मंगलवार, 4 अक्तूबर 2011

'Male menopause 'is for real ,cure is on the way

'Male menopause 'is for real ,cure is on the वे
एक अनुमान के अनुसार बीस लाख से ज्यादा मर्द ' मेल मिनोपौज़ 'की गिरिफ्त में हैं .अब तक इसे उपहास का विषय ही समझा जाता है प्रौढ़ पुरुष की बदमिजाजी कहके रफा दफा कर दिया जाता था ."टेस्टोस्टिरोंन पुनर्स्थापन चिकित्सा "से परहेज़ रखा जाता था .आशंका थी इसका नजदीकी रिश्ता "प्रोस्टेट कैंसर "पौरुष ग्रंथि के कैंसर "से है ।
The most effective known medication for what is officially the andropause----had been linked to prostet cancer.
पहली मर्तबा यह आशंका अब निर्मूल साबित हुई है ।
इसी के साथ लाखों लाख लोगों के जीवन में उम्मीद की किरण लौट आई है .अब यह इलाज़ तजवीज़ किया जा सकेगा .१५०० मरीजों पर किये गए एक ताज़ा तरीन अध्ययन से जिसे यूनिवर्सिटी कोलिज हॉस्पिटल लन्दन के इंस्टिट्यूट ऑफ़ युरोलोजी ने समपन्न किया है यह जानकारी हासिल हुई है कि टेस्टोस्तेरोंन के स्तर में वृद्धि से प्रोस्टेट को लाभ ही पहुंचता है .टेस्टोस्तेरोंन रिप्लेसमेंट थिरेपी से प्रोस्टेट कैंसर का ख़तरा नहीं पैदा होता है ।
मेल मिनोपौज़ को टेस्टोस्तेरोंन डेफि -शियेंशी सिंड्रोम भी कहा जाता है .पचास के पेटे में आये मर्दों में बेहद की थकान का एहसास ,अवसाद (डिप्रेशन ),वेट गेन(मुटिया जाना ),याददाश्त क्षय भूलने की आदत का घर बनाना ,नींद में खलल ,यौन सम्बन्धों में कमतर दिलचस्पी रह जाना ,ब्रेन फोग (मानसिक कुन्हासा ) इसी के चंद लक्षण हैं ।
इरेक्टाइल डिसफंक्शन भी इसी का लक्षण है लेकिन ज्यादातार मामलों में बेहद की थकान ,थके होने का एहसास ही मुखर होता है ।
कितने ही पुरुष तीसम तीस ओर चालिसे के पेटे में आते ही इसकी गिरिफ्त में आजातें हैं लेकिन रोगनिदान १%के मामले में ही लेदे के होपाता है .
माहिरों के अनुसार पुरुषों में होने वाली यह एक आम हारमोन सम्बन्धी गड़बड़ी है.नै शोध ने पुख्ता इलाज़ का रास्ता दिखाया है ।
नॅशनल हेल्थ सर्विसिज़ में टेस्टोस्तेरोंन ट्रीटमेंट उपलब्ध है लेकिन बहुत एहतियायत बरती जाती है इस इलाज़ के मामले में .अब तक इलाज़ भी आशंकाओं के घेरे में था ।
सन्दर्भ सामिग्री :'Male menopause 'is for real ,cure is on the way-THE INDEPENDENT

3 टिप्‍पणियां:

डॉ टी एस दराल ने कहा…

मेरे ख्याल से सो काल्ड मेल एन्ड्रोपोज , जीवन शैली का परिणाम ज्यादा है । आजकल की भागमभाग जिंदगी में पुरुष रोजी रोटी कमाने के चक्कर में ज्यादा रहता है । फिर सेड़ेंत्री लाइफ स्टाइल मनुष्य को पंगु बना देती है ।
आम तौर पर testosterone की कमी ७० साल की उम्र तक भी नहीं होती है । एक्टिव सेक्स लाइफ इसमें और भी फायदा करती है । फ्रीक्वेंट इजेक्युलेशन से प्रोस्टेट कैंसर होने की सम्भावना बहुत कम हो जाती है ।
इस तरह सेक्सुअल एक्टिविटी से testosterone लेवल भी बना रहता है । यह एक विसियस साईकल है ।

veerubhai ने कहा…

डॉ दराल !आपने बहुत सटीक टिपण्णी की है ,फ्रिक्युवेंत इजेक्युलेषण (मैथुन रत होना )प्रोस्तेतिक एन -लार्ज्मेंट को भी थाम लेता है .मददगार है .

डॅा वेदप्रकाश श्योराण ने कहा…

es per tippni ke liye kuch likhna sabke buske baat nhin ....hum jaison ke liye to aur bhe muskil hai....