मंगलवार, 11 अक्तूबर 2011

Cannabis may help ease pain from chemotherapy

Cannabis may help ease pain from chemotherapy
गांजे में पाया जाने वाला एक रसायन कैंसर की परम्परा गत चिकित्सा किमो -थिरेपी के पार्श्व प्रभावों से पैदा न्यूरोपैथिक
या नर्व पैन से निजात दिलाने का वायदा करता प्रतीत होता है .एक ताज़ा अध्ययन से ऐसी ही उम्मीद बंध चली है .
टेम्पल विश्वविद्यालय के भेषज स्कूल (स्कूल ऑफ़ फार्मेसी )के रिसर्चदानों ने एक रसायन "केनाबिडियोल "का मारिजुआना के एक महत्वपूर्ण और बहुतायत से उपलब्ध घटक (अवयव )के रूप में पता लगाया है .समझा जाता है यह किमोथिरेपी चिकित्सा से पैदा नर्व पीड़ा से राहत दिलवा सकता है ।
बढ़िया और भरोसा पैदा करने वाली बात यह है कि मारिजुआना में मौजूद एक और रसायन " THC" की तरह इस रसायन के साइकोएक्टिव प्रभाव नहीं हैं .न इसके सेवन से अतिरिक्त भूख लगती है और न बिना किसी वजह के बेहद की सुखानुभूति होती है यूफोरिया होता है .न ही बोध सम्बन्धी ,संज्ञानात्मक अभाव सामने आता है ।
बढ़िया बात यह है इस यौगिक में मारिजुआना ke चिकित्सीय असर थिरापेतिक इफेक्ट्स तो हैं पार्श्व प्रभाव नहीं हैं ।
जर्नल "एनास्थिज़िया एंड एनाल्जिज़िया "में इस अध्ययन के नतीजे प्रकाशित हुए हैं ।
स्तन कैंसर के प्रबंधन में स्तेमाल होने वाली एक किमो ड्रग है "पक्लिताक्सेल""Paclitaxel'isi ke avaanchhit parinaamon ke falsvroop behad kee nrv peedaa paidaa hoti hai .
am ram bhai
RAM RAM BHAI
Sleep -deprivation in teens may lead to brain damage
Sleep -deprivation in teens may lead to brain damage
माँ -बाप को बराबर यह देखना चाहिए उनकी किशोर संतानें पर्याप्त नींद भी ले रहीं हैं या नहीं .एक अन्य अध्ययन से इल्म हुआ है नींद से ज़रूरी न्यूनतम पर्याप्त नींदसे भी महरूम रह जाना आगे चलकर उनके दिमाग की कार्यप्रणाली को असर ग्रस्त कर सकता है ,ब्रेन डेमेज की भी वजह बन सकता है ।
विस्कोंसिन-माडिसन विश्वविद्यालय के रिसर्चरों ने इस अध्ययन को संपन्न किया है .पता लगाया गया है किशोरावस्था में यथेष्ट नींद न ले पाने वाले किशोर किशोरियों के दिमाग की वायरिंग आगे चलकर दीर्घावधि में नष्ट हो सकती है ,डेमेज (क्षतिग्रस्त ) हो सकती है .डेली मेल अखबार ने इस शोध के तमाम नतीजे प्रकाशित किये हैं .
राम राम भाई साहब !
Pollution impairs brain functioning
Leads To Learning ,Memory प्रॉब्लम
वाहनों के इग्जास्त पाइप से निकलने वाला धुआं ,ट्रेफिक फ्युम्स ,जला अधजला ईंधन न सिर्फ हमारे फेफड़ों के सुचारू रूप काम करने को बाधित करता है दिमाग के प्रकार्य को भी अपनी चपेट में लेता है .दुष्प्रभाव डालता है दिमाग के काम करने के ढंग पर ।
अपने एक अध्ययन में हार्वर्ड स्कूल ऑफ़ पब्लिक हेल्थ ,बोस्टन के साइंसदानों ने पता लगाया है उच्च स्तर के ट्रेफिक फ्युम्स में रहने वालों के दिमाग संज्ञानात्मक कार्य ,कोगनिटिव परीक्षाओं में पिछड़ जातें हैं .इनके बोध सम्बन्धी टेस्ट्स असर ग्रस्त होतें हैं ट्रेफिक फ्युम्स से ज्यादा प्रदूषित हवा में लगातार बरसों बरस रहने से ।
पचास साला वे तमाम लोग जो ऐसे ही प्रदूषित इलाकों में रहते आयें हैं कोगनिटिव स्कोर्स में पिछड़ गएँ हैं बरक्स उनके जो अपेक्षाकृत कम गंदलाई प्रदूषकों से गंधाती हवा में रहते आयें हैं ।
यह अंतर तब भी मुखर हुआ है जब इन लोगों के सामाजिक और शैक्षिक स्तर के फर्क को भी मूल्यांकन में शामिल रखा गया है ।
एक और अध्ययन में जिसे ओहायो स्टेट यूनिवर्सिटी ,कूलाम्बस के शोध कर्ताओं ने चूहों पर किया है पता चला है कि हवा में पसरे मंडराते रहते कणीय प्रदूषक जो डीज़ल चालित वाहन हमारी हवा में झोंकते रहतें हैं दिमाग में दिमाग की एकल इकाई न्यूरोन (न्यूरोन इज ए क्वांटम ऑफ़ ब्रेन ,दिमाग की एक कोशिका नर्व सेल को ही न्यूरोन कहा जाता है )की बढवार को कम करके सीखने और याद रखने के काम में खलल पैदा करतें हैं ।
ज़ाहिर है सीखने याद रखने के काम में बाधा डालतें हैं एयर बोर्न कणीय प्रदूषक .डेली टेलीग्राफ ने प्रकाशित किया है इस रिपोर्ट को ।
हार्वर्ड विश्वविद्यालय अध्ययन में ५१ -९७ साला ६८० पुरुषों को शामिल किया गया .एवरेज लाइफ एक्सपोज़र के साथ साथ इनके कोगनिटिव टेस्टों की भी पड़ताल की गई ।
It found that that those living in areas that were exposed to twice as much black carbon as low pollution areas were १.३ times more likely to have lower cognitive scores .

बात साफ़ है :ट्रेफिक जन्य वायु प्रदूषण ,वाहनों के इग्जास्त पाइपों से निकलता ब्लेक कार्बन बुजुर्गों के संज्ञानात्मक ग्लोबल कोगनिटिव फंक्शन (बोध सम्बन्धी परीक्षणों ,क्षमताओं,प्रकार्यों ) को बुरी तरह प्रभावित करता है ।
यह भी पता चला कि ट्रेफिक से पैदा वायु प्रदूषण .,हमारी हवा में दाखिल होते कणीय प्रदूषक धूम्रपान करने वालों को बोध सम्बन्धी (कोगनिटिव )नुकसानी ज्यादा पहुंचाते हैं .मोटापे से ग्रस्त लोगों को भी ज्यादा नुकसान पहुंचाता है ।
बेशक यह अध्ययन मर्दों तक ही सीमित रखा गया है लेकिन रिसर्चरों के अनुसार महिलाकों पर भी यही असर दर्ज़ होता ।
In another study in mice ,the researcher found that exposure to fine particles of pollution known as PM2.5 s caused increases in the levels of inflammatory molecules in the animal's brains.

4 टिप्‍पणियां:

जाट देवता (संदीप पवाँर) ने कहा…

नशे से अपनी तो दूर से जय राम जी की

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

यदि केंसर चिलम लगाने से ही हुआ हो तो...

Sunil Kumar ने कहा…

जानकारी से भरपूर एक पोस्ट जिसका स्वागत किया जाना चाहिए , बधाई

सतीश सक्सेना ने कहा…

उपयोगी जानकारी दी है वीरू भाई ....
शुभकामनायें आपको !