गुरुवार, 20 अक्तूबर 2011

छरहरी काया के लिए प्रोटीन बहुल खुराक लीजिए .

छरहरी काया के लिए प्रोटीन बहुल खुराक लीजिए .

एक नए अध्ययन के मुताबिक़ तन्वंगी बने रहने के लिए केवल केलोरी कम करना ही कॉफ़ी नहीं है खुराक में ज्यादा से ज्यादा प्रोटीनों को शामिल करना चाहिए .सिडनी विश्व विद्यालय के रिसर्चरों ने पता लगाया है कम प्रोटीन युक्त खुराक कुल एनर्जी इंटेक को बढा देती है .ऐसे लोग ज्यादा से ज्यादा स्नेक्स का सेवन करने लगतें हैं जिनकी खुराक में प्रोटीन कमतर रहतें हैं .नतीज़न वह ज़रुरत भर से कहीं ज्यादा खाते हैं .इस अध्ययन के नतीजे PLoS ONE जर्नल में प्रकाशित हुए हैं .पता यह भी चला है प्रोटीन का पर्याप्त सेवन ज्यादा संतुष्टि देता है भूख को ज्यादा देर तक शांत रखता है इसलिए लोग ज़रुरत भर ही खाते हैं तथाअतिरिक्त कार्बोहांड्रेट्स तथा चिकनाई युक्त पदार्थों के फ़िज़ूल गैर ज़रूरी सेवन से बचे रहते हैं .
पहली मर्तबा विज्ञान सम्मत पुष्टि हुई है इस बात की कि खुराकी प्रोटीन भूख को असर ग्रस्त करती है विनियमन करती है एपेटाईट का .
आलमी स्तर पर बढ़ते मोटापे ओबेसिटी का समाधान प्रस्तुत करता है यह अध्ययन .
कुदरती तौर पर आदमी का रुझान प्रोटीनों की तरफ ज्यादा होता है ,स्ट्रोंग एपेटाईट रहता है प्रोटीनों के प्रति लेकिन जब खुराक में इनकी कमीबेशी रह जाती है तब स्वाभाविक तौर पर ऊर्जा का इंटेक बढ़ जाता है .और आज के खान पानी माहौल में ,न्युत्रिश्नल एनवायरनमेंट में चिकनाई और मिठास सने सुस्वादु खाद्यों की सहज और सस्ते दामों पर सुलभता इनकी और व्यक्ति को ले जाती है .गहरे निहितार्थ हैं इसके वेट मेनेजमेंट में .वजन को कद काठी के अनुरूप आदर्श वजन बनाए रहने में प्रोटीनों के महत्व को नकारना मुश्किल है .
रिसर्चरों के मुताबिक़ प्रोतिनें ही ड्राइविंग फ़ोर्स बनती हैं कितने ही पशुओं के मामले में (घोड़े को लाल चने इसीलिए खिलाए जातें हैं ).
बेशक पूर्व में भी ऐसी सिफारिशें पोषण विदों ने की हैं कि ऊर्जा की कुल खपत का आधार प्रोतिनें ही बनतीं हैं लेकिन इसके विज्ञान सम्मत मात्रात्मक साक्ष्य इस अध्ययन ने ही पहली मर्तबा जुटाए हैं .खाओ चने रहो बने .
ओर
Tooth -decay germs tied to bowel cancer
Tooth -decay germs tied to bowel cancer

फूसोबेकटीरियम एक ऐसा रोगकारक जीवाणु है जो दंत क्षय और चमड़ी में होने वाले ज़ख्मों की वजह बनता रहा है .जब से रिसर्चरों की दो अलग अलग टोलियों को यह ज़रासीम बड़ी आंत के अर्बुदों (कोलोंन ट्यूमर्स )में मिला है आशंका यह जतलाई जा रही है यह या तो हमारी अंतड़ियों को गुदा से सम्बद्ध करने वाले बोवेल कैंसरों की वजह बनता है या फिर कैंसर पैदा करने वाले बदलाव पैदा करता है .बहरसूरत यह आकस्मिक तौर पर हाथ आया है या वास्तविक कुसूरवार है यह अभी तय नहीं है .
अन्वेषण ज़ारी रहेंगे .बेशक यदि यही वास्तविक कारक है काज़ेतिव एजेंट है तब एंटीबायोटिक से इसकी काट भी होनी चाहिए,.बचावी चिकित्सा भी .विज्ञान पत्रिका 'जीनोम रिसर्च 'में यह अन्वेषण प्रकाशित हुआ है .
ब्रेस्ट और लंग कैंसर के बाद सर्वाधिक होने वाला यही बोवेल कैंसर है .तीसरा सबसे ज्यादा आमफ़हम कैंसर यही है .बेशक बोवेल कैंसर के होने की असल वजूहात किसी को भी नहीं मालूम अलबत्ता कौन कौन से खतरे और जोखिम तत्व हैं उनमे जोखिम के वजन को बढाने में पारिवारिक पूर्व वृत्तांत (फेमिली हिस्टरी )तथा बढती हुई बुदापे की उम्र तो है ही .
माहौल का भी इसे पनपाने में कुछ न कुछ हाथ रहता है यह कहना है सरह विलियम्स का .आपने उस माहौल का अध्ययन किया है जिसमे यह तेज़ी से बढ़ता है .अभी तो शुरुआत है आगे और भी अध्ययनों की दरकार रहेगी .
वक्त है धूम्रपान से परहेज़ रखते हुए इसके खतरे के वजन को थोड़ा कम किया जाए .एल्कोहल का सेवन कम किया जाए ,वजन को कद काठी के अनुरूप आदर्श रूप हेल्दी रखा जाए .सक्रिय जीवन शैली के साथ -साथ संशाधित और रेड मीट का खुराकी सेवन कमसे कम किया जाए .खाद्य रेशा बहुल खुराक को तरजीह दी जाए .
दोनों रिसर्च टीमों ने अपने अध्ययन में तकरीबन सौ से भी ज्यादा साम्पिलों का अध्ययन विश्लेषण किया है जिनमे स्वस्थ और कैंसर युक्त बोवेल टिश्यु शामिल रहें हैं .इन्हीं में से इस रोगकारक जीवाणु फूसोबेकटीरियम का पता चला है.टीम ने साम्पिलों में आनुवंशिक पदार्थ की शिनाख्त के बाद इस संभावित अंतर -सम्बन्ध की पुष्टि की है .
ram ram bhai


शिशु विकास के पंख नोचता है बुद्धू बक्सा .
October 19,2011 .
TV hampers development in infants ,warn doctors
शिशु विकास के पंख नोचता है बुद्धू बक्सा .
बालरोग माहिरों के एक अमरीकी समूह ने अपने एक अध्ययन के मार्फ़त माँ -बाप को चेताया है कि वह अपने शिशुओं (०-२ साला )को टीवी तथा वीडियोज न देखने दे ,हतोत्साहित करें .दो साल से कम उम्र के शिशुओं के लिए यह घातक सिद्ध हो सकता है उनके विकास को अवरुद्ध कर सकता है .
बेहतर हो माँ -बाप उनसे बतियाएं उन्हें स्वतंत्र रूप उछल कूद खेल के लिए उकसाएं .दस साल से भी ज्यादा अंतराल के बाद पहली मर्तबाअमरीकी अकादमी ऑफ़ पीडियाट्रिक्स के शिशु रोगों के माहिरों ने ये सिफारिशें ज़ारी की हैं .बाज़ आयें माँ -बाप अपने नन्नों को टीवी और वीडियोज से चिपकाने से .जी हाँ हुकिंग हो जाती है नौनिहालों की इन दृश्य छवियों से .टीवी और वीडियोज से .
१९९९ में भी ऐसी सलाह अमरीका के उस वक्त के सबसे बड़े बाल रोग माहिरों के संघ ने दी थी .इस मर्तबा एक नै सिफारिश यह की है स्वयम माँ -बाप को भी चेताया गया है बतलाते हुए कि उनका भी टीवी से ज्यादा चिपके रहना उनके बच्चों के बोलने बोलना सीखने की पहल को मुल्तवी और निलंबित रखेगा .इसलिए भी माँ -बाप को उनके साथ अधिकाधिक बतियाना ज़रूरी है .
"This updated policy statement provides further evidence that media -both foreground and background -have potentially negative effects and no known positive effects for children younger than two years,"it said.
बेशक ये अनुदेश "स्मार्ट फोन्स "पर खेले जाने वाले वीडियोगेम्स "को अपने दायरे से बाहर रखे हुए हैं .इन्हें इंटरेक्टिव समझा गया है .लेकिन पेसिव स्क्रीन वाचिंग पर यह सिफारिशें बा -कायदा लागू होतीं हैं .
गौर तलब है इन सिफारिशों को नजर अंदाज़ करने के अपने खतरे हैं क्योंकि इस दौरे -दौरां में बच्चों को ही लक्षित रखते हुए बेबी डीवीडीज ज़ारी की जा रहीं हैं रोज़ -बा -रोज़ .९० %माँ -बाप इस बात को मानते हैं कि उनके शिशु (०-२ साला ) इलेक्ट्रोनिक मीडिया से किसी न किसी रूप में जुड़े हुएँ हैं .यह एक चिंतनीय स्थिति है .समाधान माँ -बाप को ही तलाशना होगा .
ram ram bhai

'Breastmilk contains stem cells'


करामाती माँ का दूध ,ह्यूमेन ब्रेस्ट मिल्क कलम कोशाओं(स्टेम सेल्स ) से भी लैस है पोषक तत्व और इम्युनिटी का प्राथमिक स्रोत तो है ही .साइंसदानों के मुताबिक़ माँ के दूध में मौजूद इन कलम कोशाओं स्टेम या मास्टर सेल्स को न सिर्फ अश्थी कोशाओं में ढाला जा सकता है ,स्वयम स्तन कोशिकाएं भी इनसे गढ़ी जा सकतीं हैं ,रची जा सकतीं हैं उपास्थि कोशाएं (कार्तिलेजिज़ सेल्स ),वसा कोशाएं ,यकृत और अग्नाशय कोशिकाएं (पैन्क्रियेतिक सेल्स ) पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के साइंसदान Dr Foteini Hassiotou के नेत्रित्व में रिसर्चरों की एक होनहार टोली ने यहाँ तक आश्वस्त किया है , ब्रेस्ट मिल्क में लाइलाज पार्किन्संज़ तथा मधुमेह जैसे रोगों के प्रबंधन में भी मददगार बनने की क्षमता निहित है .
ram ram bhai