रविवार, 30 अक्तूबर 2011

कैसे जानू मैं अपने ही दिल की सेहत का हाल ,कैसे पता चले सब ठीक ठाक भी है ?

कैसे जानू मैं अपने ही दिल की सेहत का हाल ,कैसे पता चले सब ठीक ठाक भी है ?
कैसे जानू मैं अपने ही दिल की सेहत का हाल ,कैसे पता चले सब ठीक ठाक भी है ?
जानतें हैं मेरा छोटा भाई सिर्फ ३५ साल का था दिल का दौरा उसे अचानक लील गया .धूम्रपान के अलावा और कोई एब ,ज्ञात रिस्क फेक्टर का हमें इल्म भी न था .मृत्यु से दो सप्ताह पूर्व एको और टी एम् टी परीक्षण भी सब कुछ नोर्मल दर्शा रहे थे .
मेरी खुद की उम्र ३८ बरस है .धूम्र पान का शौक है मुझे .दिल की सेहत का हाल जानने को बेहद उत्सुक और बे -चैन हूँ .कैसे जानू सब ठीक तो है .ऐसे किस्से और सवालों से आपका साबका पड़ता होगा .
भाई साहब दिल का मुआयना कार्डिएक चेक अप करवाओ .और क्या .बस आपको इसी के ज़रिए अपना पारिवारिक पूर्व वृत्तांत बताना होगा दिल की बीमारियों के बाबत .हाई ब्लड प्रेशर ,हाईब्लड सुगर परिवार में कब किसको रहा आया है बतलाना होगा .हाई कोलेस्ट्रोल का यदि इतिहास रहा है परिवार में तो वह भी अपने दिल के माहिर को बतलाना होगा .
अपने बारे में स्मोकिंग के अलावा ,वेट ,जीवन शैली से जुडी सक्रियता ,निष्क्रियता का ईमानदार ब्योरा हासिल करवाना होगा .इसी के आधार पर आपको हाई ,मीडियम या लो रिस्क केटेगरी में रखा जाएगा .
जिन लोगों में तीन या इससे भी ज्यादा रिश्क फेक्टर रहतें हैं उन्हें हाई रिस्क केटेगरी में जिनमे दो और क्रमश :एक ही रिश्क फेक्टर मिलता है उन्हें मीडियम और लो केटेगरी में रखा जाता है .
रक्त अध्ययन परीक्षणों के अलावा नॉन इन्वेज़िव परीक्षण (शल्य हीन ,बिना चीड फाड़ के )टी एम् टी ,एको आदि किए जातें हैं .ज़रुरत के मुताबिक़ हाई रिस्क ग्रुप के लिए कोरोनरी एंजियोग्रेफ़ी भी तजवीज़ क़ी जाती है .
कब आतें हैं एको और टी एमटी के नतीजे सामान्य ?
उन मामलों में जब कोरोनरी आर्टरी (परिहृदय धमनियों )में मात्र ४०% -५०%ही प्लाक चर्बी जमा होजाने से बन जाता है .यानी ब्लोकेड मात्र इतना रहता है उक्त परीक्षणों के नतीजे नोर्मल रहतें हैं .
लेकिन कई मर्तबा जब यह प्लाक फट जाता है तब आकस्मिक तौर पर दिल का दौरा पड़ जाता है .
आपके छोटे भाई के साथ यही हुआ हो सकता है .
बेशक भरोसे मंद और सस्ते नॉन इन्वेज़िव परीक्षण जिनके करवाने से खतरे का पहले से ही भान हो जाए भनक पड़ जाए इल्म हो जाए फिलवक्त उपलब्ध नहीं हैं .
सी टी एन्जियोग्रेफी की भी सीमाएं मुखरित हो चुकीं हैं :
जिन लोगों में किडनी फंक्शन हाई बना रहता है ,तेज़ और अनियमित रफ़्तार चलती है दिल की धौंकनी ,इर्रेग्युलर और फास्ट रहती है हार्ट बीट उनके लिए उपयुक्त नहीं हैं यह सी टी एन्जियोग्रेफी .उच्च स्तर विकिरण के अलावा इसमें व्यक्ति को ८०-१०० मिलीलीटर डाई झेलनी पड़ती है जिसके बिना नतीजे अच्छे नहीं आतें हैं .इसके अपने खतरे हैं सेहत के लिए .वही बात हो गई न -काणी /काणे के ब्याह को सौ झोखों ,सौ झंझट .
लेदेकर विकल्प बचता है -गोल्ड स्टेंडर्ड कन्वेंशनल कोरोनरी एन्जियोग्रेफी .इसका अपना भय व्याप्त है जन समुदाय में .वजह अस्पताल में भर्ती होने की ज़रुरत /मजबूरी ,असुविधा ,शारीरिक कष्ट,डाई का रिएक्शन ,पेशाब का बंद लगना या पेशाब /मूत्र त्याग में परेशानी पेश आना आदि .
ज़वाब है -मेट्रो कोरोनरी स्क्रीनिंग :
मेट्रो अस्पतालों के मुखिया पद्म विभूषण तथा डॉ बी सी रॉय नॅशनल अवार्ड से सम्मानित डॉ .पुरुषोत्तम लाल ने ईजाद किया था यह परीक्षण १९९७ में .इसमें बाजू से एक मिनी केथितरप्रवेश कराके धमनियों तक पहुंचाकर ही धमनियों का हाल जान लिया जाता है .
इस परीक्षण की खूबी यह है इसमें डाई की न्यूनतम मात्रा का स्तेमाल कर लिया जाता है .इस एवज फ्लुइड डाईनेमिक्स के एक सूत्र की मदद ली जाती है .साथ ही एकोकार्डियोग्रेफ़ी भी इस परीक्षण के साथ साथ भी की जाती है रक्त परीक्षण भी चलतें हैं .

खूबसूरती इस परीक्षण की यह है कि इसे आउट पेशेंट के बतौर ही करवा लिया जाता है .न अस्पताल में भर्ती होने का झंझट न खाली पेट आने १० -१२ घंटे की फास्टिंग सारा प्रोसीज़र पांच मिनिट में ही संपन्न कर लिया जाता है .घंटा भर बाद अस्पताल से छुट्टी .न कपडे उतारकर अस्पताल के कपड़ों में घुसने का चक्कर .इसीलिए इसे यूज़र फ्रेंडली एंजियोग्रेफ़ी कह दिया जाता है .३०-४०%के माइल्ड ब्लोकेड का भी पता लगा लिया जाता हैं इस प्राविधि से .बस एग्रेसिव मेडिकल ट्रीट मेंट्स ,दवाओं के ज़ रिए ही ब्लड प्रेशर ,ब्लड सुगर ,कोलेस्ट्रोल आदि को मान्य स्तर पर ले आया जाता है .योग के साथ -साथ जीवन शैली में सुधार लाकर रोग के बढ़ने को थाम लेने की ज़ोरदार मुहीम छेड़ दी जाती है .
अलबत्ता किसी प्रमुख धमनी में ८०-९०%रुकावट मिलने पर एंजियोप्लास्टी के साथ साथ स्टंटइंग भी कर दी जाती है .इसे क्रिटिकल ब्लोकेड माना जाता है .मेट्रो अस्पताल के डॉ .पुरुषोत्तम लाल जी अब तक १५,००० प्रोसीज़र १००%कामयाबी के साथ मेट्रो कोरोनरी स्क्रीनिंग के संपन्न कर चुके हैं .यह आलमी स्तर पर एक रिकार्ड है .इंटर वेंश्नल कार्डियोलोजी की चौथी आलमी बैठक में आपने इसका विस्तार से उल्लेख अपने एक शोध पत्र में हाल ही में कियाथा .बैठक यू. के. में संपन्न हुई थी .
बात साफ़ है दिल की सेहत का पूरा जायजा लेना है तो व्यापकस्तर पर चौतरफा कार्डिएक चेक अप ,दिल की जांच करवाइए .कच्चा चिठ्ठा सामने आ जाएगा .
Reference material :FOR THE HEALTHY HEART
How Do I Know My Heart Is Ok?/TIMES CITY/TOI,OCTOBER 30,2011/p3

8 टिप्‍पणियां:

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

जब से कई युवाओं को जाते देखा है, मन हिल सा गया है।

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

Pahale hi chet jaye.... Zaroori hai...

मनोज कुमार ने कहा…

उम्र फ़िफ़्टीज़ में, वेट नाइन्टीज़ में और जीवन शैली बेहद आलसी। उस पर से बीपी और डायबिटिज़ .. सारा इंतज़ाम कर रखा हूं। और यह प्रश्न भी खुद से कभी नहीं करता कि --- "कैसे जानू मैं अपने ही दिल की सेहत का हाल ,कैसे पता चले सब ठीक ठाक भी है ?"

Vivek Rastogi ने कहा…

इसी चक्कर में हमने प्रतिवर्ष पूर्ण चैक अप करवाना शुरु कर दिया है, अभी टीएमटी करवाया था, शुक्र है सब ठीक है।

डॉ टी एस दराल ने कहा…

बेहद उपयोगी जानकारी पूर्ण लेख ।
वीरुभाई बहुत सही लिखा है ।
कई दिनों से आपसे गुफ्तगू नहीं हो पाई ।
शुभकामनायें ।

डॅा वेदप्रकाश श्योराण ने कहा…

ऐसे लेख पढ कर डर लगता है या कानफिडै।स आता है ? ये है असल बात,,,,,,,दिन नहीं बदलेगाा प्रस्थान का,,,,

डॅा वेदप्रकाश श्योराण ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
Arvind Mishra ने कहा…

जानकारीपूर्ण!