहुत अच्छी उपचार प्रणालि है।

Navin C. Chaturvedi ने कहा…

लोग समझें तब ना

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

सर्जिकल कारणों से जिन महिलाओं को जल्दी रजोनिवृत्ती का सामना करना पड़ता है उनके Vasomotor symptoms को काबू में रखने के लिए इस्ट्रोजन की ज्यादा खुराक लेनी पड़ती है .

इस्ट्रोजन किस रूप में ?

आपने बहुत महत्त्वपूर्ण जानकारी दी है ..गर्भाशय की
सर्जरी के बाद ..डॉक्टर कैल्शियम लेने की सलाह देते हैं ..क्या इतना ही काफी है ?

veerubhai ने कहा…

हारमोन पुनर्स्थापन चिकित्सा के तहत ही इस्ट्रोजन की बड़ी खुराकें देनी पड़तीं हैं माहिरों के अनुसार .संगीताजी आपकी टिपण्णी के लिए आभार .